शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
Marco Jansen Create Record | मार्को जानसेन ने रचा इतिहास! ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले वनडे में शानदार प्रदर्शन से हासिल की अनोखी उपलब्धि​ | Policybazaar क्रैश में खुला कुबेर का खजाना… मंदी के खेल में 10 हजार रुपये बन गए ₹2.30 करोड़!​ | कानपुर दवा कारोबारी हत्याकांड का पर्दाफाश: बहू नहीं, बल्कि बेटा ही निकला पिता का कातिल और साजिश का मास्टरमाइंड|​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

Tax Audit 2026: 30 सितंबर से पहले अपनी टैक्स रिपोर्ट में चेक कर लें ये गलतियां, वरना आ सकता है नोटिस​

Tax Audit 2026: असेसमेंट ईयर 202627 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है. जिन लोगों के लिए अपने अकाउंट्स का ऑडिट कराना जरूरी है, वो इस डेडलाइन को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं. कई टैक्सपेयर्स ने अपनी रिपोर्ट समय से पहले ही पोर्टल पर जमा कर दी है. लेकिन […]

Tax Audit 2026: असेसमेंट ईयर 202627 के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की आखिरी तारीख 30 सितंबर है. जिन लोगों के लिए अपने अकाउंट्स का ऑडिट कराना जरूरी है, वो इस डेडलाइन को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं. कई टैक्सपेयर्स ने अपनी रिपोर्ट समय से पहले ही पोर्टल पर जमा कर दी है. लेकिन क्या रिपोर्ट फाइल कर देना ही काफी है? जवाब है, नहीं. जल्दबाजी में फाइल की गई रिपोर्ट में कई बार ऐसी गलतियां छूट जाती हैं, जो बाद में इनकम टैक्स विभाग से नोटिस का कारण बन सकती हैं.

ईशा सेखरी एंड एसोसिएट्स एलएलपी की फाउंडर ईशा सेखरी बताती हैं कि टैक्सपेयर्स को अपनी फाइल की गई रिपोर्ट को एक बार फिर से जरूर देखना चाहिए. इसमें कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां हो सकती हैं जिन्हें 30 सितंबर से पहले सुधारा जा सकता है. इस साल रिपोर्टिंग के कुछ नियमों में बदलाव भी हुआ है, इसलिए पुरानी गलतियों के साथ नई चीजों का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है.

रिपोर्ट में आमतौर पर होने वाली बड़ी गलतियां

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट में सबसे बड़ी चूक यूडीआईएन को लेकर होती है. कई बार ऑडिटर रिपोर्ट अपलोड कर देता है, लेकिन टैक्सपेयर उसे पोर्टल पर एक्सेप्ट करना भूल जाता है. जब तक आप इसे एक्सेप्ट नहीं करते, रिपोर्ट को सही तरह से जमा हुआ नहीं माना जाता है. इसके अलावा एचएसएन या सैक कोड भरते समय बिजनेस का सही नेचर न बताना भी एक आम गलती है.

लोन तथा डिपॉजिट के मामले में भी काफी सावधान रहने की जरूरत है. कैश में लिए गए लोन की एक लिमिट तय है, जिसे रिपोर्ट में सही तरीके से दिखाना जरूरी है. वहीं टर्नओवर का मिलान सबसे अहम हिस्सा है. आपकी बुक्स में जो टर्नओवर है, वो फॉर्म 26AS, एआईएस , टीआईएस तथा जीएसटी रिटर्न से बिल्कुल मैच खाना चाहिए. अगर इसमें कोई अंतर आता है, तो सिस्टम उसे तुरंत पकड़ लेता है.

इस साल एमएसएमई पेमेंट को लेकर नियमों में काफी सख्ती आई है. सेक्शन 43B के तहत क्लॉज 22 में बड़े बदलाव हुए हैं. अगर आपने छोटे या माइक्रो बिजनेस को समय पर पेमेंट नहीं किया है, तो उसकी जानकारी रिपोर्ट में देना अनिवार्य है. इसके साथ ही क्लॉज 36B के तहत बायबैक से जुड़ी जानकारी भी इस बार देनी है, जिसे अक्सर लोग भूल जाते हैं.

