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World No Tobacco Day: स्मोकिंग-तंबाकू से ओरल कैंसर, भारत में क्यों गहरा रहा है साइलेंट खतरा?

World No Tobacco Day: भारत में तंबाकू सेवन लंबे समय से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बना हुआ है. सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पान मसाला और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल लाखों लोगों को धीरे-धीरे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी की ओर धकेल रहा है. सबसे चिंता की बात यह है कि ओरल कैंसर यानी मुंह का कैंसर भारत में तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद लोग शुरुआती लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं. यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे साइलेंट एपिडेमिक यानी खामोश महामारी मान रहे हैं. हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है. ये दिन लोगों को ये समझाने का है कि तंबाकू किसी भी तरह से सेवन खतरनाक बीमारी कैंसर का शिकार बना सकता है.

Khabar Monkey

World No Tobacco Day: स्मोकिंग-तंबाकू से ओरल कैंसर, भारत में क्यों गहरा रहा है साइलेंट खतरा?
World No Tobacco Day: स्मोकिंग-तंबाकू से ओरल कैंसर, भारत में क्यों गहरा रहा है साइलेंट खतरा?

भारत में लोगों में तंबाकू से होने वाले नुकसान की जानकारी कम है इसलिए लोग इसके खतरे को समझ नहीं पाते हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और कई स्वास्थ्य रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां ओरल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं.

क्या कहती है रिसर्च

के अनुसार, साल 2022 में दुनियाभर में 1.2 लाख से ज्यादा ओरल कैंसर के मामले धुआं रहित तंबाकू और सुपारी के सेवन से जुड़े पाए गए. यह ओरल कैंसर के कुल मामलों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है. रिपोर्ट में बताया गया कि ऐसे करीब 88 प्रतिशत मामले दक्षिण-मध्य एशिया में दर्ज हुए, जबकि 96 प्रतिशत से ज्यादा मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में पाए गए. इसका सबसे बड़ा कारण तंबाकू और धूम्रपान की बढ़ती आदत है.

गांवों से लेकर शहरों तक बड़ी संख्या में लोग गुटखा, सुपारी मिश्रित तंबाकू, बीड़ी और सिगरेट का सेवन करते हैं. कई लोग इसे सामान्य आदत समझते हैं, लेकिन लंबे समय तक इसका इस्तेमाल मुंह, जीभ, गले और होंठों के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा देता है.

शुरुआती संकेत

इससे होने वाला ये कैंसर एक बड़ा खतरा है. कैंसर हीलर सेंटर के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. तरंग कृष्णा ने ओरल कैंसर के बारे में कई जरूरी बातें बताई. उनके मुताबिक कैंसर की सबसे खतरनाक बात यह है कि, यह शुरुआती चरण में इसके लक्षण बहुत सामान्य दिखाई देते हैं. मुंह में बार-बार छाले होना, सफेद या लाल धब्बे दिखना, मसूड़ों में सूजन, मुंह खोलने में परेशानी, आवाज में बदलाव या निगलने में दिक्कत जैसे संकेतों को लोग अक्सर मामूली समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है.

युवाओं में बढ़ती चिंता

भारत में युवाओं के बीच ई-सिगरेट, वेपिंग और फ्लेवर्ड तंबाकू उत्पादों का बढ़ता चलन भी चिंता बढ़ा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में तंबाकू की लत भविष्य में कैंसर का खतरा और बढ़ा सकती है. इसके अलावा शराब और तंबाकू का एक साथ सेवन जोखिम को और अधिक खतरनाक बना देता है.

जागरूकता ही बचाव

इस साइलेंट एपिडेमिक को रोकने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है. लोगों को तंबाकू से होने वाले नुकसान के बारे में लगातार जानकारी देना जरूरी है. स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाने, सार्वजनिक स्थानों पर तंबाकू नियंत्रण कानूनों को सख्ती से लागू करने और नियमित ओरल चेकअप को बढ़ावा देने की जरूरत है. अगर शुरुआती अवस्था में ओरल कैंसर की पहचान हो जाए तो इसका इलाज संभव है.

इसलिए मुंह में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. तंबाकू और धूम्रपान से दूरी, स्वस्थ जीवनशैली और समय-समय पर जांच ही इस खामोश महामारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.

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