एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन के अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक संगठन ने केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर प्रोविडेंट फंड क्लेम सेटलमेंट में देरी, IT कर्मचारियों की कमी और स्टाफ की कमी पर चिंता जताई है. साथ ही, उन्होंने रिटायरमेंट फंड बॉडी के कामकाज को बेहतर बनाने के लिए पॉलिसी में बदलाव की मांग की है. ET की रिपोर्ट के अनुसार, 3 अगस्त 2026 के एक पत्र में EPF ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि EPFO द्वारा अपने नए लॉन्च किए गए सेंट्रलाइज्ड IT इनेबल्ड सिस्टम के जरिए क्लेम सेटलमेंट को डिजिटाइज करने की कोशिशों के बावजूद, लाखों ऑटोप्रोसेस्ड क्लेम 20 दिनों से ज्यादा समय से पेंडिंग हैं.

एसोसिएशन ने खोली पोल
एसोसिएशन ने कहा कि CITES से ज्यादातर EPF क्लेम को दो से तीन दिनों के भीतर ऑटोमैटिक रूप से प्रोसेस किए जाने की उम्मीद थी. इसके बजाय, उनका आरोप है कि बड़ी संख्या में क्लेम बिना किसी स्पष्टीकरण के अटके हुए हैं, न तो फील्ड ऑफिस को और न ही सब्सक्राइबर्स को कोई जानकारी दी गई है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि फ्रंटलाइन EPFO अधिकारियों को ग्रीवेंस पोर्टल, सोशल मीडिया और आमनेसामने की बातचीत में मेंबर्स की बढ़ती शिकायतों को संभालना पड़ रहा है, जबकि पब्लिक मैसेजिंग में यह कहा जा रहा है कि क्लेम दो दिनों के भीतर सेटल हो रहे हैं.
ये आरोप ऑफिसर्स एसोसिएशन ने लगाए हैं और अब तक EPFO या श्रम मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. पत्र के अनुसार, एसोसिएशन ने आगे कहा कि CITES प्रोजेक्ट, जिसे जनवरी 2023 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग को 10 महीने की डेडलाइन के साथ सौंपा गया था, में काफी देरी हुई है और इसे जुलाई 2026 से केवल आंशिक रूप से ही लागू किया गया है.
स्टाफ की कमी और पेंशन में सुधार मुख्य चिंताएं
क्लेम में देरी के अलावा, अधिकारियों के संगठन ने EPFO में लंबे समय से चली आ रही स्टाफ की कमी की ओर भी इशारा किया. उनका दावा है कि 2004 से इंफॉर्मेशन सर्विसेज डिवीजन में कोई सीधी भर्ती नहीं हुई है और संगठन पिछले तीन सालों से फुलटाइम चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर नियुक्त नहीं कर पाया है.
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि स्टाफिंग के नियम मार्च 2008 में तय की गई स्वीकृत संख्या पर ही आधारित हैं, जबकि इतने सालों में सब्सक्राइबर्स की संख्या और डिजिटल काम का बोझ काफी बढ़ गया है. उनका तर्क है कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और गुरुग्राम जैसे मेट्रो शहरों के ऑफिस काफी दबाव में काम कर रहे हैं क्योंकि स्टाफ की संख्या मांग के हिसाब से नहीं बढ़ाई गई है.
पत्र में एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम में सुधार की भी मांग की गई है. तर्क दिया गया है कि ब्याज दरों में गिरावट के कारण मौजूदा पेंशन ढांचे को आर्थिक रूप से बनाए रखना मुश्किल हो गया है. इसमें पैसे निकालने के नियमों पर फिर से विचार करने का सुझाव दिया गया है और पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी का उदाहरण दिया गया है, जहां रिटायरमेंट की सेविंग को सुरक्षित रखने के लिए पैसे निकालने पर कड़े नियम हैं.
इस बात का भी ध्यान रखने को कहा
इसके अलावा, एसोसिएशन ने सरकार से EPFO के बाहर से सीनियर लीडरशिप पदों पर अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया की समीक्षा करने का आग्रह किया है. उनका तर्क है कि पॉलिसी बनाने के स्तर पर संबंधित क्षेत्र के ज़्यादा जानकार लोगों के होने से संगठन को फायदा होगा. हाल के महीनों में, EPFO ने सर्विस डिलीवरी को बेहतर बनाने के लिए टेक्नोलॉजी पर आधारित कई पहल शुरू की हैं, जिनमें EPF स्कीम, 2026 और CITESआधारित डिजिटल प्रक्रियाओं को लागू करना शामिल है. संगठन ने टेक्निकल अपग्रेड के दौरान सर्विस में कुछ समय के लिए रुकावट आने की बात भी मानी है और कहा है कि वह मेंबर्स को बिना किसी रुकावट के सर्विस देने के लिए काम कर रहा है.