भारतीय रिजर्व बैंक ने 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बदलाव का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद जानकारी दी कि रेपो रेट को 5.25 फीसदी से बढ़ाकर 5.50 फीसदी कर दिया गया है। रेपो रेट में इस 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का असर बैंक एफडी , लोन और ईएमआई जैसी वित्तीय सेवाओं पर देखने को मिल रहा है।

रेपो रेट बढ़ने का बैंक एफडी पर असर
जानकारों के अनुसार, जब आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक भी आमतौर पर अपनी एफडी पर मिलने वाली ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं, जिससे ग्राहकों को फायदा होता है। हालांकि, यह बढ़ा हुआ फायदा केवल उन नए ग्राहकों को मिलेगा जो अब नई एफडी कराएंगे। जिन लोगों ने पहले से एफडी करवा रखी है, उन्हें उनकी पुरानी तय ब्याज दर के हिसाब से ही रिटर्न मिलेगा।
20 लाख रुपये की एफडी पर 5 साल के रिटर्न की गणना
रेपो रेट में हुई इस बढ़ोतरी के प्रभाव को 20 लाख रुपये की एफडी पर 5 साल की अवधि के उदाहरण से समझा जा सकता है:
पुरानी स्थिति :
- एफडी की राशि: 20 लाख रुपये
- अनुमानित ब्याज दर: 7% सालाना
- समय: 5 साल
- कुल ब्याज: 8,29,556 रुपये
- कुल मैच्योरिटी रिटर्न: 28,29,556 रुपये
नई स्थिति :
यदि बैंक रेपो रेट में हुई 0.25 फीसदी की पूरी बढ़ोतरी का लाभ एफडी पर पास करते हैं, तो ब्याज दर 7% से बढ़कर 7.25% हो जाएगी।
- एफडी की राशि: 20 लाख रुपये
- नई ब्याज दर: 7.25% सालाना
- समय: 5 साल
- कुल ब्याज: 8,64,521 रुपये
- कुल मैच्योरिटी रिटर्न: 28,64,521 रुपये
ग्राहकों को कितना अधिक फायदा होगा?
दोनों स्थितियों की तुलना करने पर यह स्पष्ट होता है कि 5.50 फीसदी के नए रेपो रेट के आधार पर 7.25 फीसदी ब्याज दर मिलने पर ग्राहकों को 5 साल की अवधि में पहले की तुलना में 34,965 रुपये का अतिरिक्त ब्याज मिलेगा।