Wardha Bank Scam: वर्धा शहर के कच्छी लाइन स्थित वर्धा अर्बन एंड रूरल कोऑपरेटिव बैंक में सामने आए कथित वित्तीय घोटाले ने नया मोड़ ले लिया है। बैंक प्रशासन की ओर से पुलिस को दी गई शिकायत में पर्याप्त स्पष्टता नहीं होने के कारण आर्थिक अपराध शाखा ने बैंक से पूरे मामले की विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। साथ ही बैंक को अपने स्तर पर निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट पुलिस को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

मामले की जांच कर रही आर्थिक अपराध शाखा ने अब तक बैंक के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा शिकायतकर्ताओं सहित लगभग 25 लोगों के बयान दर्ज किए हैं। गौरतलब है कि इस मामले में पहले वर्धा शहर पुलिस ने अपराध दर्ज किया था, जिसके बाद जांच आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी गई। मुख्य आरोपी एवं बैंक के तत्कालीन प्रबंधक प्रवीण बोरकर को पुलिस ने हिरासत में लिया था।
पूर्व प्रबंधक पर 9 शिकायतें
जांच के दौरान बोरकर के घर से 3 लाख रुपये नकद तथा बैंक से लगभग 102 ग्राम सोना जब्त किया गया। उन पर बैंक में कार्यरत रहते हुए बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं करने, नकली सोना गिरवी रखकर बैंक को नुकसान पहुंचाने तथा ग्राहकों के साथ विश्वासघात करने के आरोप हैं। इसके अलावा एक महिला से एफडी और सोना गिरवी रखने के नाम पर
पुलिस ने जांच बढ़ाई
करीब 35 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने का भी आरोप है। प्रवीण बोरकर के खिलाफ अब तक 9 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। मामले की गंभीरता और धोखाधड़ी की बढ़ती राशि को देखते हुए जांच आर्थिक को सौंपी गई है। पुलिस उपाधीक्षक पुंडलिक भटकर के मार्गदर्शन में एपीआई निशांत फुलेकर मामले की जांच कर रहे हैं। दूसरी ओर यह घोटाले का प्रकरण सामने आने के बाद संबंधित बैंक की विश्वासार्हता पर भी अब सवाल उठने लगे है। कई उपभोक्ता बैंक से पैसे निकालते दिखाई दे रहे।
बैंक ने तीन लोगों पर जताया संदेह
सूत्रों के अनुसार, बैंक द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में तत्कालीन प्रबंधक प्रवीण बोरकर सहित तीन लोगों पर संदेह जताया गया है। शिकायत में गिरवी रखने, बैंक ग्राहकों से धोखाधड़ी करने तथा बैंक के साथ विश्वासघात जैसे आरोपों का उल्लेख है। हालांकि शिकायत में कई महत्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट नहीं होने के कारण पुलिस ने बैंक प्रशासन से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुलिस आगे की कार्रवाई और जांच को गति देगी।




