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कर्नाटक के गांव का खामेनेई से क्या है 40 साल पुराना रिश्ता? एक घटना ने बदल दी थी पूरी तस्वीर​

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले का गांव है अलीपुरा. यहां के करीब 100 लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने तेहरान पहुंचे. अलीपुर गांव से खामेनेई का सम्बंध दशकों पुरानी यात्रा से जुड़ा है. अलीपुर मुस्लिम बहुल गांव है. यहां की आबादी ईरानी नेता के साथ भारत के सम्बंधों का […]

कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले का गांव है अलीपुरा. यहां के करीब 100 लोग ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को अंतिम विदाई देने तेहरान पहुंचे. अलीपुर गांव से खामेनेई का सम्बंध दशकों पुरानी यात्रा से जुड़ा है. अलीपुर मुस्लिम बहुल गांव है. यहां की आबादी ईरानी नेता के साथ भारत के सम्बंधों का एक प्रतीक बन गई है.

28 फरवरी को अमेरिकाइजराइल के हमले में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी गई थी. लाखों की संख्या में ईरान में बाहर से लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे. 9 जुलाई को खामेनेई को ईरान के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा की दरगाह के पास दफनाया जाएगा. तेहरान में उनके अंतिम संस्कार में लाखों लोगों के बीच अलीपुरा गांव के 100 लोग भी थे, जो खामेनेई से व्यक्तिगत रूप से जुड़े होने के कारण ईरान पहुंचे थे.

खामेनेई और कर्नाटक के गांव का कनेक्शन

मुस्लिम बहुल गांव अलीपुर और खामेनेई के बीच भावनात्मक संबंध 198182 से जुड़ा है, जब वो इस गांव में पहुंचे थे. उस दौर में गांव की लगभग पूरी आबादी शिया समुदाय से ताल्लुक रखती थी. सम्बंधों को और मजबूती तब मिली जब खामेनेई ने यहां के ‘इमाम खुमैनी अस्पताल’ का उद्घाटन किया. इस अस्पताल का निर्माण ईरानी सरकार की सहायता से किया गया था.इसलिए, गांव में लगभग हर किसी के लिए, वो केवल एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं बल्कि एक धार्मिक गुरु भी थे, जिन्होंने गांव की गलियों में ऐतिहासिक यात्रा की थी.

अयातुल्ला अली खामेनेई

किस घटना के बाद बना था अस्पताल?

जब खामेनेई यहां आए और अलीपुर का दौरा किया तो एक घटना घटी. एक महिला का निधन हो गया था, और लोगों ने उनसे प्रार्थना करने का अनुरोध किया. उन्होंने जब मौत की वजह पूछी तो बताया गया कि वह गर्भवती थी और इलाके में कोई अस्पताल नहीं था. बेंगलुरू ले जाने की कोशिश की जा रही थी लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. यह सुनकर उन्हें गुस्सा आया और अस्पताल का निर्माण करने और खर्च उठाने का ऐलान किया. बाद में वहां अस्पताल बनाया गया. इसे IK हॉस्पिटल के नाम से जाना जाता है. खामेनेई के वादे और उसे पूरा करने की बात ने यहां के लोगों को प्रभावित किया. उनके विचारों और सोच का असर यहां के लोगों पर हुआ. नतीजा, वो आत्मिक रूप से पूर्व सुप्रीम लीडर से जुड़े.

अलीपुरा का आईके हॉस्पिटल.

द हिन्दी की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें से कुछ कन्नड़ भाषी लोग पहले से ही ईरान में धार्मिक संस्थानों के छात्र, मेडिकल स्टूडेंट्स और मेडिकल प्रोफेशनल के तौर पर रह रहे हैं या वहां कारोबार कर रहे हैं, जबकि बाकी लोग रविवार को बेंगलुरु से मुंबई होते हुए ईरान एयर की चार्टर्ड फ़्लाइट से ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे थे.

अस्पताल का वीडियो

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शहादत ने रूह का झकझोरा

अलीपुरा के रहने वाले फैज़ान रज़ा कहते हैं, “उन्हें यहां बहुत सम्मान दिया जाता था. उनकी शहादत ने हमारे दिलों और रूह को झकझोर कर रख दिया है. यही वजह है कि उनके अंतिम विदाई समारोह में शामिल होना ज़रूरी था. इसलिए, मैं अलीपुरा से आया हूं।

हकीम रज़ा ने कहते हैं, 40 दिन का शोक और एक हफ़्ते की सार्वजनिक छुट्टी इस बात को दिखाती है कि यह त्रासदी सिर्फ़ एक परिवार का निजी नुकसान नहीं थी, बल्कि एक सामूहिक राष्ट्रीय घाव था जिसने व्यक्तिगत दुख को राष्ट्रीय संकल्प के साथ जोड़ दिया.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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