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इतने में बन जाता एक और नेपाल! अमेरिकी खजाने से ईरान वॉर पर खर्च हुए 45 अरब डॉलर, हैरान कर देंगे आंकड़े​

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष में अमेरिकी खजाने से अब तक 45.1 अरब डॉलर से अधिक की भारीभरकम राशि खर्च की जा चुकी है, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. पेंटागन द्वारा रक्षा बजट से स्वाहा की गई यह रकम इतनी बड़ी है कि यह पड़ोसी देश नेपाल […]

डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष में अमेरिकी खजाने से अब तक 45.1 अरब डॉलर से अधिक की भारीभरकम राशि खर्च की जा चुकी है, और यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है. पेंटागन द्वारा रक्षा बजट से स्वाहा की गई यह रकम इतनी बड़ी है कि यह पड़ोसी देश नेपाल की कुल सालाना अर्थव्यवस्था के बराबर पहुंच चुकी है. केवल कुछ महीनों के सैन्य अभियानों में एक पूरे देश की जीडीपी जितना पैसा फूंक दिए जाने के बाद अमेरिकी संसद से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इस विशाल ‘वॉर बिल’ को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं.

अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, मिसाइल हमलों, नौसैनिक जहाजों की तैनाती, उन्नत हथियार प्रणालियों और निरंतर परिचालन लागतों के कारण युद्ध का खर्च अनुमान से कहीं अधिक तेजी से बढ़ा है. ईरान के साथ जारी इस टकराव में पानी की तरह बहाया जा रहा पैसा न केवल अमेरिकी खजाने पर भारी वित्तीय दबाव बना रहा है, बल्कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला को भी अनिश्चितता की ओर धकेल रहा है. यदि यह सैन्य संघर्ष लंबा खींचता है, तो युद्ध की कुल लागत कई अन्य विकासशील देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्थाओं को भी पार कर सकती है.

इतने में बन जाता एक और नेपाल

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी रक्षा बजट से अब तक 45.1 अरब डॉलर से अधिक खर्च हो चुके हैं. खास बात तो है कि ये आंकड़ा भारत के पड़ोसी देश नेपाल की कुल जीडीपी के करीब बराबर है. आंकड़ों को देखें तो आईएमएफ के अनुसार साल 2026 में नेपाल की कुल अनुमानित जीडीपी 45.844 बिलियन डॉलर है. हाल ही मेंं नेपाल में आई बाढ़ की वजह से देश की इकोनॉमी को काफी नुकसान पहुंचा है. उसके बाद भी ये आंकड़ा अमेरिका की ओर से ईरान से लड़ाई पर खर्च किए आंकड़े के करीब बराबर ही है. जानकारों की मानें तो जितना पैसा अमेरिका ईरान से लढ़ाई में फूंक चुका है, उतने में नेपाल जैसा एक और देश खड़ा हो सकता है.

क्या कहती है CNN की रिपोर्ट?

CNN की रिपोर्ट में मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया है कि शुक्रवार को कांग्रेस को दिए गए पेंटागन के अनुमान के मुताबिक, ईरान के साथ संघर्ष में ट्रंप प्रशासन को अनुमानित 45.1 बिलियन डॉलर का खर्च आया है. यह आंकड़ा कांग्रेसनल बजट ऑफिस के पहले के अनुमान से ज्यादा है, जिसने 1 अगस्त तक इस खर्च को लगभग 38 बिलियन डॉलर बताया था.

पेंटागन के ताजा अनुमान में 3 सितंबर तक युद्ध से जुड़े 43.6 बिलियन डॉलर के खर्च के साथसाथ एक्स्ट्रा फ्यूल के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का खर्च भी शामिल है. हालांकि, 45.1 बिलियन डॉलर का आंकड़ा वॉर की पूरी कॉस्ट को इंडीकेट नहीं करता है. CNN की रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि इस अनुमान में क्षतिग्रस्त अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इमारतों की मरम्मत का खर्च शामिल नहीं है, और न ही इसमें कांग्रेस को अप्रत्यक्ष सैन्यअभियान कॉस्ट का विस्तृत आकलन दिया गया है. यह ताजा आंकड़ा जुलाई में पेंटागन के 37.5 बिलियन डॉलर के पिछले अनुमान से भी ज्यादा है.

हर महीने में 2 से 3 अरब डॉलर का खर्च

CBO ने 15 सितंबर की अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि 1 अगस्त तक रक्षा विभाग को लगभग 38 अरब डॉलर का खर्च उठाना पड़ा था. इस अनुमान में ऑपरेशनल, लॉजिस्टिक्स और रखरखाव से जुड़े खर्च जैसे कि लड़ाई में इस्तेमाल हो चुके गोलाबारूद और खोए हुए कंपोनेंट्स को बदलना, उड़ान के घंटों में बढ़ोतरी, अन्य सैन्य ऑपरेशन और फ्यूल की ज्यादा कॉस्ट आदि शामिल थे.

बजट कार्यालय ने कहा कि जब तक लड़ाई जारी रहेगी, वॉर की कॉस्ट भी बढ़ती रहेगी. अगर हिंसा का स्तर मई और जून जैसा ही रहता है, तो लड़ाई के एक और महीने का खर्च लगभग 2 अरब डॉलर होगा, जबकि अगर लड़ाई जुलाई जैसी तेजी पर पहुंच जाती है, तो यह खर्च बढ़कर लगभग 3 अरब डॉलर प्रति माह हो सकता है. CBO ने चेतावनी दी कि अगर संघर्ष और बढ़ता है, तो मासिक खर्च और भी ज्यादा हो सकता है.

महंगाई में हो सकता है इजाफा

CBO के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट से तेल और नेचुरल गैस की शिपमेंट और लाल सागर से शिपिंग में रुकावट के कारण वैश्विक ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. एजेंसी का अनुमान है कि ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों के कारण 2027 की पहली तिमाही में PCE महंगाई दर में 0.5 फीसदी अंक की बढ़ोतरी हो सकती है, जो फरवरी 2026 के अनुमान की तुलना में अधिक है. कोर PCE महंगाई दर के 0.3 प्रतिशत अंक अधिक रहने का अनुमान लगाया गया था.

CBO ने यह भी बताया कि उसके 38 अरब डॉलर के अनुमान में फेडरल सरकार के अन्य हिस्सों द्वारा उठाई गई लागत या मौजूदा रक्षा बजट से पहले ही कवर किए गए खर्च शामिल नहीं थे. वह राजनयिक अभियानों और विदेशी सहायता से जुड़ी संभावित अतिरिक्त लागतों का अनुमान लगाने में भी असमर्थ थी, क्योंकि ये इस बात पर निर्भर करेगा कि संघर्ष कैसे आगे बढ़ता है. इसलिए, पेंटागन का 45.1 अरब डॉलर का नवीनतम अनुमान युद्ध की अधिक रिपोर्ट की गई लागत को दर्शाता है, जबकि खर्च की कई श्रेणियां इस आंकड़े में शामिल नहीं हैं.

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संपादकीय टीम

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