इटावा में क्षत्रिय स्वाभिमान मंच के दशहरा मिलन समारोह में रविवार दोपहर पहुंचे पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सपाकांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि अगर वह सीटों के बंटवारे का फैसला लेते तो कांग्रेस को 25 से ज्यादा सीटें नहीं देते. उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर कहा कि सभी दल जोरशोर से तैयारी में जुटे हैं और 2027 के विधानसभा चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होने वाला है.

रविवार को अपने निजी हेलिकॉप्टर से इटावा पुलिस लाइन पहुंचे. यहां से वह क्षत्रिय स्वाभिमान मंच की ओर से आयोजित दशहरा मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए.
कार्यक्रम में उन्होंने क्षत्रिय समाज के लोगों को संबोधित किया और मेधावी छात्रछात्राओं को सम्मानित किया. इसके बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने प्रदेश की राजनीति और विभिन्न नेताओं के बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस को सिर्फ 25 सीटें देताः बृजभूषण सिंह
कांग्रेस की ओर से 200 सीटें मांगे जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि अगर वह फैसला लेते तो कांग्रेस को केवल 25 सीटें देते. उनके इस बयान को सपाकांग्रेस के बीच संभावित सीट बंटवारे की चर्चा से जोड़कर देखा जा रहा है. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दल सक्रिय हैं और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में राजनीतिक मुकाबला देखने लायक होगा.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण सिंह ने उन्हें नेता बताया. वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला पर निशाना साधते हुए उन्होंने पाकिस्तान के प्रति उनके रुख को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला का पाकिस्तान के प्रति प्रेम कभीकभी सामने आ जाता है.
बृजभूषण ने अखिलेश को दी ये सलाह
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को लेकर बृजभूषण सिंह ने कहा कि यह भारत का अभिन्न हिस्सा है. उन्होंने कहा कि संसद और भारत सरकार भी इसे भारत से अलग नहीं मानती हैं. उनका कहना था कि आज नहीं तो कल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर भारत का हिस्सा होगा. उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान में भारत से लड़ने की ताकत नहीं है.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के आजम खान से मुलाकात करने के सवाल पर बृजभूषण सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव को आजम खान से कुछ और पहले मिलना चाहिए था. उनके इस बयान के साथ ही कार्यक्रम में हुई मीडिया बातचीत के दौरान प्रदेश की राजनीति और विपक्षी दलों के बीच संबंधों से जुड़े मुद्दे भी चर्चा में रहे.