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Share Market की रेस: भारत को टक्कर दे रहे हैं साउथ कोरिया और ताइवान; क्या पिछड़ जाएगा दलाल स्ट्रीट?

ताइवान और साउथ कोरिया के शेयर मार्केट तेजी से भारत की कुल मार्केट वैल्यू के करीब पहुंच रहे हैं. अगर सेमीकंडक्टर और एआई सेक्टर के शेयरों में मौजूदा तेजी जारी रहती है, तो दुनिया की मार्केट रैंकिंग में भारत पीछे खिसक सकता है. ताइवान का कुल मार्केट कैप अब करीब 4.6 ट्रिलियन डॉलर पहुंच चुका है, जो भारत के 4.9 ट्रिलियन डॉलर से सिर्फ 6% कम है. वहीं साउथ कोरिया भी तेजी से गैप कम कर रहा है. उसका मार्केट कैप लगभग 4.2 ट्रिलियन डॉलर है, जो भारत से करीब 12% नीचे है.

Share Market की रेस: भारत को टक्कर दे रहे हैं साउथ कोरिया और ताइवान; क्या पिछड़ जाएगा दलाल स्ट्रीट?
Share Market की रेस: भारत को टक्कर दे रहे हैं साउथ कोरिया और ताइवान; क्या पिछड़ जाएगा दलाल स्ट्रीट?

2026 में अब तक ताइवान के शेयर मार्केट में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है. इस साल वहां का मार्केट कैप करीब 40% बढ़ा है और सिर्फ पहले चार महीनों में ही 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की वैल्यू जुड़ी है. पिछले 12 महीनों में ताइवान मार्केट की कुल वैल्यू करीब 2.7 ट्रिलियन डॉलर बढ़ी है, जो लगभग 150% की बड़ी छलांग मानी जा रही है. इसी तेजी ने ताइवान को दुनिया के टॉप इक्विटी मार्केट्स में शामिल कर दिया है.

क्यों भाग रहे हैं ये बाजार?

ताइवान की इस रैली की सबसे बड़ी वजह सेमीकंडक्टर और एआई सेक्टर की कंपनियां हैं. ताइवान सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी (TSMC) इसमें सबसे आगे रही है. एआई हार्डवेयर की दुनियाभर में बढ़ती डिमांड का सबसे ज्यादा फायदा इसी कंपनी को मिला है. अकेले TSMC का हिस्सा ताइवान के मुख्य इंडेक्स की कुल मार्केट वैल्यू में 40% से ज्यादा है.

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हालांकि तेजी सिर्फ TSMC तक सीमित नहीं रही. चिप डिजाइनर मीडियाटेक, आईफोन असेंबलिंग और एआई सर्वर बनाने वाली होन हाई प्रिसिजन इंडस्ट्री, चिप पैकेजिंग कंपनी ASE टेक्नोलॉजी होल्डिंग, पावर मैनेजमेंट सप्लायर डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स और एआई सर्वर मेकर क्वांटा कंप्यूटर जैसे शेयरों में भी मजबूत तेजी देखने को मिली है. ये कंपनियां ग्लोबल एआई सप्लाई चेन के विस्तार से बड़ा फायदा उठा रही हैं. ताइवान अब दुनिया के सेमीकंडक्टर नेटवर्क का अहम केंद्र बन चुका है और एनवीडिया जैसी कंपनियों को एडवांस्ड चिप्स सप्लाई कर रहा है.

साउथ कोरिया का बाजार

साउथ कोरिया के शेयर मार्केट में भी ऐसा ही ट्रेंड देखने को मिला है. वहां का कुल मार्केट कैप करीब 4.1 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया है. कोस्पी इंडेक्स में तेज उछाल आया है, जिसे टेक्नोलॉजी सेक्टर की मजबूती का सहारा मिला. सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और एसके हाइनिक्स जैसी मेमोरी चिप कंपनियां इस तेजी की सबसे बड़ी वजह रही हैं. ग्लोबल एआई सप्लाई चेन में इन कंपनियों की अहम भूमिका है और कोस्पी के कुल मार्केट कैप में इनका हिस्सा 40% से ज्यादा है.

भारत का शेयर बाजार

दूसरी तरफ भारतीय शेयर मार्केट में सितंबर 2024 के बाद से काफी वोलैटिलिटी देखने को मिली है. भारत की लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 2025 में सिर्फ 2% बढ़ा, जबकि 2026 में अब तक करीब 7% गिर चुका है. इसकी वजह ज्यादा वैल्यूएशन, प्रॉफिट ग्रोथ में सुस्ती, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और एआई सेक्टर में भारत की सीमित मौजूदगी मानी जा रही है. इसके अलावा जियोपॉलिटिकल टेंशन ने भी भारतीय मार्केट पर दबाव बढ़ाया है. अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच तनाव और ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितता की वजह से क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ी हैं. इससे इंफ्लेशन और सरकारी वित्तीय दबाव को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं.

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