नई दिल्ली। कोरोना वायरस के नए वैरिएंट से निपटने के लिए भारत में वैक्सीन को अपडेट करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बायोलॉजिकलई कंपनी की कॉर्बेवैक्स वैक्सीन को ओमिक्रॉन के जेएन.1 वैरिएंट के अनुरूप अपडेट करने के प्रस्ताव पर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की विषय विशेषज्ञ समिति ने कुछ शर्तों के साथ सिफारिश की है। इस फैसले के साथ ही कोरोना के बदलते स्वरूप के खिलाफ टीकाकरण की तैयारी और वैक्सीन की सुरक्षा निगरानी पर चर्चा तेज हो गई है।

280 लोगों पर किए गए अध्ययन के आंकड़े पेश
प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, कॉर्बेवैक्स वैक्सीन बनाने वाली कंपनी बायोलॉजिकलई ने 18 से 80 वर्ष की उम्र के 280 लोगों पर किए गए अध्ययन से संबंधित सुरक्षा और प्रतिरक्षा संबंधी आंकड़े विशेषज्ञ समिति के सामने प्रस्तुत किए। समिति ने इन आंकड़ों पर विचार करने के बाद वैक्सीन को नए वैरिएंट के अनुरूप अपडेट करने के प्रस्ताव पर शर्तों के साथ आगे बढ़ने की सिफारिश की।
कोरोना वायरस लगातार अपना स्वरूप बदल सकता है। ऐसे में वैक्सीन को नए वैरिएंट के अनुरूप तैयार करने का उद्देश्य प्रतिरक्षा संबंधी प्रभावशीलता को बेहतर ढंग से बनाए रखना है। हालांकि, किसी वैक्सीन की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन संबंधित वैज्ञानिक आंकड़ों और नियामकीय समीक्षा के आधार पर ही किया जाता है।
विशेषज्ञ समिति ने सुरक्षा को लेकर क्या शर्तें रखीं?
विशेषज्ञ समिति ने वैक्सीन को अपडेट करने की सिफारिश के साथ सुरक्षा और निगरानी से जुड़ी कई अहम शर्तें भी रखी हैं। इनमें वैक्सीन से संबंधित सुरक्षा आंकड़े प्रस्तुत करना, टीकाकरण के बाद होने वाले संभावित दुष्प्रभावों की निगरानी जारी रखना और टीका लगवाने वाले लोगों को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना शामिल है।
समिति ने यह भी कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों और टीका लगवाने वाले लोगों के लिए अलगअलग जानकारी पत्र उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वैक्सीन के उपयोग, सावधानियों और संभावित दुष्प्रभावों से संबंधित जरूरी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जा सके। इसके अलावा टीकाकरण का रिकॉर्ड CoWIN या UWIN जैसे निर्धारित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज करने की शर्त भी बताई गई है।
कोरोना के बदलते वैरिएंट पर नजर रखना जरूरी
कोरोना महामारी के दौरान सामने आया अनुभव बताता है कि वायरस के नए स्वरूपों पर निगरानी, समय पर जांच और स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों का पालन महत्वपूर्ण है। जेएन.1 वैरिएंट को ध्यान में रखते हुए वैक्सीन के अपडेट का प्रस्ताव भी इसी व्यापक तैयारी का हिस्सा है।
विशेषज्ञों की समीक्षा में वैक्सीन की सुरक्षा के साथसाथ शरीर में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से जुड़े आंकड़ों को भी महत्व दिया जाता है। इसके लिए अध्ययन के परिणामों, संभावित दुष्प्रभावों और नियामकीय आवश्यकताओं का मूल्यांकन किया जाता है।
क्या आम लोगों को तुरंत लगवानी होगी नई वैक्सीन?
कॉर्बेवैक्स के अपडेट संबंधी सिफारिश को सभी लोगों के लिए तत्काल टीकाकरण का निर्देश नहीं माना जाना चाहिए। वैक्सीन के अंतिम नियामकीय अनुमोदन, उपयोग की पात्रता और टीकाकरण संबंधी दिशानिर्देशों की जानकारी आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल इस घटनाक्रम का मुख्य पहलू यह है कि विशेषज्ञ समिति ने जेएन.1 वैरिएंट के अनुरूप वैक्सीन अपडेट करने के प्रस्ताव पर सुरक्षा निगरानी और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने जैसी शर्तों के साथ सिफारिश की है।