अयोध्या के राम मंदिर में चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद जहां एक ओर मामले की जांच चल रही है तो वहीं मंदिर में अंदरुनी तौर पर काफी बदलाव किए जा रहे हैं. अहम बदलाव के तहत कल गुरुवार को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव की डिजिटल आईडी निष्क्रिय कर दी ताकि ये लोग VIP पास जारी न कर सकें. अब महंत दिनेंद्र दास के पास VIP पास जारी करने की शक्ति आ गई है.

मंदिर में एंट्री को लेकर VIP पास जारी करने की शक्ति सिर्फ ट्रस्टी महंत दीनेंद्र दास के पास ही रहेगी. दीनेंद्र दास की आईडी को सिस्टम में एक्टिवेट कर दिया गया है. अब इनके कहने पर ही सुगम और विशिष्ट दर्शन पास जारी किए जा सकेंगे. VIP दर्शन पास के लिए ट्रस्टी की शिफारिश जरूरी होती है.
चंपतअनिल की आईडी डीएक्टिवेट
ऐसे में अब ये जिम्मेदारी महंत दीनेंद्र दास को दी गई है. ट्रस्ट से छुट्टी होने के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की आईडी को डीएक्टिवेट कर दिया गया. इन आईडी का इस्तेमाल वीआईपी दर्शन पास जारी करने में कथित अनियमितताओं को रोकने के उपायों के तहत किया गया.
सूत्रों के अनुसार, तीनों लोगों के आईडी बंद करने का फैसला कार्यवाहक महासचिव कृष्ण मोहन की अगुवाई वाले नए मंदिर प्रशासन ने लिया. आईडी बंद होने से अब ये तीनों लोग किसी भी तरह से वीआईपी दर्शन पास जारी नहीं कर सकेंगे.
VIP पास बनाने ने खूब हुई धांधली
मंदिर प्रशासन की ओर से यह कदम राम मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर विशेष जांच दल द्वारा की जा रही जांच के बीच उठाया गया है. सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की जांच में यह बात सामने आई कि ट्रस्टियों और वरिष्ठ पदाधिकारियों की डिजिटल आईडी का बेहिसाब पास बनाने के लिए कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया.
मंदिर से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इन आईडी का इस्तेमाल उनकी सिफारिश पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए वीआईपी दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए किया जाता था. बड़ी संख्या में ऐसे पास बनाने के लिए रैकेट चलाने और कर कथित तौर पर लाखों रुपये कमाने के मामले की जांच हो रही है.
चंपत की जगह पूर्व IFS कृष्ण को कमान
सूत्रों के मुताबिक, जांच में सामने आया कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक टिन्नू यादव ने इस खामी का फायदा उठाकर सैकड़ों अनधिकृत वीआईपी दर्शन पास बनाए. सूत्रों ने बताया कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के कुछ करीबी सहयोगी भी कथित तौर पर वीआईपी पास जारी करने के नाम पर रैकेट चलाने और अवैध रूप से लाखों रुपये कमाने के मामले में जांच की जा रही है.
पिछले महीने जून के पहले हफ्ते में राम मंदिर में दान राशि की गिनती में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया था. इसके बाद विवाद शुरू हो गया. चंदा चोरी के लिए विपक्ष लगातार हमलावर हो गया. बढ़ते दबाव के बीच ट्रस्ट की सिफारिश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया.
पिछले दिनों चंपत राय के ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद भारतीय वन सेवा के पूर्व अधिकारी कृष्ण मोहन को उनकी जगह नियुक्त किया गया. जबकि ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने भी इस्तीफा दे दिया. ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव को उनके पद से हटा दिया गया . हालांकि एफआईआर में इन तीनों में से किसी को भी आरोपी नहीं बनाया गया.