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Mohan Bhagwat Speech: भारत में प्रोटेस्ट, फ्रांस, AI, Gen-Z और मुस्लिम… मोहन भागवत की दशहरा स्पीच की बड़ी बातें, PM मोदी ने की तारीफ​

Mohan Bhagwat Speech: महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधन दिया। संबोधन में मोहन भागवत ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों, GenZ पीढ़ी और  तकनीक पर अपनी बातें रखी हैं। इतना ही नहीं उनके संबोधन की […]

Mohan Bhagwat Speech: महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के मौके पर विजयदशमी उत्सव और शस्त्र पूजन पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने संबोधन दिया। संबोधन में मोहन भागवत ने फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों, GenZ पीढ़ी और  तकनीक पर अपनी बातें रखी हैं। इतना ही नहीं उनके संबोधन की तारीफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी की है। चलिए जानते हैं मोहन भागवत के संबोधन की 5 बड़ी बातें। 

 

1. आंदोलन का मकसद समाधान हो, समाज में न बढ़े दूरी

मोहन भागवत ने कहा कि समाज में जब समस्याएं पैदा होती हैं, तो उनके समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है। लेकिन आंदोलनों का उद्देश्य समस्याओं को दूर करना होना चाहिए, न कि लोगों के बीच द्वेष और विभाजन पैदा करना। उन्होंने चिंता जताई कि कई बार आंदोलनों का इस्तेमाल दूसरे उद्देश्यों के लिए होने लगता है और वे राजनीति का माध्यम बन जाते हैं। उनके मुताबिक, देश और समाज की समस्याओं को सुलझाने में केवल नेताओं की ही नहीं, बल्कि समाज की सक्रिय भागीदारी भी अहम होती है।

2. एकजुट रहेंगे तो कोई कमजोर नहीं कर पाएगा

भागवत ने सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि लोगों को बाहरी प्रभावों में आकर उत्तेजित होने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया में ऐसी शक्तियां मौजूद हैं, जो भारत को दबाव में रखना चाहती हैं। अपने संबोधन में उन्होंने बंगाल विभाजन का उदाहरण भी दिया। उन्होंने याद दिलाया कि लॉर्ड कर्जन के समय हिंदूमुस्लिम आधार पर बंगाल का विभाजन किया गया था, जिसे चार साल बाद वापस लेना पड़ा। इसके विपरीत, 1947 में देश का विभाजन नहीं रोका जा सका। भागवत के मुताबिक, जब समाज में यह सोच मजबूत हो जाती है कि अलग पहचान वाले लोग अलग ही हैं, तो एकता कमजोर पड़ने लगती है। उन्होंने सभी से एकता बनाए रखने की अपील की।

3. पूर्वज और संस्कृति एक, सभी को साथ लेकर चलना जरूरी

 

 

 ने कहा कि भारत के लोगों के पूर्वज एक हैं और देश की सांस्कृतिक जड़ें भी साझा हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी की अलग पहचान को मिटाने की कोशिश किए बिना सभी को साथ लेकर चलना चाहिए। उनके अनुसार, विविधता के बीच एकता बनाए रखना भारतीय परंपरा की खासियत है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के विचारों और सांस्कृतिक परंपराओं में दुनिया की कई समस्याओं का समाधान देने की क्षमता है। इसके लिए जरूरी है कि समाज में आपसी समझ, सहयोग और सम्मान की भावना बनी रहे।

4. विकास के साथ प्रकृति और नैतिकता का भी ध्यान रखें

भागवत ने विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई। नेपाल में बाढ़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विकास के लिए तकनीक को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन इसके कारण प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। उन्होंने ऐसे विकास की वकालत की, जिसमें अर्थव्यवस्था यानी इकोनॉमी के साथ पर्यावरण यानी इकोलॉजी और नैतिकता यानी एथिक्स को भी महत्व दिया जाए। उनके संदेश का जोर इस बात पर था कि विकास की योजनाएं बनाते समय केवल आर्थिक फायदे को नहीं, बल्कि पर्यावरण और समाज पर पड़ने वाले असर को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

5. OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियम और AI का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी

डिजिटल माध्यमों पर उपलब्ध सामग्री और नई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर भी भागवत ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आज लोगों तक हर तरह की जानकारी आसानी से पहुंच रही है, लेकिन सही और गलत में अंतर किए बिना उसका इस्तेमाल नुकसानदेह हो सकता है। उन्होंने OTT प्लेटफॉर्म के लिए नियम तय करने की जरूरत बताई और कहा कि सरकार तथा प्रशासन को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही और जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने पर जोर दिया। तकनीक के बढ़ते प्रभाव के बीच उसके उपयोग को लेकर जागरूकता और जिम्मेदारी जरूरी है।

नागपुर में मोहन भागवत ने की शस्त्र पूजा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी उत्सव में आयोजित किया गया। इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने पारंपरिक विधि से शस्त्र पूजा की। दशहरे पर शस्त्र पूजन करना RSS की पुरानी परंपरा रही है। संघ हर साल इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करता है। इस बार शताब्दी वर्ष के उत्सव के चलते नागपुर में हुए आयोजन पर विशेष ध्यान रहा। कार्यक्रम के जरिए संघ ने अपनी परंपराओं और संगठनात्मक गतिविधियों को सामने रखा।

संघ संस्थापक हेडगेवार को दी श्रद्धांजलि

शस्त्र पूजन से पहले मोहन भागवत ने नागपुर स्थित स्मृति मंदिर में RSS के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। हेडगेवार ने वर्ष 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। संघ के इतिहास में विजयादशमी का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन संगठन की शुरुआत हुई थी। हर साल दशहरे के अवसर पर संघ की ओर से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

विजयादशमी पर पथ संचलन की भी परंपरा

RSS दशहरे के मौके पर देश के अलगअलग हिस्सों में पथ संचलन के कार्यक्रम भी आयोजित करता है। इन कार्यक्रमों में स्वयंसेवक अनुशासित तरीके से एक साथ संचलन करते हैं। संघ इसे अपनी संगठनात्मक परंपरा और सांस्कृतिक गतिविधियों का हिस्सा मानता है। विजयादशमी के अवसर पर होने वाले शस्त्र पूजन और पथ संचलन को संघ की स्थापना से जुड़ी परंपराओं के रूप में देखा जाता है।

1925 में दशहरे के दिन हुई थी RSS की स्थापना

की स्थापना वर्ष 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संघ की स्थापना विजयादशमी के दिन हुई थी, इसलिए यह अवसर संगठन के लिए हर साल खास रहता है। शताब्दी वर्ष के दौरान आयोजित विजयादशमी उत्सव में शस्त्र पूजन और संस्थापक को श्रद्धांजलि देने जैसे कार्यक्रमों के जरिए संघ ने अपनी ऐतिहासिक परंपराओं को याद किया।


 

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संपादकीय टीम

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