हमारी आंतें लगभग 7 से 9 मीटर लंबी होती हैं। यही वजह है कि पाचन तंत्र शरीर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में गिना जाता है। आंतें सिर्फ खाना पचाने का काम नहीं करतीं, बल्कि शरीर को पोषण देने, विषैले पदार्थ बाहर निकालने और इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने में भी बड़ी भूमिका निभाती हैं। भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र (Hansa Yogendra) के मुताबिक शरीर की करीब 70 फीसदी इम्यूनिटी आंतों से जुड़ी होती है।

योगा एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आंतों में गंदगी, सुस्ती या टॉक्सिन्स जमा होने लगें तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में योग, प्राणायाम और सही खानपान की मदद से 3 दिनों में पाचन तंत्र को बेहतर बनाया जा सकता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डाइट और योग की मदद से कैसे पाचन को दुरुस्त और आंतों की सेहत में सुधार किया जा सकता है।
पहले दिन करें पाचन तंत्र को एक्टिव
पहले दिन का मकसद शरीर को अंदर से सक्रिय करना होता है। सुबह उठकर जीभ की जड़ की सफाई यानी जिव्हा मूल शोधन करने की सलाह दी जाती है। इससे पाचन अंग सक्रिय होते हैं और वेगस नर्व उत्तेजित होती है, जो दिमाग और आंतों के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करती है। इसके बाद अग्निसार क्रिया की जाती है, जिसमें पेट को तेजी से अंदर-बाहर किया जाता है। यह अभ्यास पाचन अग्नि को मजबूत करता है और कब्ज की समस्या में राहत देने में मददगार माना जाता है।
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कौन से योगासन हैं फायदेमंद?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक आंतों को साफ रखने के लिए ऐसे आसन फायदेमंद माने जाते हैं जिनमें पेट पर हल्का दबाव और ट्विस्ट आता हो। अर्धमत्स्येन्द्रासन, पवनमुक्तासन और पश्चिमोत्तानासन ये ऐसे आसन है जो आंतों की हल्की मसाज करते हैं और पाचन तंत्र में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाने में मदद करते हैं।
भस्त्रिका प्राणायाम से बढ़ती है डाइजेशन की ताकत
शाम के समय खाली पेट भस्त्रिका प्राणायाम करने की सलाह दी जाती है। इसमें गहरी और तेज सांस ली और छोड़ी जाती है। इससे शरीर की सुस्ती कम होती है और मेटाबॉलिज्म बेहतर तरीके से काम करता है।
पहले दिन क्या खाएं?
पहले दिन हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लेना चाहिए। खाने में मूंग दाल खिचड़ी, उबली सब्जियां, गाजर, खीरा और हरी सब्जियों का सेवन करें। वहीं तला-भुना, ज्यादा मीठा और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
दूसरे दिन बढ़ाएं फाइबर
दूसरे दिन शरीर डिटॉक्स प्रक्रिया के लिए ज्यादा तैयार हो जाता है। ऐसे में योग अभ्यास को थोड़ा बढ़ाया जा सकता है।
पवनमुक्तासन करें
पवनमुक्तासन में घुटनों को छाती की तरफ लाने से गैस और पेट फूलने की समस्या में राहत मिल सकती है।
दूसरे दिन डाइट में शामिल करें ये चीजें
दूसरे दिन की डाइट में आप पपीता, सलाद, साबुत अनाज और पपीता का सेवन करें। पर्याप्त पानी पिएं बॉडी को डिटॉक्स करने के लिए जरूरी है। पपीते में मौजूद फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है। पपीते में मौजूद एंजाइम पाचन बेहतर करने में मदद करते हैं। वहीं ज्यादा फाइबर लेने के दौरान पानी पर्याप्त मात्रा में पीना जरूरी माना जाता है।
तीसरे दिन शरीर महसूस करता है हल्कापन
तीसरे दिन तक शरीर में हल्कापन और ऊर्जा महसूस होने लगती है। इस दिन जोर लगाने की बजाय आराम से योग और गहरी सांस लेने पर ध्यान देना चाहिए।
डायाफ्रामेटिक ब्रीदिंग क्यों है जरूरी?
गहरी सांस लेने से डायफ्राम ऊपर-नीचे होता है, जिससे आंतों की हल्की मसाज होती है। इससे ब्लड फ्लो और लिंफेटिक ड्रेनेज बेहतर होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक तनाव की स्थिति में पाचन तंत्र धीमा पड़ जाता है, इसलिए रिलैक्स रहना भी जरूरी है।
रोजाना अपनानी चाहिए ये आदतें
- अगर आप बॉडी को डिटॉक्स करना चाहते हैं और बॉडी को हेल्दी रखना चाहते हैं तो आप डाइट में पर्याप्त फाइबर लें
- खूब पानी पिएं। पानी का अधिक सेवन किडनी को बेहतर काम करने में मदद करता है और बॉडी डिटॉक्स होती है।
- रोज शरीर को एक्टिव रखें। बॉडी को एक्टिव रखने के लिए योग,वॉक और एक्सरसाइज करें।
- तनाव कम करें। एक्सपर्ट्स का कहना है कि आंतों की सफाई कोई एक दिन का काम नहीं, बल्कि रोजाना की अच्छी आदतों का हिस्सा होना चाहिए।
किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति गर्भवती है या उसे हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया, अल्सर या गंभीर पाचन संबंधी बीमारी है, तो कुछ योग क्रियाएं करने से पहले डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता, योग और आयुर्वेद के पारंपरिक सिद्धांतों और योग गुरु हंसाजी के सार्वजनिक तौर पर साझा किए गए विचारों पर आधारित है। इसे किसी भी तरह की योग्य चिकित्सा सलाह, निदान (Diagnosis) या पेशेवर इलाज का विकल्प न माना जाए। आंतों से जुड़ी किसी भी गंभीर समस्या, संक्रमण, पेट के पुराने दर्द या किसी भी नए घरेलू उपाय को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने से पहले किसी डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।





