जून में होने वाली Reserve Bank of India की मॉनेटरी पॉलिसी बैठक में आम कर्जदारों को फिलहाल राहत मिल सकती है, क्योंकि ज्यादातर अर्थशास्त्रियों को ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी की उम्मीद नहीं है. हालांकि, बढ़ती महंगाई, महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये की वजह से साल के आखिर तक EMI महंगी होने का खतरा बढ़ गया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर महंगाई पर दबाव बना रहा, तो RBI अक्टूबर के बाद ब्याज दरों में 25 से 50 बेसिस पॉइंट तक की बढ़ोतरी कर सकता है.
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मनीकंट्रोल की रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में हालात बदल सकते हैं. अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ती है, तो साल के आखिर तक RBI को ब्याज दरें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ सकता है. इससे आम लोगों की EMI महंगी हो सकती है.
अक्टूबर में हो सकती है ब्याज दरों में बढ़ोतरी
Moneycontrol के सर्वे में शामिल 11 अर्थशास्त्रियों में से अधिकांश का मानना है कि अक्टूबर की पॉलिसी बैठक या उसके बाद वित्त वर्ष 2027 में RBI कुल मिलाकर 25 से 50 बेसिस पॉइंट तक की दर बढ़ोतरी कर सकता है. सर्वे के औसत अनुमान के मुताबिक, FY27 के अंत तक RBI की पॉलिसी दर 5.75 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो अभी 5.25 प्रतिशत है. एक्सपर्ट का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और मौसम से जुड़ी चुनौतियां महंगाई बढ़ाने वाले बड़े कारण बन रहे हैं. मई में भारतीय बास्केट में कच्चे तेल की औसत कीमत 107.96 डॉलर प्रति बैरल रही. वहीं रुपया भी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.96 तक पहुंच गया है.
इसका असर अब आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है. सरकार ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल के दाम 4 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ाए हैं. इसके अलावा दूध और सोने की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल रही है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन सब कारणों से आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई और बढ़ सकती है.
एक्सपर्ट की राय
Kotak Mahindra Bank की अर्थशास्त्री उपासना भारद्वाज के मुताबिक, बढ़ती ऊर्जा लागत, ऊंचे इनपुट खर्च और कमजोर रुपये की वजह से महंगाई का खतरा लगातार बना हुआ है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश की आर्थिक गतिविधियां अभी मजबूत दिखाई दे रही हैं. वहीं ICRA की अदिति नायर ने पश्चिम एशिया के तनाव को देखते हुए वित्त वर्ष 2027 के लिए कच्चे तेल का अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 95 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है. उन्होंने कहा कि RBI जून में सतर्क रुख अपना सकता है.
Barclays की आस्था गुडवानी का कहना है कि पश्चिम एशिया का तनाव भारत की आर्थिक ग्रोथ को धीमा कर सकता है. साथ ही ऊर्जा और खाद्य महंगाई बढ़ने का जोखिम भी बना हुआ है. इसके बावजूद उन्हें उम्मीद है कि RBI जून में ब्याज दरें स्थिर रखेगा. हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब तक महंगाई RBI की 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा को पार नहीं करती, तब तक केंद्रीय बैंक सख्ती से बच सकता है. कुल मिलाकर, जून की बैठक में राहत मिलने की उम्मीद जरूर है, लेकिन आने वाले महीनों में EMI बढ़ने का खतरा पूरी तरह टला नहीं है.
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