बाजार में फॉर मेन और फॉर विमेन के नाम पर अलगअलग क्रीम और फेसवॉश बिकते हैं. सवाल यह है कि क्या दोनों की त्वचा इतनी अलग है कि इनके ब्यूटी प्रोडक्ट भी अलग होने चाहिए. क्या पुरुषों को महिलाओं के ब्यूटी प्रोडक्ट लगाने चाहिए. आइए समझते हैं, विज्ञान इस पर क्या कहता है? रिसर्च बताती है कि दोनों के प्रोडक्ट में फर्क है, लेकिन ज्यादातर अंतर हार्मोन से जुड़ा है.

पुरुषों की त्वचा औसतन करीब 20% मोटी होती है और उसमें कोलेजन ज्यादा होता है. पुरुषों में सीबम ज्यादा बनता है और रोमछिद्र बड़े होते हैं. इसकी वजह टेस्टोस्टेरोन है. इसी कारण पुरुषों में तैलीय त्वचा और मुंहासों की आशंका बढ़ जाती है.
क्या कहती है रिसर्च?
एक अध्ययन में पुरुषों की त्वचा का pH 5 से कम और महिलाओं का 5 से ज्यादा पाया गया. इसी वजह से महिलाओं की त्वचा अक्सर ज्यादा रूखी होती है और उन्हें मॉइस्चराइजर की जरूरत ज्यादा पड़ती है. उम्र के साथ स्किन में भी बदलाव आते हैं. टाइप ब्यूटी की फाउंडर अनन्या कपूर कहती हैं, “फॉर्मूलेशन विज्ञान के नजरिए से देखें तो, मेकअप प्रोडक्ट स्वाभाविक रूप से किसी खास जेंडर के लिए नहीं होते. फाउंडेशन, कंसीलर और लिप प्रोडक्ट्स जैसे उत्पाद पिगमेंट कंसंट्रेशन, शेड, टेक्सचर, फैलने की क्षमता और फिनिश जैसी चीजों को ध्यान में रखकर बनाए जाते हैं, न कि जेंडर के आधार पर. हालांकि हार्मोनल अंतर, सीबम प्रोडक्शन, चेहरे के बाल और त्वचा के टेक्सचर जैसी विशेषताओं को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन ये फैक्टर यह तय नहीं करते कि कोई व्यक्ति किसी खास मेकअप उत्पाद का इस्तेमाल कर सकता है या नहीं.
महत्वपूर्ण बातें ये हैं कि प्रोडक्ट का फॉर्मूलेशन कैसा है. वह व्यक्ति की त्वचा के अनुकूल है या नहीं और उससे कैसा कॉस्मेटिक रिजल्ट मिलता है. प्रोडक्ट का असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी खूबियां उपयोगकर्ता की जरूरतों से कितनी अच्छी तरह मेल खाती हैं. न कि इस बात पर कि उसे किस जेंडर कैटेगरी के लिए मार्केट किया गया है.
सेरेको की फाउंडर मालविका जैन कहती हैं, सच कहें तो, आपकी स्किन बोतल पर लगे लेबल को नहीं पढ़ती. मुहांसे, रूखापन, सेंसिटिविटी और समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षण पुरुषों और महिलाओं दोनों में समान रूप से दिख सकते हैं. फर्क सिर्फ इनके कारणों में होता है, जैसे कि हार्मोन, तनाव, नींद, जीवनशैली या वह वातावरण जिसमें कोई व्यक्ति रहता है. ‘साइकोडर्मेटोलॉजी’ के नजरिए से देखें तो यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हम जो महसूस करते हैं, वह अक्सर हमारी त्वचा पर दिखाई देता है. इसलिए, यह पूछने के बजाय कि कोई उत्पाद ‘पुरुषों के लिए’ है या ‘महिलाओं के लिए’, यह पूछें कि आपकी त्वचा को असल में किस चीज की जरूरत है और कौन से इंग्रीडिएंट्स उस जरूरत को पूरा कर सकते हैं. स्किनकेयर तब सबसे अच्छा काम करती है जब वह व्यक्ति की अपनी जरूरतों के हिसाब से हो, न कि जेंडर के आधार पर तय की गई हो.
