बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
दुनिया में बजा जियो का डंका! मेटा, अलीबाबा और स्पेसएक्स के बाद किया ऐसा कारनामा​ | MLC चुनाव: वाराणसी में भाजपा कार्यकर्ताओं और पुलिस में भिड़ंत, सपा ने लगाया बेईमानी का आरोप​ | टोनही बताकर कराई झाड़-फूंक, परिवार में मौतों का ठीकरा महिला पर फोड़ा; कोर्ट के आदेश पर FIR​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

UP Boat Registration Insurance: योगी सरकार का बड़ा फैसला, नाविकों के साथ-साथ या​त्रियों को भी मिलेगी बीमा कवर की सुविधा, बनेगी इनलैंड वाटर अथॉरिटी​

:  उत्तर प्रदेश नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश में चलने वाली यांत्रिक और पारंपरिक नावों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही नाविकों और नावों में सफर करने वाले यात्रियों को बीमा कवर देने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी के माध्यम से पंजीकरण और निगरानी […]

:  उत्तर प्रदेश नई व्यवस्था लागू करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश में चलने वाली यांत्रिक और पारंपरिक नावों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। साथ ही नाविकों और नावों में सफर करने वाले यात्रियों को बीमा कवर देने की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी के माध्यम से पंजीकरण और निगरानी की व्यवस्था विकसित की जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक को यांत्रिक और गैरयांत्रिक, यानी पारंपरिक श्रेणियों में बांटा जाएगा। इंजन से चलने वाली बड़ी नावों और जहाजों को यांत्रिक श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं, पारंपरिक तरीके से बनाई और संचालित की जाने वाली नावों के लिए अलग श्रेणी होगी। इनमें मोटर लगी कुछ छोटी नावें भी शामिल होंगी। दोनों श्रेणियों की नावों का पंजीकरण कराया जाएगा, ताकि उनके संचालन और नाविकों से संबंधित जानकारी सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध रहे। सरकार का मानना है कि इससे नावों की निगरानी करने और सुरक्षा से जुड़े उपाय लागू करने में मदद मिलेगी।

इनलैंड वाटर अथॉरिटी करेगी निगरानी

प्रदेश में जल परिवहन की व्यवस्था को संचालित करने और नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए इनलैंड वाटर अथॉरिटी बनाई गई है। मंत्री दयाशंकर सिंह के मुताबिक, अथॉरिटी के माध्यम से नावों का पंजीकरण कराया जाएगा और निर्धारित नियमों के अनुसार शुल्क लिया जाएगा।उन्होंने बताया कि नावों की श्रेणियां और पंजीकरण से जुड़े प्रावधान तय करने के लिए नौ राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। नई व्यवस्था में जिला और तहसील स्तर के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी, ताकि नावों के पंजीकरण की प्रक्रिया लोगों के लिए सुलभ हो सके।

यात्रियों की क्षमता के आधार पर तय होंगी श्रेणियां

यांत्रिक नावों को यात्रियों की संख्या और भार क्षमता के आधार पर अलगअलग श्रेणियों में रखा जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था में 10 यात्रियों तक की क्षमता या पांच टन से अधिक भार वाली नावों के लिए अलग श्रेणी होगी। पांच से 10 यात्रियों और 3.5 टन तक भार क्षमता वाली नावों को दूसरी श्रेणी में रखा जाएगा। वहीं, पांच तक यात्रियों की क्षमता और तीन टन तक भार वाली नावों के लिए तीसरी श्रेणी निर्धारित की गई है। इन श्रेणियों के अनुसार पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा। गैरयांत्रिक यानी पारंपरिक नावों के लिए केवल पंजीकरण शुल्क लेने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसका मकसद इन नावों और उन्हें चलाने वाले नाविकों का आधिकारिक रिकॉर्ड तैयार करना है।

नाविकों के साथ यात्रियों का भी होगा बीमा

नई व्यवस्था का अहम हिस्सा नाविकों और यात्रियों को बीमा सुरक्षा देना है। मंत्री के मुताबिक, बड़ी कंपनियां अपने स्तर पर बीमा कराती हैं, लेकिन छोटे स्तर पर नाव चलाने वाले कई नाविक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। उनके पास अक्सर बीमा जैसी सुविधाएं नहीं होतीं। ऐसे में दुर्घटना होने पर उन्हें और उनके परिवारों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। सरकार की योजना के तहत नाविकों के साथ नावों में सफर करने वाले यात्रियों को भी बीमा कवर उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके अलावा बाढ़ जैसी परिस्थितियों में नाविकों को सुरक्षा किट उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जाएगा।

काशी में मिले 1,200 नाविकों के आंकड़े

मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि प्रदेश में नाविकों ( और नावों का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। काशी से जानकारी जुटाने पर करीब 1,200 नाविकों का डेटा मिला। वहीं, मथुरा, अयोध्या और प्रयागराज समेत दूसरे स्थानों से जानकारी जुटाने में कठिनाइयां सामने आईं। अब पंजीकरण की व्यवस्था को एकीकृत करने की योजना है, जिससे प्रदेशभर में नावों और नाविकों का रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। इससे सुरक्षा संबंधी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।

ये भी पढ़ें:  

जिला और तहसील स्तर पर होगी पंजीकरण व्यवस्था

नावों के पंजीकरण ( के लिए जिला स्तर पर एआरटीओ प्रशासन और तहसील स्तर पर संबंधित परिवहन अधिकारियों की भूमिका तय की जाएगी। इससे नावों के संचालन पर निगरानी रखने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। गंगा, घाघरा, सरयू और गोमती जैसी नदियों में नावों का इस्तेमाल परिवहन और आजीविका दोनों के लिए होता है। ऐसे में नई व्यवस्था से नाव संचालन का रिकॉर्ड व्यवस्थित करने और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, पंजीकरण, शुल्क और बीमा से जुड़ी विस्तृत प्रक्रिया लागू होने वाले नियमों और दिशानिर्देशों के अनुसार स्पष्ट होगी। 

ये भी पढ़ें:  

 

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY