Plant Care in Summer: गर्मियों के मौसम में पौधों को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है. गर्म हवाएं, तेज धूप और चिलचिलाती गर्मी की वजह से पौधे को नुकसान पहुंच सकता है. ऐसे में गमले की मिट्टी भी बहुत जल्दी सूख जाती है, जिसका सीधा असर पौधे की हेल्थ पर पड़ता है. पौधे की ग्रोथ रुक जाती है, पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, और जड़ें भी सूख जाती हैं. लेकिन बहुत कम ही लोग जानते हैं कि अगर आपको अपने पौधे के हरा-भार रखना है तो उसकी पानी और खाद देने के अलावा गमले की मिट्टी बदलना भी जरूरी होता है.

हालांकि बहुत से लोगों को यह पता नहीं होता कि मिट्टी कितने दिन में बदलनी चाहिए और इसे बदलते समय किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सही समय पर मिट्टी बदलने से पौधों को जरूरी पोषण मिलता है, जड़ों को पर्याप्त हवा मिलती है और पौधे लंबे समय तक हरे-भरे बने रहते हैं. चलिए इस आर्टिकल में आपको भी बताते हैं गमले की मिट्टी बदलने का सही समय क्या है?
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कितने दिन में बदलनी चाहिए गमले की मिट्टी?
अगर आपको अपने पौधे को हेल्दी रखना है तो गमले की मिट्टी को समय-समय पर बदलना बेहद जरूरी है. क्योंकि वक्त के साथ मिट्टी के पोषक तत्व कम होने लगते हैं. ऐसे में मिट्टी बदला पौधे की सेहत के लिए अच्छा होता है. आमतौर पर छोटे गमलों की मिट्टी 8 से 12 महीने में और बड़े गमलों की मिट्टी 1 से 2 साल में बदल देनी चाहिए. अगर यदि मिट्टी बहुत सख्त हो जाए, पानी ऊपर ही रुकने लगे या पौधा कमजोर दिखे, तो मिट्टी जल्दी बदलना बेहतर रहता है. बरसात शुरू होने से पहले या बसंत के मौसम में मिट्टी बदलना सबसे अच्छा माना जाता है.
नई मिट्टी ऐसे करें तैयार?
नई मिट्टी तैयार करते समय केवल साधारण मिट्टी का उपयोग न करें. अच्छी ग्रोथ के लिए 50% गार्डन मिट्टी, 30% गोबर की सड़ी खाद या कम्पोस्ट और 20% रेत या कोकोपीट मिलाना अच्छा रहता है. इसमें थोड़ी नीम खली, बोनमील या वर्मीकम्पोस्ट डालने से पौधों को एक्स्ट्रा पोषण मिलता है और जड़ों में सड़न कम होती है. ध्यान रहे कि मिट्टी हमेशा भुरभुरी और पानी निकालने वाली होनी चाहिए.
इन बातों का रखें खास ध्यान
पौधे को जिंदा और हरा-भरा रखने के लिए उसकी केयर करना भी जरूरी है. जैसे समय-समय पर प्लांट की पीली हुई पत्तियों को काटें. इससे नई शाखाएं और नई पत्तियां तेजी से निकलती हैं. फूल वाले पौधों में सूखे फूल भी हटाते रहें ताकि पौधे की ऊर्जा नई कलियों में लगे. बहुत ज्यादा छंटाई गर्मियों की तेज धूप या कड़ाके की सर्दी में नहीं करनी चाहिए.