क्या डेडलाइन से पहले रिपोर्ट सुधारी जा सकती है?

अगर आपको अपनी जमा की गई रिपोर्ट में कोई गलती मिल जाती है, तो उसे सुधारने का विकल्प मौजूद है. तकनीकी तौर पर कानून में ‘ड्यू डेट से पहले रिवीजन’ जैसी कोई अलग से श्रेणी नहीं है. लेकिन अगर कोई चूक हो गई है, तो आप 30 सितंबर से पहले अपनी रिपोर्ट रिवाइज कर सकते हैं.

हालांकि, इसे एक सामान्य प्रक्रिया नहीं मानना चाहिए. आप सिर्फ क्लेरिकल या कैलकुलेशन की गलतियां सुधार सकते हैं. जैसे कोई नाम, पता, यूडीआईएन नंबर या कोई आंकड़ा गलत टाइप हो गया हो. अगर आप कोई बैंक अकाउंट या खर्चे की जानकारी देना भूल गए हैं, तो उसे भी जोड़ा जा सकता है. लेकिन आप अपनी अकाउंटिंग का पूरा तरीका नहीं बदल सकते. उदाहरण के लिए, आप बिजनेस इनकम को अचानक से कैपिटल गेन में तब्दील नहीं कर सकते. आपका बदलाव पूरी तरह से वास्तविक होना चाहिए.

30 सितंबर के बाद रिपोर्ट में बदलाव की गुंजाइश

अगर 30 सितंबर की डेडलाइन निकल जाती है, तब भी चिंता की बात नहीं है. टैक्स ऑडिट रिपोर्ट को डेडलाइन के बाद भी रिवाइज किया जा सकता है. फाइनेंसियल ईयर 202526 के लिए ये काम 31 मार्च 2027 तक किया जा सकता है.

ये नौबत तब आती है जब टैक्सपेयर 30 सितंबर के बाद कुछ पेमेंट करता है. मान लीजिए आपने मूल रिपोर्ट फाइल करने के बाद टीडीएस या पीएफ का बकाया जमा कर दिया. इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 31 अक्टूबर होती है. ऐसे में अगर आपने 31 अक्टूबर से पहले कोई अहम टैक्स जमा किया है, तो उसकी छूट पाने के लिए आपको ऑडिट रिपोर्ट रिवाइज करनी पड़ सकती है. इसके अलावा अगर सरकार कोई कानून पीछे की तारीख से बदल दे या कोर्ट का कोई नया फैसला आ जाए, तो भी रिपोर्ट को दोबारा जमा करने की जरूरत पड़ती है.

रिपोर्ट बदलने का आईटीआर फाइलिंग पर प्रभाव

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट रिवाइज करने की प्रक्रिया में कोई खास फर्क नहीं आता है, चाहे आप इसे 30 सितंबर से पहले करें या बाद में. ये काम किसी प्रमाणित अकाउंटेंट द्वारा ही किया जाना चाहिए, जो नई रिपोर्ट को साइन तथा वेरीफाई करेगा.

सबसे जरूरी बात ये है कि 31 अक्टूबर तक जो आप आईटीआर फाइल करेंगे, वो आपकी लेटेस्ट टैक्स ऑडिट रिपोर्ट से पूरी तरह मैच करनी चाहिए. अगर आपने अपना आईटीआर फाइल कर दिया है, और उसके बाद ऑडिट रिपोर्ट में कोई बदलाव किया है, तो आपको अपना रिटर्न भी रिवाइज करना होगा. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आपके रिटर्न को ‘डिफेक्टिव’ मानकर नोटिस भेज सकता है. इसलिए जरूरी है कि आपके सभी टैक्स दस्तावेज आपस में मेल खाते हों.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY