पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हर साल 10 मई को ‘मरका-ए-हक दिवस’ के रूप में मनाए जाने की घोषणा की।
भारत के साथ पिछले साल हुए चार दिवसीय संघर्ष को इस्लामाबाद ने ‘मरका-ए-हक’ नाम दिया और इसके एक साल पूरे होने पर रविवार को समारोह आयोजित किया गया।
समारोह में शहबाज ने दावा किया कि पाकिस्तानी सशस्त्र बलों ने दुश्मन को ‘‘ऐतिहासिक और उचित जवाब’’ दिया।
पहलगाम आतंकी हमले में अधिकतर पर्यटकों समेत 26 लोगों की हत्या के बाद भारत ने पिछले साल सात मई को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में नौ आतंकी ठिकानों पर हवाई हमले किए गए।
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इन हमलों में कम से कम 100 आतंकवादियों को ढेर किया गया।
इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, हालांकि उनमें से अधिकतर हमलों को भारतीय सेना ने विफल कर दिया।
दोनों पक्षों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के बाद पिछले साल 10 मई को सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति के साथ शत्रुता समाप्त हो गई।
प्रधानमंत्री शहबाज़ ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए युद्ध रोकने में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका की सराहना की। उन्होंने संघर्ष के दौरान राजनयिक और राजनीतिक समर्थन देने के लिए सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को धन्यवाद भी दिया।
भारत का कहना है कि सैन्य कार्रवाई रोकने की सहमति दोनों पक्षों के बीच सीधे तौर पर हुई थी।
कार्यक्रम में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि इस लड़ाई ने यह दिखाया है कि जब पूरा देश एकजुट होकर पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के साथ खड़ा होता है तो वे क्या करने में सक्षम होते हैं।
प्रधानमंत्री के संबोधन की शुरुआत में एक मिनट का मौन रखकर संघर्ष के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई।





