Rishi Kapoor’s Superhit Movie: ऋषि कपूर की फिल्म बॉबी और उसके डायलॉग ने कुछ समय बाद सुर्खियां बटोरीं लेकिन उससे पहले उस फिल्म के पोस्टर और गानों ने जैसे आग लगा दी थी. पोस्टर पर किशोर उम्र के लवर बॉय से दिखने वाले ऋषि कपूर और उनके साथ कमसिन डिंपल कपाड़िया की आकर्षक अदाएं. गानों में उद्याम और उत्कट भावनाएं. तब हीरोइन को मिनी स्कर्ट में देख बहुत से लोग भड़क गए थे. शेरो-शायरी के साथ प्रेम कहानी देखते आ रहे थे. खासतौर पर वे लोग भी जो आरके बैनर की फिल्मों को बहुत ही संजीदा मानते थे. उन्होंने सवाल उठाया- आखिर ये कैसी फिल्म है. ये कौन-सी हीरोइन है. राज कपूर ने अपने बेटे ऋषि कपूर को लॉन्च करने के लिए इतने हल्केपन का सहारा क्यों लिया. आदि आदि.

जबकि राज कपूर के खास फैन्स के इतर युवाओं ने इस फिल्म को बहुत ही गंभीरता से लिया. युवा दर्शक उन अदाओं और भावनाओं की लहरों पर सवार हो गए. और डिंपल कपाड़िया को देखने के लिए युवाओं की फौज टिकट खिड़की पर उमड़ पड़ीं. फिल्म के गाने पहले ही धूम मचा चुके थे. लेकिन जिन राज कपूर के फैन्स ने बॉबी के पोस्टर देखकर नाक भौं सिकोड़ी थी, अब उनके इम्तिहान की बारी थी. बढ़ती लोकप्रियता और गानों के किस्सों ने उन्हें भी थिएटर की ओर खींच लिया.
राज कपूर ने ऋषि को लॉन्च कर जुआ खेला
देखते ही देखते बॉबी सुपरहिट हो गई. मेरा नाम जोकर बनाकर कर्ज में आए राज कपूर को बंपर कमर्शियल लाभ हुआ. कर्ज उतारा और आगे फिल्में बनाने की हिम्मत जुटाई. लेकिन यह बहुत आसान भी नहीं था. बाद के दौर में पता चला कि बॉबी की कहानी, संवाद, गाने, ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया ने इस फिल्म को सुपरहिट बनाने में कैसी भूमिका निभाई.
सबसे पहले बात ऋषि कपूर की. ऋषि कुछ ही साल पहले मेरा नाम जोकर में राज कपूर के बचपन का रोल निभा चुके थे. लेकिन उसके तुरंत बाद बॉबी में बतौर नायक रोल निभाना बहुत आसान नहीं था. राज कपूर के लिए भी यह जुआ खेलने जैसा ही था.
दरअसल राज कपूर बॉबी में सुपरस्टार राजेश खन्ना को लेना चाहते थे. उनकी आर्थिक हालत इसके लिए रोक रही थी. राजेश खन्ना की हाई फी नहीं दे सकते थे. चारों तरफ से निराश राज कपूर ने आर्थिक कमी के चलते बेटे को ही लॉन्च करने का फैसला किया. पैसे की कमी की वजह से ही उन्होंने डिंपल कपाड़िया जैसी एकदम नई नायिका का चुनाव किया. दूसरी तरफ प्रेम चोपड़ा और प्रेमनाथ जैसे चरित्र कलाकार ने भी उनसे कोई पैसे नहीं लिए. प्राण ने भी उधारी में ही काम किया.
बॉबी में ऋषि कपूर कितने एम्योचोर दिखते हैं
बॉबी के शुरुआती कुछ सीन को गौर से देखिए तो साफ लगता है कि वैसे सीन में ऋषि कपूर कितने एम्योचोर से दिखते हैं. अभिनय के लिहाज से चेहरा एकदम भावशून्य नजर आता है. मैं शायर तो नहीं… गाने के दौरान ऋषि कपूर शर्मीले नवयुवक तो बने हैं लेकिन ऐसा कोई हाव भाव नहीं है जिसे देखकर दर्शक प्रभावित हों. उस सीन का सारा आकर्षण डिंपल कपाड़िया की परछाईं, मिनी स्टर्क वाली एक नवयुवती है. ऋषि कपूर की भावशून्यता को भरने के लिए गाने के दौरान अरुणा ईरानी के नृत्य का बखूबी उपयोग किया गया है. आज फिल्म का वह सीन बहुत ही क्लासिक कहलाता है.
