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बैंक में FD है? तो ऑटो-रिन्यूअल का ये गणित समझ लें, वरना फायदे की जगह हो सकता है नुकसान​

फिक्स्ड डिपॉजिट भारतीयों के बीच निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका माना जाता है. ग्राहकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए बैंक ‘ऑटोरिन्यूअल’ की सुविधा देते हैं. इसमें मैच्योरिटी के बाद आपका पैसा अपनेआप एक नई FD में जमा हो जाता है. यह सुविधा देखने में जितनी आसान और फायदेमंद लगती है, असल […]

फिक्स्ड डिपॉजिट भारतीयों के बीच निवेश का सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद तरीका माना जाता है. ग्राहकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए बैंक ‘ऑटोरिन्यूअल’ की सुविधा देते हैं. इसमें मैच्योरिटी के बाद आपका पैसा अपनेआप एक नई FD में जमा हो जाता है. यह सुविधा देखने में जितनी आसान और फायदेमंद लगती है, असल में इसके कुछ छिपे हुए जोखिम भी हैं. अगर आप बिना सोचेसमझे इस विकल्प को चुन लेते हैं, तो आपको बेहतर रिटर्न से समझौता करना पड़ सकता है. इतना ही नहीं, अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर आपको पेनाल्टी भी देनी पड़ सकती है.

सुविधा के नाम पर कैसे हो सकता है घाटा

जब आपकी FD की अवधि पूरी होती है, तो बैंक मूलधन के साथ मिले हुए ब्याज को जोड़कर बिना आपसे पूछे एक नई FD बना देता है. यहीं से असली खेल शुरू होता है. नई FD हमेशा उसी दिन की ब्याज दरों पर बनती है जिस दिन पुरानी FD मैच्योर होती है. मान लीजिए, पहले आपको 7.5 फीसदी ब्याज मिल रहा था, लेकिन मौजूदा समय में दरें घटकर 6.5 फीसदी रह गई हैं. ऐसे में आपका पैसा कम ब्याज दर पर दोबारा लॉक हो जाएगा. इसके अलावा, एक बार पैसा लॉक हो जाने पर अगर आपको बीच में इसे तोड़ना पड़ा, तो समय से पहले निकासी के चार्ज चुकाने पड़ेंगे. सबसे बड़ा नुकसान यह है कि आप बाजार में मौजूद दूसरे बैंकों के बेहतर ब्याज ऑफर से भी चूक जाते हैं.

लोग क्यों चुनते हैं सेट एंड फॉरगेट का रास्ता

इन तमाम जोखिमों के बावजूद यह सुविधा काफी लोकप्रिय है. इसे ‘सेट एंड फॉरगेट’ यानी एक बार निवेश करें फिर भूल जाएं वाली रणनीति कहा जाता है. इसकी सबसे बड़ी वजह है भागदौड़ से मुक्ति. निवेशकों को बारबार बैंक जाने या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए रिन्यू करने के झंझट से छुटकारा मिल जाता है. इसका एक बड़ा फायदा यह भी है कि आपका पैसा एक भी दिन के लिए खाली नहीं रहता. अगर पैसा सेविंग अकाउंट में पड़ा रहे, तो उस पर बहुत मामूली ब्याज मिलता है. जबकि ऑटोरिन्यूअल में कंपाउंडिंग का सीधा फायदा मिलता है. आपका पिछला ब्याज भी अब मूलधन का हिस्सा बनकर कमाई करने लगता है. इससे आर्थिक अनुशासन बना रहता है और जमा पूंजी फिजूल खर्च होने से बच जाती है.

आपके लिए क्या है सबसे सही फैसला

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक निवेशक को क्या करना चाहिए? वित्तीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इसका जवाब पूरी तरह से आपकी आर्थिक जरूरतों पर निर्भर करता है. अगर आपको निकट भविष्य में पैसों की कोई जरूरत नहीं है, तो यह सुविधा आपके लिए बेहतरीन है.

लेकिन, अगर बाजार में ब्याज दरें बढ़ रही हैं, तो थोड़ा सतर्क होना जरूरी है. ऐसी स्थिति में मैनुअल रिन्यूअल ज्यादा समझदारी का कदम है. इसके अलावा, अगर आपने कोई बड़ा खर्च प्लान किया है या आप किसी दूसरे बैंक में खाता खोलकर बेहतर ब्याज पाना चाहते हैं, तो खुद से FD की अवधि और रकम तय करें.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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