: विकास दिव्यकीर्ति दिल्ली हाई कोर्ट मामले में शिक्षक और दृष्टि IAS के संस्थापक विकास दिव्यकीर्ति ने अपने व्यक्तित्व और निजता के अधिकारों की सुरक्षा के लिए याचिका दायर की है। 24 सितंबर 2026 को मामले को न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव के समक्ष सूचीबद्ध किया गया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले को उस पीठ के सामने रखा जाना चाहिए, जो पहले से व्यक्तित्व और निजता अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रही है।

फर्जी प्रोफाइल और तस्वीरों के इस्तेमाल का आरोप
दायर याचिका में कथित तौर पर तीन तरह के उल्लंघनों का जिक्र किया गया है। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर विकास दिव्यकीर्ति की तस्वीरों का इस्तेमाल कर फर्जी पोस्ट साझा की जाती हैं। साथ ही फर्जी प्रोफाइल बनाए जाने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में ऐसे कथित अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने और उनकी पहचान की सुरक्षा की मांग की गई है।
दूसरी पीठ के सामने होगी मामले की सुनवाई
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि इसी तरह के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े कई मामले पहले से दूसरी पीठ के सामने लंबित हैं। इसके बाद न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने मामले को संबंधित पीठ के सामने सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा। यानी फिलहाल इस सुनवाई में याचिका के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और आगे की कार्यवाही संबंधित पीठ के सामने होगी।
कई चर्चित हस्तियां भी पहुंच चुकी हैं कोर्ट
याचिका ऐसे समय सामने आई है, जब कई सार्वजनिक हस्तियां भी अपने नाम, तस्वीर, आवाज और पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर अदालतों का रुख कर चुकी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ऐश्वर्या राय बच्चन, अभिषेक बच्चन, सलमान खान, युवराज सिंह, सुधीर चौधरी और राज शमानी समेत कई लोगों ने व्यक्तित्व और प्रचार संबंधी अधिकारों की सुरक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपनाया है। इन मामलों में पहचान के इस्तेमाल से जुड़े अलगअलग दावे सामने आए हैं।
अलख पांडे ने भी मांगी थी ऐसी सुरक्षा
मामले से पहले फिजिक्स वाला के संस्थापक अलख पांडे भी व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा के लिए दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे थे। उन्होंने इंटरनेट प्लेटफॉर्म और यूजर्स पर अपने नाम और तस्वीर के इस्तेमाल से कमाई करने का आरोप लगाया था। रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट ने उन्हें कुछ कथित उल्लंघनों से अंतरिम संरक्षण दिया था। इन मामलों से सोशल मीडिया , AI Deepfake और Digital Security के दौर में सार्वजनिक व्यक्तियों की पहचान और निजता से जुड़े कानूनी सवाल सामने आते हैं।