देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक की कमान अब एक ऐसे अनुभवी हाथों में जा रही है, जिन्होंने भारतीय बैंकिंग सिस्टम को सबसे बुरे संकट से उबारने में बड़ी भूमिका निभाई थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को HDFC बैंक का नया पार्टटाइम चेयरमैन नियुक्त करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है. यह जिम्मेदारी 15 जुलाई 2026 से अगले तीन सालों के लिए प्रभावी हो गई है. बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट 1949 की धारा 10B के तहत मिली इस मंजूरी के बाद, अब राजीव कुमार बैंक को एक नई दिशा देंगे.

HDFC बैंक में क्या बदल रहा है
HDFC बैंक ने शेयर बाजार को दी गई जानकारी में स्पष्ट किया है कि रिजर्व बैंक से हरी झंडी मिलने के बाद राजीव कुमार की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी हो गई है. दरअसल, बैंक ने 29 जून को ही इस संभावित बदलाव की जानकारी दे दी थी. अब तक अंतरिम चेयरमैन की कुर्सी संभाल रहे केकी मिस्त्री का कार्यकाल समाप्त हो रहा है. हालांकि, मिस्त्री बैंक के बोर्ड में एक गैरकार्यकारी निदेशक के तौर पर अपना बहुमूल्य योगदान देते रहेंगे. बैंक प्रबंधन ने उनके शानदार मार्गदर्शन के लिए आभार भी जताया है.
संकटमोचक की भूमिका निभा चुके हैं राजीव कुमार
66 वर्षीय राजीव कुमार की पहचान देश में एक सख्त और दूरदर्शी प्रशासक की रही है. 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी कुमार ने साल 2017 से 2020 के बीच देश के वित्तीय सेवा विभाग की कमान संभाली थी. यह वह दौर था जब देश के सरकारी बैंक भारी भरकम एनपीए के बोझ तले टूट रहे थे. ऐसे नाजुक वक्त में उन्होंने सरकार की मशहूर ‘4R रणनीति’ को जमीन पर उतारा. इसी सटीक रणनीति के तहत डूबते कर्जों की पारदर्शी पहचान हुई, दिवालिया कानून से फौरन समाधान निकला और सरकारी बैंकों में 3 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्ड पूंजी डाली गई. इतना ही नहीं, 27 छोटे सरकारी बैंकों का विलय करके उन्हें 12 बड़े और मजबूत बैंकों में तब्दील करने का ऐतिहासिक मास्टरस्ट्रोक भी उन्हीं के नेतृत्व में लिया गया.
आम आदमी के पैसे को बनाया सुरक्षित
एक बैंक ग्राहक के तौर पर आपको यह जानकर तसल्ली होगी कि राजीव कुमार वही शख्स हैं, जिन्होंने बैंकों में जमा आपके खूनपसीने की कमाई की सुरक्षा गारंटी को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करवाया था. जन धन योजना के ढांचे के जरिए बैंकिंग को गांवगांव तक पहुंचाने से लेकर, खुदरा और छोटे उद्योगों तक कर्ज की पहुंच आसान बनाने में उनका सबसे बड़ा योगदान है. टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बैंकों में होने वाले फ्रॉड को पकड़ने के लिए कड़े सिस्टम भी उन्होंने ही बनाए थे.
चुनाव आयोग से लेकर RBI बोर्ड तक का सफर
फरवरी 2020 में फाइनेंस सेक्रेटरी के पद से रिटायर होने के बाद उनका सफर रुका नहीं. उन्होंने 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त के तौर पर देश की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रिया की जिम्मेदारी संभाली. हाल ही में संपन्न हुए 2024 के लोकसभा चुनाव उन्हीं की देखरेख में हुए, जिसमें 31.2 करोड़ महिलाओं सहित कुल 64.2 करोड़ मतदाताओं ने हिस्सा लेकर एक नया रिकॉर्ड बनाया. अपने चार दशक लंबे शानदार करियर में राजीव कुमार ने RBI के केंद्रीय बोर्ड, SBI, नाबार्ड, सार्वजनिक उद्यम चयन बोर्ड और वित्तीय स्थिरता विकास परिषद जैसी दिग्गज संस्थाओं में अपनी सेवाएं दी हैं. अब उनके इसी विशाल अनुभव का सीधा फायदा HDFC बैंक के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बनाने में मिलेगा.