विपक्षी ‘INDIA’ गठबंधन ने राजधानी में भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपना प्रदर्शन शुरू कर दिया है. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में, विपक्ष ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले “फॉर्म 6” में बदलाव और मतदाता सूची के विवादास्पद ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अपने हमले तेज कर दिए हैं. साथ ही कई तरह के गंभीर आरोप भी लगाए हैं. इन तमाम बातों से इतर क्या आपको जानकारी है कि आखिर चीफ इलेक्शन कमीशनर ज्ञानेश कुमार को एक महीने में कितनी सैलरी मिलती है?

वास्तव में उनकी बेसिक मंथली सैलरी ₹2,50,000 है, जो कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर है. सुविधाओं में 34,000 का मासिक भत्ता, मुफ्त सरकारी आवास और सरकारी कारें, सुरक्षा कवर, सब्सिडी वाली यूटिलिटीज और रिटायरमेंट के बाद अच्छीखासी पेंशन शामिल हैं. 2023 के कानून में संशोधन के बाद, केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त का वेतन तय करती है. वैसे ज्ञानेश कुमार की कुल संपत्ति के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, जिस पर RTI अधिनियम के तहत सवाल उठाए गए हैं. आइए उनकी सैलरी, सुविधाओं और भत्तों के बारे में विस्तार से बात करते हैं…
CEC की सैलरी, मुख्य सुविधाएं और भत्ते
भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त का मूल मासिक वेतन 2,50,000 रुपए है, जो किसी जज या कैबिनेट सचिव के वेतन के बराबर है. पहले यह सुप्रीम कोर्ट के जज के वेतन के बराबर था. वैसे सीईसी को खास सुविधाए भी मिलती हैं.
- 34,000 रुपए का मासिक भत्ता .
- खुद, जीवनसाथी और परिवार के आश्रित सदस्यों के लिए LTC की सुविधा .
- सरकारी आवास, ड्राइवर के साथ सरकारी गाड़ियां और सुरक्षा कवर.
- खुद और परिवार के लिए फ्री या बहुत कम कीमत पर बिजली, पानी, टेलीफोन की सुविधा और पूरा मेडिकल इलाज/सुविधाएं.
- रिटायरमेंट के बाद अच्छी पेंशन और ऊंचे संवैधानिक पदों के बराबर अन्य लाभ.
2023 में किए गए ये बदलाव
1991 के कानून के तहत, CEC और EC की सैलरी सुप्रीम कोर्ट के जजों के बराबर थी. लेकिन CEC और अन्य चुनाव आयुक्त बिल, 2023 ने CEC और EC की सैलरी को कैबिनेट सेक्रेटरी की सैलरी के बराबर कर दिया. अभी दोनों की सैलरी बराबर है, लेकिन उन्हें अलगअलग तरह से तय किया जाता है. संविधान के आर्टिकल 125 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के जज की सैलरी संसद के कानून से तय होनी चाहिए.
वहीं, कैबिनेट सेक्रेटरी की सैलरी सेंट्रल पे कमीशन की सिफारिश पर सरकार तय करती है. इस तरह, 2023 के कानून ने CEC और EC की सैलरी तय करने में एग्जीक्यूटिव को ज्यादा अधिकार दे दिए.
ज्ञानेश कुमार का करियर
ज्ञानेश कुमार केरल कैडर के 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं. वे 2024 में चुनाव आयुक्त बने और फरवरी 2025 में CEC बने. 62 साल के कुमार पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ काम कर चुके हैं. वे 31 जनवरी 2024 को मिनिस्ट्री ऑफ कोऑपरेशन में सेक्रेटरी के पद से रिटायर हुए, जो अमित शाह के अधीन आता है. उससे पहले, उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ पार्लियामेंट्री अफेयर्स में भी सेक्रेटरी के तौर पर काम किया था.
अनुच्छेद 370 को हटाना
जब अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को हटाया गया, तब कुमार अमित शाह के नेतृत्व वाले गृह मंत्रालय में कश्मीर डिवीजन के जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे. 2020 में, एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर तैनात कुमार ने गृह मंत्रालय में एक खास डेस्क की कमान संभाली. यह डेस्क अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से जुड़े सभी मामलों को देख रहा था, जिसमें ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन भी शामिल था. इससे पहले, कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के दौरान, कुमार 2007 से 2012 के बीच रक्षा मंत्रालय में जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर तैनात थे.
IIT, कानपुर से BTech
27 जनवरी 1964 को उत्तर प्रदेश में जन्मे कुमार, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी , कानपुर से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट हैं, जहां उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में BTech किया. उन्होंने हार्वर्ड, USA से इकोनॉमिक्स में PG भी किया है और इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड फाइनेंशियल एनालिस्ट्स ऑफ इंडिया से CFA की पढ़ाई कर रहे हैं. कुमार के पिता डॉक्टर थे और उनके दादा आजादी की लड़ाई लड़ने वाले थे और बाद में उत्तर प्रदेश के आगरा में प्रिंसिपल रहे.
ज्ञानेश कुमार की नेटवर्थ
CEC ज्ञानेश कुमार की नेट वर्थ के बारे में कोई सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है. इस साल अप्रैल में, TMC के पूर्व सांसद साकेत गोखले ने सवाल उठाया था कि ज्ञानेश कुमार की संपत्ति को RTI के तहत “निजी जानकारी” क्यों बताया गया. गोखले ने कहा कि एक पूर्व IAS अधिकारी के तौर पर, कुमार की संपत्ति सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होनी चाहिए थी.
X पर एक विस्तृत पोस्ट में, गोखले ने अपनी RTI एप्लीकेशन और केंद्र सरकार के डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग से मिले जवाब को शेयर किया. 5 नवंबर 2025 की अपनी RTI अर्जी में, गोखले ने IAS अधिकारी ज्ञानेश कुमार द्वारा 2015 और 2023 के बीच दाखिल की गई अचल संपत्ति की जानकारी का ब्योरा मांगा था.