वॉशिंगटन: ईरान पर अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू करेगा या फिर चीजें बातचीत से हल की जाएंगी, इसका फैसला रविवार (24 मई) को होगा। ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फिलहाल उलझन में हैं। वह यह फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि ईरान में कैसे आगे बढ़ा जाए। उन्होंने बातचीत और हमले, दोनों विकल्पों पर विचार किया है। वह रविवार को इस मुद्दे पर संबंधित अफसरों के साथ बैठक कर ईरान युद्ध पर निर्णय लेंगे।
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एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को बताया है कि वह अपने वार्ताकारों से मिलकर ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं।ट्रंप रविवार तक यह तय कर लेंगे कि ईरान में युद्ध फिर से शुरू करना है या नहीं। ट्रंप ने कहा कि इस बात की 50/50 संभावना है कि हम कोई अच्छा समझौता करेंगे या फिर ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे।
डोनाल्ड ट्रंप करेंगे बैठक
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से ईरान पर चर्चा करेंगे। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी इस बैठक में शामिल होंगे। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इन दो में से कोई एक बात होगी। मैं तेहरान पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करूंगा या फिर हम एक ऐसा समझौता करेंगे, जो बहुत अच्छा होगा।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को धमकाया है तो यह भी कहा है कि दोनों देश डील के करीब पहुंच रहे हैं। ट्रंप ने सीबीएस न्यूज से कहा है कि हर दिन हालात बेहतर हो रहे हैं। हम एक डील के काफी करीब हैं। हालांकि मैं सिर्फ उसी डील पर दस्तखत करूंगा, जिसमें अमेरिका को वह सब कुछ मिले, जो हम ईरान से चाहते हैं।
मुनीर का ईरान दौरा
ईरान-अमेरिका के मध्यस्थ पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने शनिवार को ईरान का दौरा किया है। पाकिस्तान ने कहा है कि समझौते पर अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है। पाकिस्तानी सेना ने बताया कि असीम मुनीर ने तेहरान में वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ उच्च-स्तरीय बैठकें की हैं।
पाकिस्तानी सेना ने मुनीर की ईरान यात्रा को सार्थक बताया और कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता प्रयासों के दायरे में ये चर्चाएं हुई हैं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य एक समझौता करना था। तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेशों के आदान-प्रदान से अंतिम सहमति की दिशा में उत्साहजनक प्रगति हुई है।
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल को अस्थायी समझौता हुआ था। इसके बाद से मध्यस्थ दोनों पक्षों में समझौते की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान दोनों देशों में मुख्य मध्यस्थ है। पाकिस्तान का सैन्य नेतृत्व और सरकार की कोशिश के बावजूद समझौते पर बात नहीं बन सकी है। ईरान और अमेरिका कई मुद्दों पर एक राय नहीं हो पा रहे हैं।





