इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी का नेटवर्क तेजी से फैलता नजर आ रहा है। साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक फर्म की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि 1200 से ज्यादा डोमेन के जरिये अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म चलाये जा रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ उत्तराखंड के रुद्रपुर में पुलिस ने आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा संचालित करने वाले एक कथित बुकी को गिरफ्तार किया।

डिजिटल इंटेलिजेंस फर्म CloudSEK की रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर अपराधी अब एआई आधारित डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय क्रिकेटरों और लोकप्रिय कंटेंट क्रिएटर्स के चेहरे और आवाज की नकल कर फर्जी प्रमोशनल वीडियो बनाए जा रहे हैं। इन वीडियो को इंस्टाग्राम रील्स और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से फैलाया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को मंचों तक पहुंचाया जा सके।
रिपोर्ट के अनुसार आईपीएल सीजन के दौरान 1200 से अधिक डोमेन अवैध सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का प्रचार करते पाए गए। जांच के दौरान एक एडमिन पैनल तक पहुंचने पर पता चला कि एक ही सिस्टम से 25 से ज्यादा बेटिंग वेबसाइट संचालित की जा रही थीं।
क्लाउडसेक ने यह भी दावा किया कि मई 2025 से मई 2026 के बीच सिर्फ एक प्लेटफॉर्म पर 9300 से ज्यादा यूजर्स के पैसे निकालने के अनुरोध जानबूझकर खारिज किये गये, जिससे करीब 4.65 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई सरकारी वेबसाइटों को हैक कर उनमें अवैध सट्टेबाजी लिंक जोड़ दिये गए ताकि सरकारी वेबसाइट की विश्वसनीयता का फायदा उठाकर लोगों को गुमराह किया जा सके।
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इसी बीच उत्तराखंड के रुद्रपुर में पुलिस ने आईपीएल मैचों पर ऑनलाइन सट्टा लगाने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी दिल्ली का रहने वाला है और सुनसान इलाके में कार में बैठकर ऑनलाइन सट्टेबाजी संचालित कर रहा था।
एसएसपी अजय गणपति ने बताया कि एसओजी और पुलिस टीम को सूचना मिली थी कि सिडकुल आनंदपुर रोड स्थित धर्मकांटे के आगे एक होंडा सिटी कार में बैठकर आईपीएल मुकाबलों पर सट्टा लगाया जा रहा है। सूचना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कार की घेराबंदी की और आरोपी को पकड़ लिया।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम रंजीत सिंह सैनी बताया। रंजीत सिंह सैनी दिल्ली के पालम इलाके का रहने वाला है। पुलिस ने उसके कब्जे से 92 हजार रुपये नकद, पांच मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, कैलकुलेटर और होंडा सिटी कार बरामद की।
पुलिस के मुताबिक लैपटॉप में एक्सेल शीट के जरिये ग्राहकों के नाम, टीमों के रेट, जीत-हार और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड रखा गया था। मोबाइल फोन में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के स्क्रीनशॉट भी मिले हैं। आरोपी के खिलाफ जुआ अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।
जैसे बड़े टूर्नामेंट के दौरान ऑनलाइन सट्टेबाजी और साइबर फ्रॉड के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि डीपफेक तकनीक और फर्जी वेबसाइटों के जरिये लोगों को ठगने के तरीके लगातार अधिक संगठित और खतरनाक होते जा रहे हैं।
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बीसीसीआई के नियमों के अनुसार मेजबान क्रिकेट संघ को हर मैच के लिए लोकल फ्रैंचाइजी से पास मिलते हैं, जो स्टेडियम की क्षमता का लगभग 10 से 15 प्रतिशत होता है। इस आधार पर डीडीसीए को दिल्ली कैपिटल्स से लगभग 6,000 पास मिलते हैं, जिनमें से लगभग 4,000 उसके मेंबर्स को मिलते हैं।