बॉबी आखिर क्यों इतनी कामयाब हुई- ये समझने के लिए इसकी कहानी को समझना होगा. आपको बताएं कि बॉबी की कहानी और पटकथा ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखी थी, जोकि खुद भी फिल्म निर्देशक थे. उन्होंने इससे पहले भी राज कपूर के लिए कई फिल्में लिखी थीं. राज कपूर ने केए अब्बास से गुजारिश की थी कि उन्हें ऐसी कहानी चाहिए जो युवाओं को दीवाना बना दे और उनके सारे कर्ज उतार दे. तब केए अब्बास ने प्रेम कहानी का ऐसा ताना बाना बुना तो परंपरागत नहीं था. इसमें सत्तर के दशक के बाद के बदलते हिंदुस्तान के युवाओं का मिजाज पकड़ा गया था.
प्रेम कहानी का परंपरागत ढांचा बदला
अब तक की फिल्मी प्रेम कहानियों में जो गेटअप और लोकेशन दिखाये जाते थे, वे आम तौर आम लोगों की पहुंच से बाहर होते थे. लकदक पोशाकों में, शाही परिवेश में राजा और रानी की मखमली प्रेम कहानी, शेरो शायरी और कव्वालियां… दर्शक इसे पसंद तो करते थे लेकिन बॉबी ने उन्हें राजमहल की चहारदीवारी से बाहर निकाला. बॉबी के मॉडर्न आउटफिट वाले किरदारों ने शाही दरबार की दीवार गिरा दी. आम घरों में पली बढ़ी लड़की और रईस घर में पला बढ़ा लड़का, दोनों के समाज अलग-अलग. प्रेम ने अमीरी और गरीबी की भी दीवार गिरा दी. नई पीढ़ी को यह कहानी अपनी सी लगी और सुपरहिट हो गई. मुझे कुछ कहना है… गाना तब कैंपस का एंथम ही बन गया.
भारतीय दर्शकों को अब तक शाही पोशाकों में प्रेमी-प्रेमिका देखने की आदत थी. लेकिन बॉबी ने पर्दे पर प्रेम के प्रतिमान बदल दिये. मिनी स्कर्ट पहनी हीरोइन तो सामान्य पैंट-शर्ट पहनने वाला हीरो. दर्शक मुगले आजम, अनारकली, ताजमहल या हीर रांझा के गेटअप से बाहर निकले. ऋषि कपूर और डिंपल कपाड़िया पर मॉडर्न लव स्टोरी का जो नया प्रयोग किया गया, वह बदलते मिजाज वाले दर्शकों के बीच कामयाब हो गया.
इतना ही नहीं, फिल्म में डिंपल कपाड़िया के किरदार के माध्यम से एक जागरुक और स्वाबलंबी चेतना से युक्त युवती का भी चित्रण किया गया था. वह केवल मिनी स्कर्ट पहनकर ग्लैमर दिखाने वाली किरदार नहीं है बल्कि एक बालिग और बिंदास युवती है. डिंपल मौका आने पर कहती है- वह इक्कीसवीं सदी की लड़की है, वह अपने प्रेमी के साथ पिक्चर देखने जा सकती है. यानी अपने फैसले लेने वाली लड़की.
ऋषि कपूर की बॉबी ट्रेंड सेटर कहलाई
ऋषि कपूर की बिंदास बॉबी आगे चलकर लव और लिबरलेशन का फिल्मी ट्रेड मार्क बन गई. ऋषि कपूर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे मॉडर्न लवर बॉय कहलाए. इसके बाद उन्होंने 1976 में लैला मजनूं में विक्षिप्त प्रेमी का ऐसा रोल निभाया कि वह भी ट्रेड मार्क बन गया. मजनूं मतलब ऋषि कपूर हो गया. बाद के दौर में बॉबी मार्का कई फिल्में आईं- मसलन कमल हासन-रति अग्निहोत्री की एक दूजे के लिए (1981), कुमार गौरव-विजयता पंडित की लव स्टोरी (1981), मिथुन चक्रवर्ती-पद्मिनी कोल्हापुरे की प्यार झुकता नहीं (1985), सलमान खान-भाग्यश्री की मैंने प्यार किया (1989) आदि. ये सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कामयाब कहलाईं. ऋषि कपूर की बॉबी की बिंदास कहानी को आगे बढ़ाने वाली साबित हुई.





