भारतीय शेयर बाजार में उस समय हड़कंप मच गया जब मार्केट रेगुलेटर सेबी ने देश की बड़ी जूलरी कंपनियों में शामिल राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड और उसके चेयरमैन राजेश मेहता के खिलाफ अंतरिम आदेश जारी किया। सेबी की जांच में कंपनी पर वित्तीय आंकड़ों में गड़बड़ी, फंड के कथित दुरुपयोग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इस कार्रवाई के बाद कंपनी का शेयर 5% के लोअर सर्किट पर पहुंच गया, वहीं कंपनी में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली LIC को भी झटका लगा है।

सेबी की जांच में क्या सामने आया?
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच अपने कारोबार से जुड़े आंकड़ों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया। जांच में दावा किया गया कि कंपनी ने लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू की गलत रिपोर्टिंग की। हैरानी की बात यह है कि कथित तौर पर 99.8% राजस्व वास्तविकता से कहीं ज्यादा दिखाया गया था। SEBI का कहना है कि कंपनी के प्रमोटर से जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से फंड के इस्तेमाल को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
कौन हैं राजेश मेहता?
राजेश मेहता का जन्म 20 जून 1964 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट जोसेफ स्कूल से की। कम उम्र में ही वह अपने पिता के जूलरी कारोबार से जुड़ गए थे। 1980 के दशक में उन्होंने अपने भाई प्रशांत मेहता के साथ मिलकर चांदी के आभूषणों का कारोबार शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अपने बड़े भाई से मात्र 1200 रुपये उधार लिए थे। धीरे-धीरे उनका कारोबार दक्षिण भारत, गुजरात और मुंबई जैसे बड़े बाजारों तक फैल गया।
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छोटे कारोबार से अरबों डॉलर की कंपनी तक का सफर
साल 1995 में राजेश एक्सपोर्ट्स ने शेयर बाजार में कदम रखा और आईपीओ के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये जुटाए। इसके बाद कंपनी ने गोल्ड रिफाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल कारोबार में तेजी से विस्तार किया। कंपनी को दुनिया भर में पहचान तब मिली जब 2015 में उसने स्विट्जरलैंड की मशहूर गोल्ड रिफाइनरी वाल्कैम्बी (Valcambi) को करीब 400 मिलियन डॉलर में खरीद लिया। यह डील पूरी तरह कैश पेमेंट के जरिए हुई थी।
अब क्यों फंसे राजेश मेहता?
सेबी के आदेश के अनुसार, राजेश मेहता कंपनी के प्रमुख निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे और फाइनेंशियल एक्टिविटी पर उनका सीधा कंट्रोल था। इसी वजह से नियामक ने उन्हें अगली सूचना तक शेयर बाजार में किसी भी प्रकार की खरीद-बिक्री या कारोबार करने से रोक दिया है।
LIC को भी लगा झटका
राजेश एक्सपोर्ट्स में भारतीय जीवन बीमा निगम की 10.80% हिस्सेदारी है। सेबी की कार्रवाई के बाद कंपनी के शेयर में तेज गिरावट आई, जिसका असर LIC के निवेश पर भी पड़ा। आपको बता दें कि यदि मामले में आरोप सही साबित होते हैं तो यह हाल के वर्षों के सबसे बड़े कॉर्पोरेट गवर्नेंस विवादों में से एक बन सकता है।












