अगर आपके भी घर के पंखे के ब्लेड पर धूल लगी है तो इसे जल्द से जल्द साफ कर लें. धूल लगा पंखा भले ही आपको सामान्य सा नजर आ रहा है, लेकिन सीधेतौर पर यह आपके जेब ढीली करता है और बिजली का बिल भी बढ़ाता है. इसके पीछे भी पूरा साइंस छिपा है, अब इसे आसान भाषा में समझ लेते हैं. घर के हर खुले हिस्से से आ रही हवा के साथ धूल के बारीक कण भी पहुंचते हैं. ये भले ही नहीं दिखते लेकिन जब इन कणों की संख्या ज्यादा हो जाती है तो ये धूल की पर्त के रूप में दिखने लगते हैं. हाथ लगाने पर साफ पता चलता है कि किसी खास हिस्से पर धूल जमी है. पंखे के मामले में भी ऐसा है.

अब सवाल उठता है कि मामूली सी धूल कैसे पैसों की चपत लगाती है. हवा देने का काम पंखे में लगे तीन ब्लेड करते हैं. समयसमय पर इनकी सफाई न होने पर खासतौर पर इनके किनारों पर धूल की मोटी पर्त जमने लगती है. ज्यादातर लोग पंखे को 3 महीने में भी नहीं साफ करते. यहीं पर सबसे बड़ी गलती होती है.
कैसे लगती है चपत?
पंखों के ब्लेड का काम हवा फेंकना है. जब ब्लेड की सतह चिकनी होती है तो यह आसानी हवा फेंक पाता है. इसके लिए हवा को काटना और उसे नीचे फेंकना आसान हो जाता है. लेकिन जब इस पर धूल चढ़ती है तो इसकी सतह खुरदरी हो जाती है. नतीजा, प्रतिरोध बढ़ने के साथ इसके लिए हवा फेंकना मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि घर के पंखे को साफ करने के बाद पहले से कई गुना हवा मिलने का अहसास होने लगता है.
ब्लेड पर जमी धूल पंखे की क्षमता घटाती है. फोटो: AI Generated
जब पंखे के ब्लेड पर हवा जमी होती है तो हवा फेंकने की क्षमता कम हो जाती है. नतीजा, मोटर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. फिर पंखे की स्पीड बढ़ाई जाती है, लेकिन धूल के कारण ब्लेड की क्षमता घट चुकी होती है. पंखे को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है.
मोटर पर पहले से ज्यादा लोड पड़ता है ताकि वही स्पीड बनी रहे. लंबे समय तक लगातार ज्यादा लोड बढ़ने पर मोटर गर्म होती है. जिससे उसकी उम्र भी घटती है और फुंकने की स्थिति में लम्बा खर्च आता है. कई बार रिपेयरिंग का खर्च इतना ज्यादा आता है कि नया पंखा ही खरीदने की सलाह दी जाती है. खर्च यही नहीं रुकता. दूसरे रास्तों से बिजली का बिल भी बढ़ता है.
कैसे बढ़ता है बिजली का बिल?
पंखे की क्षमता घटने पर हवा के लिए दूसरे साधनों का इस्तेमाल किया जाता है. जैसेएसी, कूलर और वॉल फैन या दूसरे विकल्प. पंखे के साथ इनका इस्तेमाल घर के बिजली के बिल में इजाफा करता है. जिसका सीधा असर बिजली के बिल के रूप में दिखाई देता है. नतीजा, मोटर के फुंकने के खतरे के साथसाथ बिजली का बिल बढ़ता है और जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ती है.
धूल की 0.5 mm पतली परत इसकी एरोडायनामिक क्षमता को 5 से 10% तक कम कर सकती है. फोटो: AI Generated
अब करें क्या?
धूल सिर्फ पंखा तक ही नहीं, मोटर वाले हिस्से तक भी पहुंचती है. पंखे और उसके ब्लड को हर 15 दिन में सूखे कपड़े से साफ करें. धूल जितनी कम होगी हवा उतनी ही ज्यादा फेंकेगा. पंखा बनाने वाली कंपनी क्रॉप्टन की रिपोर्ट कहती है, सीलिंग फैन की परफॉर्मेंस को बरकरार रखने के लिए इसकी सफाई जरूरी है.
ब्लेड के हिस्से पर धूल की 0.5 mm पतली परत इसकी एरोडायनामिक क्षमता को 5 से 10% तक कम कर सकती है. इस खिंचाव की वजह से मोटर पर ज़्यादा जोर पड़ता है, जिससे गर्मी पैदा होती है और हवा के बहाव को बढ़ाने के लिए ज्यादा बिजली खर्च होती है.