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इजराइल में 2019 से अब तक छठा चुनाव क्यों, इस बार पूरा कार्यकाल क्यों है बड़ी बात?​

इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव तय हैं. परिणाम 7 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. साल 2019 के बाद यह देश का छठा राष्ट्रीय चुनाव है. इसकी खास बात यह है कि इस बार नेसेट यानी संसद अपना तय कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनाव में जा रही है. हाल के दशकों में […]

इजराइल में 27 अक्टूबर 2026 को आम चुनाव तय हैं. परिणाम 7 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. साल 2019 के बाद यह देश का छठा राष्ट्रीय चुनाव है. इसकी खास बात यह है कि इस बार नेसेट यानी संसद अपना तय कार्यकाल पूरा करने के बाद चुनाव में जा रही है. हाल के दशकों में ऐसा कम हुआ है. इसलिए इस चुनाव को केवल सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता की परीक्षा भी माना जा रहा है. इजराइली संसद का कार्यकाल चार साल तय है.

आइए, इसी बहाने समझते हैं कि इजराइल में 2019 से अब तक छठा चुनाव क्यों? इस बार संसद का पूरा कार्यकाल क्यों है इतनी बड़ी बात? कैसी है इजराइल की चुनावी व्यवस्था?

इजराइल में चुनावी व्यवस्था कैसे काम करती है?

भारत की तरह इजराइल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री को नहीं चुनते. वे राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं. इजराइली संसद को नेसेट कहा जाता है. इसमें कुल 120 सीटें हैं. पार्टियों को मिले वोटों के अनुपात में उन्हें सीटें दी जाती हैं. सरकार बनाने के लिए नेसेट में कम से कम 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है.

चुनावी सिस्टम

कोई एक पार्टी इतनी सीटें हासिल न कर पाए, तो उसे दूसरी पार्टियों के साथ गठबंधन करना पड़ता है. गठबंधन में शामिल दलों के बीच नीतियों, मंत्रालयों और सत्ता में हिस्सेदारी को लेकर सहमति बनाना जरूरी होता है. इस व्यवस्था में छोटी पार्टियों को भी संसद में जगह मिल सकती है. लेकिन यही बात सरकार बनाना कठिन भी करती है. बड़ी पार्टी को सबसे ज्यादा सीटें मिलना सरकार बनाने की गारंटी नहीं है. उसे बहुमत तक पहुंचने के लिए सहयोगी दलों का समर्थन जुटाना पड़ता है.

बारबार चुनाव की नौबत क्यों आई?

2019 से 2022 के बीच इजराइल में पांच आम चुनाव हुए. साल 2019 में हुए चुनावों के बाद किसी भी राजनीतिक खेमे को बहुमत नहीं मिला. पार्टियां सरकार बनाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन गठबंधन का गणित बारबार अटकता रहा. नतीजा यह हुआ कि मतदाताओं को कुछ ही समय में फिर मतदान के लिए बुलाना पड़ा. इन चुनावों में एक अहम राजनीतिक सवाल वर्तमान पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व को लेकर भी था. उनके समर्थक और विरोधी खेमे अलगअलग गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन दोनों पक्षों के पास हर बार साफ और टिकाऊ बहुमत नहीं था. कुछ पार्टियां नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं थीं. उनके विरोधियों के बीच भी विचारधारा और नीतियों को लेकर मतभेद थे.

कौन कर सकता है वोट

आठ दलों की सरकार एक साल में ही टूट गई

साल 2021 में आठ अलगअलग दलों ने मिलकर सरकार बनाई. इसमें दक्षिणपंथी, मध्यमार्गी, वामपंथी और अरब नेतृत्व वाली पार्टी शामिल थी. उनका साझा उद्देश्य नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करना था. लेकिन ऐसी विविध पार्टियों को एक साथ रखना आसान नहीं था. सरकार करीब एक साल बाद टूट गई. इसके बाद फिर चुनाव हुए. 2022 में नेतन्याहू सत्ता में लौटे और उनकी अगुवाई में गठबंधन सरकार बनी.

इस तरह चुनावों की बारबार वापसी का मुख्य कारण केवल मतदाताओं की बदलती पसंद नहीं था. अहम वजह यह थी कि चुनाव के बाद बहुमत बनाना और गठबंधन को टिकाए रखना कठिन था. जब सरकार का आधार कमजोर हो, तो बजट, कानून या प्रमुख नीतियों पर असहमति संकट खड़ा कर सकती है.

गठबंधन सरकार इतनी नाजुक क्यों होती है?

