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Virat Kohli Vrindavan Visit: 500 साल पुराना ग्रंथ, वृंदावन की महिमा… विराट कोहली के हाथ में ये कौन सी किताब?

Virat Kohli Vrindavan Visit: 500 साल पुराना ग्रंथ, वृंदावन की महिमा… विराट कोहली के हाथ में ये कौन सी किताब?

Virat Kohli Vrindavan Visit: भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली एक बार फिर आध्यात्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं. IPL-2026 का खिताब जीतने के बाद विराट कोहली अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ मंगलवार को वृंदावन पहुंचे, जहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम पहुंचकर आशीर्वाद लिया. हालांकि इस दौरान सबसे ज्यादा चर्चा विराट के हाथ में दिखाई दी एक खास पुस्तक की हो रही है. सोशल मीडिया से लेकर भक्तों के बीच यह सवाल उठने लगा कि आखिर विराट अपने हाथ में कौन सा ग्रंथ लेकर पहुंचे थे?

Virat Kohli Vrindavan Visit: 500 साल पुराना ग्रंथ, वृंदावन की महिमा… विराट कोहली के हाथ में ये कौन सी किताब?
Virat Kohli Vrindavan Visit: 500 साल पुराना ग्रंथ, वृंदावन की महिमा… विराट कोहली के हाथ में ये कौन सी किताब?

प्रेमानंद महाराज के आश्रम में पहुंचे विराट और अनुष्का

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा वृंदावन पहुंचने के बाद प्रेमानंद महाराज के दरबार गए और वहां आशीर्वाद लिया. इसके अलावा उन्होंने प्रेमानंद महाराज के गुरुदेव के आश्रम में भी दर्शन किए. विराट और अनुष्का की यह यात्रा अब केवल आध्यात्मिक कारणों से ही नहीं बल्कि उनके हाथ में दिखाई दिए ग्रंथ की वजह से भी सुर्खियां बटोर रही है.

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जब विराट आश्रम की ओर जा रहे थे, तब उनके हाथ में एक पुस्तक दिखाई दी. इसे लेकर लोगों में उत्सुकता बढ़ गई. बाद में जानकारी सामने आई कि यह पुस्तक श्री वृंदावन महिमामृतम थी. यह ग्रंथ काफी प्राचीन और धार्मिक महत्व रखने वाला माना जाता है. बताया जा रहा है कि इस ग्रंथ की रचना प्रबोधानंद सरस्वती महाराज ने की थी और इसका इतिहास लगभग 500 साल पुराना बताया जाता है.

वृंदावन की महिमा का वर्णन

इस ग्रंथ में वृंदावन की महिमा और आध्यात्मिक महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है. इसमें वृंदावन में निवास के महत्व, वृंदावन की रज (धूल) की विशेषता, यमुना नदी का महत्व, प्राचीन मंदिरों की जानकारी, भजन-कीर्तन और धार्मिक परंपराओं का उल्लेख मिलता है. इसके अलावा वृंदावन के प्राचीन सप्त देवालयों के बारे में भी इस ग्रंथ में जानकारी दी गई है. धार्मिक दृष्टि से यह पुस्तक भक्तों के बीच काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है.

रास बिहारी संस्थान ने किया है प्रकाशन

बताया जा रहा है कि इस पुस्तक का प्रकाशन रास बिहारी संस्थान द्वारा किया गया है. संस्थान से जुड़े छैल बिहारी खंडेलवाल ने बताया कि प्रेमानंद महाराज भी अपने प्रवचनों में इस ग्रंथ का उल्लेख कर चुके हैं. उन्होंने यह भी दावा किया कि यह पुस्तक उन्होंने स्वयं विराट कोहली को भेंट की थी.

विराट कोहली पहले भी कई बार आध्यात्मिक स्थलों पर दर्शन करते हुए नजर आ चुके हैं. ऐसे में वृंदावन यात्रा और उनके हाथ में दिखाई दिए इस विशेष ग्रंथ ने एक बार फिर उनके आध्यात्मिक पक्ष को चर्चा में ला दिया है.

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