कानपुर में लगातार बारिश के बाद सड़कें धंसने की घटनाएं तेजी से सामने आ रही हैं. कहीं सड़क के बीचोंबीच कई फीट गहरा गड्ढा बन गया, तो कहीं सड़क का किनारा मिट्टी के साथ नीचे चला गया. सबसे गंभीर मामला जाजमऊसर्किट हाउस रोड का है, जहां 26 अगस्त को सड़क धंसने से करीब 18 फीट गहरा और 3 मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया. वहीं जाजमऊ की VIP रोड पर भी एक ही जगह डेढ़ महीने के अंदर दूसरी बार सड़क धंस गई. शहर और आसपास के इलाकों में सामने आई इन घटनाओं ने सड़क की मजबूती, ड्रेनेज और अंडरग्राउंड पाइपलाइन सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

कहांकहां धंसी सड़कें?
जाजमऊसर्किट हाउस रोड
26 अगस्त को तेज बारिश के बाद जाजमऊ से सर्किट हाउस जाने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा धंस गया. यहां करीब 18 फीट गहरा और करीब 3 मीटर चौड़ा गड्ढा बन गया, जिससे सड़क पर आवाजाही प्रभावित हुई.
जाजमऊ VIP रोड
सरैया चौराहे के पास 26 अगस्त को करीब 5 फीट गहरा गड्ढा बन गया. इससे पहले 10 जुलाई को इसी जगह करीब 7 फीट गहरा गड्ढा बन चुका था. यानी मरम्मत के करीब डेढ़ महीने बाद सड़क दोबारा धंस गई.
पलिया बांसखेड़ापांडु नदी पुल
8 अगस्त को पांडु नदी पुल के पास सड़क का एक हिस्सा धंस गया. करीब 2 मीटर गहरा गड्ढा बनने के बाद पुलिस ने बैरिकेडिंग कराई. इसके बाद PWD ने मिट्टी भरकर कंक्रीट से सड़क की मरम्मत कराई.
ईशन नदी पुल, बिल्हौर
19 अगस्त को बारिश के दौरान ईशन नदी पुल के पास सड़क का किनारा धंस गया. लगातार बारिश के कारण किनारे की मिट्टी कटती रही, जिससे सड़क के और हिस्से के धंसने का खतरा बढ़ गया.
काशीराम अस्पताल के सामने
काशीराम अस्पताल के सामने भी बारिश के दौरान सड़क के बीच का हिस्सा धंसने और उखड़ने की समस्या सामने आई. यहां सड़क के नीचे पानी पहुंचने, ड्रेनेज या अंडरग्राउंड लाइन में लीकेज की संभावना की जांच जरूरी है.
चकेरीकानपुरलखनऊ हाईवे
तेज बारिश के बाद चकेरी इलाके में कानपुरलखनऊ हाईवे की सर्विस लेन के आसपास मिट्टी धंसने और सड़क खराब होने की समस्या सामने आई. जलभराव और लगातार पानी के दबाव से सड़क की मजबूती प्रभावित हुई.
नौबस्ताखाड़ेपुर
नौबस्ता और खाड़ेपुर में तेज बारिश के बाद लंबे समय तक जलभराव रहा. इसे सीधे सड़क धंसने की घटना के बजाय बारिश और खराब ड्रेनेज की वजह से सड़क पर बढ़े दबाव के तौर पर देखना ज्यादा सही होगा.
आखिर क्यों धंस रही हैं कानपुर की सड़कें?
भारी बारिश से सड़क के नीचे पहुंच रहा पानी
अगस्त में कानपुर में कई दौर की तेज बारिश हुई. 5 अगस्त को ही तीन दिन में 167.5 मिमी बारिश दर्ज की गई थी. लगातार बारिश का पानी सड़क की ऊपरी लेयर के नीचे पहुंचने पर मिट्टी और सड़क का बेस कमजोर हो सकता है. इससे सड़क बैठने या अचानक धंसने की स्थिति बन सकती है.
ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव और जलभराव
कई इलाकों में नाले और नालियां भरने या चोक होने से पानी लंबे समय तक सड़क पर जमा रहा. जब पानी की निकासी नहीं होती तो यह सड़क की लेयर के नीचे पहुंचकर बेस को कमजोर कर सकता है. इससे सड़क की भार सहने की क्षमता कम हो जाती है.
अंडरग्राउंड मिट्टी के कटाव से बन सकती है खाली जगह
सड़क के नीचे लगातार पानी जाने पर मिट्टी बह या बैठ सकती है. ऊपर सड़क की सतह कुछ समय तक ठीक दिखाई देती है, लेकिन नीचे खाली जगह बनने के बाद अचानक सड़क का बड़ा हिस्सा नीचे जा सकता है. जाजमऊ में बने 18 फीट गहरे गड्ढे के मामले में भी इस तरह की स्थिति की जांच जरूरी है.
पुरानी और कमजोर सड़क पर बारिश का ज्यादा असर
जहां सड़क पहले से टूटी या कमजोर है, वहां लगातार बारिश नुकसान को और बढ़ा देती है. विजयनगरनमक फैक्ट्री चौराहे के बीच भी खराब सड़क और जलभराव की समस्या सामने आई है. ऐसे हिस्सों में पानी सड़क के अंदर जाने का खतरा ज्यादा रहता है.
सीवर और पानी की पाइपलाइन में लीकेज भी वजह हो सकती है
सड़क के नीचे बिछी सीवर या पानी की पाइपलाइन में लीकेज होने पर आसपास की मिट्टी धीरेधीरे कट सकती है. इससे सड़क के नीचे खाली जगह बनती है और ऊपर का हिस्सा अचानक धंस सकता है. इसलिए जहां बारिश के बाद गहरे गड्ढे बन रहे हैं, वहां सड़क की क्वालिटी के साथ अंडरग्राउंड पाइपलाइन और सीवर नेटवर्क की भी जांच जरूरी है. कानपुर में सामने आई घटनाओं को सिर्फ बारिश का असर मानना पर्याप्त नहीं होगा. एक ही जगह बारबार सड़क धंसने, नदीपुलों के पास मिट्टी कटने और शहर के अलगअलग हिस्सों में जलभराव को देखते हुए सड़क की क्वालिटी, ड्रेनेज सिस्टम और अंडरग्राउंड नेटवर्क तीनों की जांच जरूरी है.