: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों को राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ( में शिक्षा विभाग से जुड़े इन प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इस फैसले का उद्देश्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान आर्थिक बोझ से राहत देना है।
कैबिनेट ( के फैसले के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के 23,989, वित्तविहीन विद्यालयों के 22,541 और अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों के करीब 110 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। इस तरह कुल 48,062 कर्मचारी इस व्यवस्था के दायरे में आएंगे।
सरकार प्रत्येक कर्मचारी के बीमा प्रीमियम के लिए 3,000 रुपये देगी। इस मद में कुल 14.41 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को पांच लाख रुपये तक के इलाज की कैशलेस सुविधा मिलेगी।
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कैबिनेट ( ने बेसिक शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का प्रस्ताव मंजूर किया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस व्यवस्था से 1,22,305 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा। इनमें चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, लिपिक, वित्तविहीन संस्थानों के कर्मचारी और जिला परियोजना से जुड़े कर्मी शामिल हैं। इस फैसले से पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों को इलाज के खर्च की चिंता से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, सुविधा किन अस्पतालों में और किन शर्तों के तहत मिलेगी, इसकी विस्तृत जानकारी संबंधित शासनादेश और दिशानिर्देश जारी होने के बाद स्पष्ट होगी।
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48,062 शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को मिलेगा लाभ
बेसिक शिक्षा के 1.22 लाख से अधिक कर्मचारियों को भी राहत
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UP Cashless Medical Treatment: यूपी के 48 हजार से ज्यादा शिक्षाकर्मियों को कैशलेस इलाज, योगी कैबिनेट का बड़ा फैसला
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