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काशी विश्वनाथ से ताजमहल तक… जनगणना में शामिल हुईं UP की ऐतिहासिक धरोहरें, 1.35 करोड़ घरों को मिला नंबर

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में जनगणना 2027 की तैयारियां औपचारिक रूप से शुरू हो गई हैं. शुक्रवार से राज्यभर में मकान सूचीकरण और भवन गणना का कार्य आरंभ हुआ. पहले ही दिन प्रगणकों ने रिकॉर्ड 1.35 करोड़ से अधिक भवनों को जनगणना नंबर प्रदान कर बड़ी उपलब्धि हासिल की. राज्य सरकार ने इसे जनगणना अभियान की मजबूत और प्रभावी शुरुआत बताया है.

काशी विश्वनाथ से ताजमहल तक… जनगणना में शामिल हुईं UP की ऐतिहासिक धरोहरें, 1.35 करोड़ घरों को मिला नंबर
काशी विश्वनाथ से ताजमहल तक… जनगणना में शामिल हुईं UP की ऐतिहासिक धरोहरें, 1.35 करोड़ घरों को मिला नंबर

सांस्कृतिक धरोहरों को भी किया गया शामिल

इस बार की जनगणना कई मायनों में खास मानी जा रही है. प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को विशेष महत्व देते हुए काशी विश्वनाथ मंदिर, ताजमहल और झांसी का किला को भी औपचारिक रूप से जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया गया है.

इन विश्व प्रसिद्ध धरोहरों का मकान सूचीकरण और अभिलेखीकरण केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और उसे भविष्य के लिए दस्तावेजीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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घर-घर पहुंचे प्रगणक और पर्यवेक्षक

राज्य के कुल 3,89,312 मकान सूचीकरण ब्लॉकों (HLB) में शुक्रवार को प्रगणक और पर्यवेक्षक घर-घर पहुंचे. अधिकारियों के अनुसार, पहले दिन 1,35,02,160 भवनों को जनगणना नंबर दिए गए. साथ ही नजरी नक्शा तैयार करने का कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किया गया.

दोपहर 4:30 बजे तक 56 ब्लॉकों में सूचीकरण कार्य पूरी तरह संपन्न हो चुका था, जबकि 14,546 ब्लॉकों में मोबाइल एप्लिकेशन के जरिए डिजिटल डेटा संग्रहण शुरू हो गया था. प्रशासन का दावा है कि डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल से इस बार जनगणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और तेज होगी.

स्व-गणना अभियान में भी लोगों ने दिखाई रुचि

जनगणना के पहले चरण में 7 मई से 21 मई तक स्व-गणना अभियान चलाया गया था. इस दौरान प्रदेशभर के 47,96,158 परिवारों ने ऑनलाइन माध्यम से स्वयं अपना पंजीकरण कराया. अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सक्रिय भागीदारी से जनगणना अभियान को काफी मजबूती मिली है.

सामाजिक और सांस्कृतिक तस्वीर पेश करने का अवसर

राज्य प्रशासन के मुताबिक, जनगणना 2027 केवल जनसंख्या गणना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने का भी बड़ा अवसर है. खास तौर पर काशी विश्वनाथ मंदिर, ताजमहल और झांसी किले जैसे प्रतीकात्मक स्थलों को इस प्रक्रिया में शामिल किए जाने से यह अभियान और भी ऐतिहासिक बन गया है.

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