उत्तर प्रदेश में चुनाव से पहले मुख्यमंत्री पद में सामाजिक हिस्सेदारी की मांग तेज होने लगी है. राजधानी लखनऊ में कुर्मी समाज के मुख्यमंत्री की मांग को लेकर होर्डिंग और पोस्टर लगाए गए हैं. इनके जरिए समाज को राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर एकजुट होने का संदेश दिया जा रहा है. कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति इस मांग को लेकर जनजागरण अभियान चला रही है. अभियान से जुड़े होर्डिंग पर लिखा है अब सामाजिक ठेकेदारी नहीं, समाज का साथ चलेगा.

कुर्मी समाज की राजनीतिक भागीदारी और मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी की मांग को आगे बढ़ाने के लिए 2 नवंबर 2026 को लखनऊ में महापंचायत आयोजित करने की तैयारी है. अभियान समिति की कोशिश है कि इसमें अलगअलग राजनीतिक दलों में सक्रिय कुर्मी नेताओं, सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को एक मंच पर लाया जाए. इसके लिए केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल समेत समाज के प्रमुख नेताओं से शामिल होने की अपील की गई है.
अलगअलग दलों में बंटे नेताओं को एक मंच पर लाने की चुनौती
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कुर्मी समाज के नेता अलगअलग राजनीतिक दलों में सक्रिय हैं. अनुप्रिया पटेल अपना दल की प्रमुख हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं, जबकि पल्लवी पटेल अपना दल से जुड़ी हैं और समाजवादी पार्टी के समर्थन से विधायक चुनी गई थीं. महापंचायत की पहल इसी सवाल पर केंद्रित है कि अलगअलग दलों में राजनीतिक भूमिका निभाने वाले नेता समाज के साझा मुद्दों पर साथ आ सकते हैं या नहीं.
2027 से पहले मुख्यमंत्री पद की दावेदारी का संदेश
विधानसभा चुनाव से पहले कुर्मी समाज के मुख्यमंत्री की मांग उठना उत्तर प्रदेश की सामाजिक और राजनीतिक गोलबंदी के लिहाज से अहम है. अभियान के जरिए मुख्यमंत्री पद पर प्रतिनिधित्व की मांग को सार्वजनिक विमर्श में लाने की कोशिश की जा रही है.
एकता, संगठन, संघर्ष और सम्मान पर जोर
कुर्मी मुख्यमंत्री अभियान समिति के संयोजक पटेल अभिषेक चौधरी ने समाज के लोगों से एकजुट होकर आगे आने की अपील की है. अभियान का जोर एकता, संगठन, संघर्ष और सम्मान पर है. समिति का संदेश है कि राजनीतिक दल अलगअलग होने के बावजूद समाज के साझा मुद्दों पर एकजुटता दिखाई जाए. अब निगाहें 2 नवंबर की महापंचायत पर हैं कि क्या यह पहल कुर्मी समाज की राजनीतिक दावेदारी को नया मंच दे पाएगी?