कोई ब्यूटी या स्किनकेयर उत्पाद किसी व्यक्ति के लिए उपयुक्त है या नहीं, यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि उसका फॉर्मूलेशन कैसा है और व्यक्ति की अपनी जरूरतें क्या हैं, न कि इस बात पर कि उसे पुरुषों के लिए मार्केट किया गया है या महिलाओं के लिए। मेकअप में, स्किन टोन, स्किन टाइप, पिगमेंट का फैलाव, टेक्सचर, कवरेज और मनचाही फिनिश जैसे कारक तय करते हैं कि कोई उत्पाद कैसा काम करेगा. उदाहरण के लिए, एक ही कंसीलर का इस्तेमाल पुरुष और महिलाएं दोनों कर सकते हैं. चुनाव इस बात पर निर्भर करेगा कि स्किन टोन कैसी है, त्वचा रूखी है या तैलीय और आपको कितना कवरेज चाहिए. अक्सर फर्क इस बात में होता है कि उत्पाद को कैसे लगाया जा रहा है और आप कैसा परिणाम चाहते हैं.
ग्लोबल ब्यूटी मार्केट में बदलाव
चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे एशियाई ब्यूटी बाजारों में भी यह बदलाव देखा जा रहा है. यहां मेकअप और स्किनकेयर उत्पादों का प्रचार सभी जेंडर के लिए किया जा रहा है. ब्यूटी कैंपेन में पुरुष और महिला दोनों तरह के मॉडल शामिल किए जा रहे हैं. चीन में उभरता ‘एंटीब्लश’ ट्रेंड इसका एक और उदाहरण है. इसमें पारंपरिक गुलाबी शेड्स के बजाय हल्के और न्यूट्रल टोन वाले ब्लश शेड्स चुने जाते हैं, जो दिखाता है कि मेकअप को लेकर लोगों की पसंद अब पारंपरिक जेंडर धारणाओं से आगे बढ़ रही है.
ग्रूमिंग में दिलचस्पी
भारत में भी पुरुषों की मेकअप, स्किनकेयर और ग्रूमिंग में दिलचस्पी बढ़ रही है, इसलिए यहां भी उपभोक्ताओं के व्यवहार में ऐसे ही बदलाव देखने को मिल सकते हैं. ‘प्राउश ब्यूटी’ के सहसंस्थापक गरिमा जुनेजा और गौरव मिश्रा कहते हैं, उत्पाद का चुनाव जेंडर लेबल के आधार पर नहीं, बल्कि इस आधार पर होना चाहिए कि वह आपकी त्वचा के अनुकूल है या नहीं, उसमें क्या इंग्रीडिएंट्स हैं, उसका फॉर्मूलेशन कैसा है और आप कैसा परिणाम चाहते हैं”
एनालॉजी ब्यूटी के फाउंडर गौरीश सचदेवा कहते हैं, पारंपरिक रूप से स्किनकेयर को पुरुषों और महिलाओं की श्रेणियों में बांटा गया है. अक्सर यह बंटवारा त्वचा की अलगअलग जरूरतों के बजाय खुशबू, टेक्सचर और पैकेजिंग के अंतर पर आधारित होता है. असल में, त्वचा इस बात पर प्रतिक्रिया देती है कि उत्पाद कैसे बनाया गया है और वह किसी व्यक्ति की त्वचा की समस्याओं या जरूरतों के लिए कितना उपयुक्त है. उदाहरण के लिए, कोरियन स्किनकेयर में अपनाए जाने वाले मल्टीस्टेप तरीके में उत्पादों को उनके उद्देश्य के अनुसार एक के ऊपर एक लगाया जाता है. इससे लोग अपनी त्वचा की जरूरत के हिसाब से अपना रूटीन बना सकते हैं. अगर किसी पुरुष की त्वचा रूखी या संवेदनशील है, तो उसे भी उन्हीं हाइड्रेटिंग उत्पादों से फायदा मिल सकता है जो वैसी ही समस्या वाली किसी महिला के लिए काम करते हैं. बदलाव इस दिशा में होना चाहिए कि स्किनकेयर पूरी तरह से ‘जरूरतों’ पर आधारित हो. जेंडरआधारित लेबल के बजाय अपनी त्वचा को समझना ज्यादा महत्वपूर्ण होना चाहिए.