अगर आपका अकाउंट SBI, HDFC Bank या किसी दूसरे बैंक की ऐसी ब्रांच में है, जो बंद होने वाली है या दूसरी जगह शिफ्ट हो रही है, तो आपके मन में कई सवाल उठ सकते हैं. क्या आपका अकाउंट भी बंद हो जाएगा? जमा पैसे का क्या होगा? क्या नया अकाउंट खोलना पड़ेगा? क्या IFSC कोड, चेकबुक और पासबुक बदल जाएगी? सिर्फ ब्रांच बंद होने या शिफ्ट होने का मतलब अकाउंट बंद होना नहीं है. बैंक आमतौर पर ग्राहकों के अकाउंट को दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर करता है. ऐसे में जानिए आपके अकाउंट, पेमेंट, IFSC, चेकबुक और लॉकर पर इसका क्या असर पड़ेगा.

ब्रांच बंद होने पर आपके अकाउंट का क्या होगा?
ब्रांच बंद होने का सीधा असर आपके बैंक अकाउंट या जमा पैसे पर नहीं पड़ता. बैंक आपके अकाउंट को दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर कर सकता है और आपको इसकी जानकारी देनी होती है.
अगर अकाउंट उसी बैंक की दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर किया जा रहा है, तो आम तौर पर नया अकाउंट खोलने की जरूरत नहीं होती. यानी आपका मौजूदा अकाउंट ही आगे चलता रहेगा.
RBI के नियमों के मुताबिक, बैंक के अंदर एक ब्रांच से दूसरी ब्रांच में अकाउंट ट्रांसफर होने पर पहले से पूरा किया गया KYC भी मान्य रहता है, बशर्ते जरूरी KYC शर्तें पूरी हों. इसलिए सिर्फ ब्रांच बदलने की वजह से ग्राहक को दोबारा पूरी KYC प्रक्रिया करने की जरूरत नहीं होनी चाहिए.
क्या IFSC और चेकबुक बदल जाएगी?
यह सबसे जरूरी सवाल है. ब्रांच बदलने के बाद ग्राहक को नई ब्रांच की बैंकिंग डिटेल जरूर चेक करनी चाहिए. इनमें नई ब्रांच का पता, IFSC कोड, चेकबुक और पासबुक से जुड़ी जानकारी शामिल हो सकती है.
अगर नई ब्रांच का IFSC बदलता है, तो जहांजहां पुराने IFSC का इस्तेमाल हो रहा है, वहां नई डिटेल अपडेट करनी पड़ सकती है. इसलिए बैंक से नई IFSC डिटेल की पुष्टि जरूर कर लें.
चेकबुक को लेकर भी बैंक से पूछ लें कि मौजूदा चेकबुक आगे इस्तेमाल की जा सकती है या नई चेकबुक लेनी होगी. यह व्यवस्था बैंक और ब्रांच ट्रांसफर की स्थिति पर निर्भर कर सकती है.
सैलरी, EMI और SIP का क्या होगा?
अगर आपके अकाउंट में हर महीने सैलरी या पेंशन आती है, तो ब्रांच ट्रांसफर के बाद इन पेमेंट की जांच कर लेना जरूरी है. इसके अलावा EMI, SIP, इंश्योरेंस प्रीमियम, बिल पेमेंट और दूसरे ऑटो डेबिट या स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन भी चेक करें. मकसद यह सुनिश्चित करना है कि ब्रांच बदलने की वजह से कोई पेमेंट फेल न हो. अगर बैंक ने नई अकाउंट डिटेल या IFSC जारी किया है, तो जहां जरूरत हो वहां इसे अपडेट करा लें.
क्या ब्रांच बंद होना और बैंक मर्जर एक ही है?
नहीं, दोनों अलगअलग चीजें हैं. अगर किसी बैंक की सिर्फ एक ब्रांच बंद या दूसरी जगह शिफ्ट हो रही है, तो आमतौर पर अकाउंट को उसी बैंक की दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर किया जाता है.
वहीं, बैंक मर्जर में एक बैंक का दूसरे बैंक में विलय होता है. ऐसी स्थिति में अकाउंट, ब्रांच, इंटरनेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड, चेकबुक और दूसरी बैंकिंग सेवाओं से जुड़े बदलाव हो सकते हैं. इन बदलावों की जानकारी बैंक ग्राहकों को देता है. इसलिए सिर्फ ब्रांच बंद होने की सूचना को बैंक मर्जर नहीं समझना चाहिए.
बैंक लॉकर है तो क्या होगा?
अगर आपके पास बैंक लॉकर है, तो ब्रांच बंद या शिफ्ट होने पर आपको अलग से जानकारी लेनी चाहिए. लॉकर की सुविधा भी नई ब्रांच में ट्रांसफर की जा सकती है या उसके लिए दूसरी व्यवस्था की जा सकती है.
RBI के लॉकर नियमों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में बैंक को ग्राहकों को पहले से जानकारी देनी होती है. बैंक को कुछ मामलों में दो अखबारों में सार्वजनिक सूचना भी जारी करनी होती है, जिनमें से एक स्थानीय भाषा का अखबार होना चाहिए.
लॉकर वाले ग्राहक बैंक से यह पता करें कि उनका लॉकर आगे कहां उपलब्ध होगा, नई जगह उसका इस्तेमाल कैसे किया जाएगा और क्या किसी नए डॉक्यूमेंट या एग्रीमेंट की जरूरत होगी.
ब्रांच बंद होने की खबर मिले तो ये काम जरूर करें
ब्रांच बंद या शिफ्ट होने की जानकारी मिलते ही अपने बैंक रिकॉर्ड की कुछ जरूरी चीजें चेक कर लें.
- रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और ईमेल सही है या नहीं.
- बैंक के रिकॉर्ड में आपका पता अपडेट है या नहीं.
- नई ब्रांच का पता और IFSC क्या है.
- पुरानी चेकबुक आगे चलेगी या नई लेनी होगी.
- सैलरी, पेंशन, EMI, SIP और दूसरे ऑटो पेमेंट सही चल रहे हैं या नहीं.
- अगर लॉकर है तो उसकी नई लोकेशन और प्रक्रिया क्या है.
- ब्रांच बंद होने के नाम पर फ्रॉड से बचें
ब्रांच बंद होने या बैंक मर्जर की खबर का फायदा उठाकर साइबर ठग फर्जी मैसेज भी भेज सकते हैं. ऐसे मैसेज में KYC अपडेट करने, अकाउंट वेरिफाई करने या किसी लिंक पर क्लिक करने के लिए कहा जा सकता है.
कुल मिलाकर, बैंक ब्रांच का बंद होना या दूसरी जगह शिफ्ट होना आपके अकाउंट या जमा पैसे के खत्म होने का मतलब नहीं है. आमतौर पर आपका अकाउंट उसी बैंक की दूसरी ब्रांच में ट्रांसफर किया जाता है. ग्राहक को बस नई ब्रांच की डिटेल, IFSC, चेकबुक, ऑटो पेमेंट और लॉकर से जुड़ी जानकारी समय पर चेक करनी चाहिए.