इजराइल में कई पार्टियों को संसद में प्रतिनिधित्व मिलता है. इसलिए सरकार अक्सर कई दलों के समर्थन पर निर्भर रहती है. हर दल अपने मतदाताओं की प्राथमिकताओं को सरकार की नीतियों में शामिल करना चाहता है. धार्मिक नियम, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, न्यायपालिका और फिलिस्तीनियों से जुड़ी नीति जैसे मुद्दों पर पार्टियों के विचार अलग हो सकते हैं. बहुमत बहुत कम सीटों से बना हो, तो किसी एक सहयोगी दल का समर्थन वापस लेना सरकार को संकट में डाल सकता है. गठबंधन का कोई छोटा दल भी अपनी मांगों को मनवाने के लिए दबाव बना सकता है.

यदि समझौता न हो, तो सरकार गिर सकती है या संसद भंग हो सकती है. ऐसी स्थिति में समय से पहले चुनाव कराना एक रास्ता बन जाता है. वर्तमान संसद में कुल 13 पार्टियों का प्रतिनिधित्व है. नेतन्याहू की पार्टी के पास 32 सांसद है. जबकि बहुमत के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए. इसलिए संसद का कार्यकाल पूरा करना बेहद महत्वपूर्ण है.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू

इस बार पूरा कार्यकाल पूरा करना क्यों अहम है?

संसद का पूरा कार्यकाल पूरा करने का अर्थ है कि नेसेट अपने तय समय तक काम करे और चुनाव तय समय पर हो. इस बार संसद ने अपना कार्यकाल पूरा किया है. यह बात इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2019 के बाद इजराइल में कई बार समय से पहले चुनाव हुए. लगातार चुनावों के कारण सरकारों की योजना और नीतिनिर्माण पर असर पड़ सकता है. पूरा कार्यकाल पूरा होना यह दिखाता है कि संसद और सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यवस्था को चलाए रखा.

इसका मतलब यह नहीं कि देश में सभी पार्टियों के बीच सहमति थी या सरकार ने हर समस्या हल कर दी. इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि इस बार संसद बीच में भंग नहीं हुई और चुनाव नियमित समय पर हो रहा है. यह फर्क भी समझना जरूरी है कि संसद का कार्यकाल पूरा होना और किसी एक प्रधानमंत्री का पूरा कार्यकाल पूरा करना अलगअलग बातें हैं. सरकार के प्रमुख बदल सकते हैं, गठबंधन में बदलाव हो सकता है और कार्यवाहक सरकार भी काम कर सकती है. इस बार नेतन्याहू के नेतृत्व में दोनों रिकार्ड बने. पीएम भी वही रहे और संसद ने अपना कार्यकाल भी पूरा किया.

इस चुनाव में मतदाता किन सवालों पर विचार कर सकते हैं?

वर्तमान चुनाव से पहले इजराइल की राजनीति में सुरक्षा, गाजा युद्ध, क्षेत्रीय तनाव, महंगाई और न्यायपालिका की भूमिका जैसे मुद्दे चर्चा में हैं. मतदाता यह भी देखेंगे कि मौजूदा नेतृत्व ने सुरक्षा और शासन से जुड़े सवालों का सामना कैसे किया. नेतन्याहू के समर्थक और विरोधी इन मुद्दों पर अलगअलग तर्क रखते हैं. चुनाव के नतीजे आने के बाद असली चुनौती फिर गठबंधन बनाने की होगी. किसी दल को सबसे ज्यादा सीटें मिलना अपने आप में पर्याप्त नहीं होगा. उसे 61 सदस्यों का समर्थन जुटाना पड़ेगा. यदि कोई खेमे यह आंकड़ा हासिल नहीं कर पाता, तो सरकार बनाने की बातचीत मुश्किल हो सकती है.

इस बार किसकी सरकार?

इस बार किस दल या गठबंधन की सरकार बनेगी, इस पर दुनिया की नजरें है. यूँ, इस चुनाव में दो बातें खास होंगी. पहली, मतदाता किस पार्टी या राजनीतिक खेमे को समर्थन देते हैं. दूसरी, नतीजों के बाद कौनसा गठबंधन 61 सीटों का समर्थन जुटा पाता है. इजराइल की व्यवस्था में चुनाव का दिन पूरी प्रक्रिया का अंत नहीं होता. कई बार उसके बाद होने वाली बातचीत तय करती है कि सरकार कौन बनाएगा. इसलिए 2019 से बारबार हुए चुनावों की कहानी केवल राजनीतिक उठापटक नहीं बताती. यह उस व्यवस्था की चुनौती भी दिखाती है जिसमें कई दलों को प्रतिनिधित्व मिलता है, लेकिन स्थिर बहुमत बनाना कठिन हो सकता है. इस बार संसद का पूरा कार्यकाल पूरा होना एक महत्वपूर्ण संकेत है. फिर भी स्थिरता का असली पैमाना यही होगा कि चुनाव के बाद बनने वाली सरकार कितने समय तक काम कर पाती है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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