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अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद क्या बोला भारत? दे दिया ये बड़ा बयान

अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद क्या बोला भारत? दे दिया ये बड़ा बयान

अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद सरकार की ओर से बयान आ गया है. सरकार ने जानकारी देते हुए कहा कि भारत बंधुआ मजदूरी और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता से संबंधित चिंताओं को लेकर धारा-301 की जांच के सिलसिले में अमेरिका के साथ संपर्क में है. भारत अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है.

अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद क्या बोला भारत? दे दिया ये बड़ा बयान
अमेरिकी टैरिफ धमकी के बाद क्या बोला भारत? दे दिया ये बड़ा बयान

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय ने 11-12 मार्च 2026 को बंधुआ मजदूरी और अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता से जुड़े मुद्दों पर 60 देशों के खिलाफ धारा-301 के तहत जांच शुरू की थी. यूएसटीआर ने दो जून को बंधुआ मजदूरी से जुड़ी जांच के निष्कर्ष जारी करते हुए 60 देशों से आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा है.

इस प्रस्ताव में कनाडा, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, मैक्सिको और पाकिस्तान से आयात पर 10 प्रतिशत शुल्क जबकि भारत तथा चीन सहित 54 अन्य अर्थव्यवस्थाओं पर 12.5 प्रतिशत शुल्क शामिल है. पाकिस्तान और इंडोनेशिया व्यापार के क्षेत्र में भारत के प्रतिस्पर्धी हैं. यह उपाय अभी प्रस्ताव के चरण में है और इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है.

कॉमर्स मिनिस्ट्री का आया बयान

कॉमर्स मिनिस्ट्री ने कहा कि भारत धारा-301 कार्यवाही के मामले में अमेरिका के साथ संपर्क में है. साथ ही भारत दो फरवरी 2026 को घोषित समझौते के ढांचे और सात फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप अमेरिका के साथ समझौते को अंतिम रूप देने के लिए भी बातचीत कर रहा है.

इसमें कहा गया कि धारा-232 (क्षेत्रीय) शुल्क के तहत आने वाले उत्पादों और कुछ अन्य वस्तुओं को इन प्रस्तावित शुल्कों से बाहर रखा गया है. कपड़ा एवं परिधान उत्पादों के लिए एक विशेष प्रणाली प्रस्तावित की गई है, जिसके तहत चयनित देशों से एक निश्चित मात्रा में आयात को अमेरिका में कम शुल्क दरों पर प्रवेश की अनुमति मिल सकती है.

वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क अभी अंतिम नहीं हैं और हितधारक 22 जून 2026 तक सार्वजनिक सुनवाई में भाग लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं. लिखित टिप्पणियां छह जुलाई 2026 तक प्रस्तुत की जा सकती हैं. सार्वजनिक सुनवाई सात जुलाई 2026 को होगी. यूएसटीआर प्रस्तावित उपायों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले प्राप्त टिप्पणियों और दलीलों पर विचार करेगा.

यूएसटीआर का प्रस्ताव

USTR ने उन देशों पर 12.5 फीसदी ​​की अतिरिक्त ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव दिया है, जिनके बारे में उसका आकलन है कि उन्होंने जबरदस्ती के श्रम से जुड़े इंपोर्ट को रोकने के लिए उपाय नहीं किए हैं या उन्हें प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया है. जिन इकोनॉमीज ने ऐसे प्रतिबंधों को अपनाया है और लागू किया है, या आपसी व्यापार समझौतों के तहत ऐसा करने का वादा किया है, उन्हें 10 फीसदी की कम प्रस्तावित टैरिफ दर का सामना करना पड़ेगा. यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और अमेरिका के वरिष्ठ वार्ताकार नई दिल्ली में एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए चर्चा कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने संकेत दिया है कि इन वार्ताओं में सेक्शन 301 की कार्रवाई से राहत पाना और प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के बराबर या उनसे बेहतर टैरिफ रियायतें हासिल करना मुख्य प्राथमिकताएं बनी हुई हैं.

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सरकार ने जताई थी आपत्ति

पहले की रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने जबरन मजदूरी की जांच के आधार पर लगाए गए आरोपों पर आपत्ति जताई थी और वॉशिंगटन से आग्रह किया था कि इस मामले को एकतरफा ट्रेड उपायों के बजाय, चल रही व्यापार वार्ताओं के दायरे में ही सुलझाया जाए. US Trade Act की धारा 301 USTR को विदेशी सरकारों की उन पॉलीसीज और तौर-तरीकों की जांच करने का अधिकार देती है, जिन्हें वह अनुचित या भेदभावपूर्ण मानती है और जिनसे US के व्यापार पर बोझ पड़ता है. ऐसी जांचों के बाद, वॉशिंगटन एक उपाय के तौर पर टैरिफ या अन्य व्यापार प्रतिबंध लगा सकता है. ये प्रस्तावित उपाय, किसी खास देश के लिए व्यापार संबंधी कार्रवाई और टैरिफ व्यवस्था को फिर से शुरू करने के US के व्यापक प्रयासों का हिस्सा हैं. हालांकि, कोई भी अंतिम फैसला लेने से पहले इन प्रस्तावों पर परामर्श और आगे की समीक्षा की जाएगी.

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