शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 ब्रेकिंग
ग्रेटर नोएडा में RTE प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल, स्कूल सत्यापन में मिला फर्जी राशन कार्ड, जानें पूरा मामला​ | Harmanpreet Kaur ने Lord’s के मैदान पर रच डाला इतिहास, दुनिया के सिर्फ तीन ही क्रिकेटर्स कर पाए थे ये कारनामा​ | Ghaziabad Crime News: पत्नी को लेने आया था दामाद, ससुर ने रोका तो कर दी हत्या; 5 बार चाकू से किया वार​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

SCSS या POMIS? रिटायरमेंट के बाद किस स्कीम से होगी ज्यादा कमाई, जानिए पूरा हिसाब​

रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनाए रखना हर वरिष्ठ नागरिक की सबसे बड़ी वित्तीय जरूरत होती है. ऐसे में सरकार समर्थित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न का विकल्प प्रदान करती हैं. इनमें पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम और सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम सबसे लोकप्रिय योजनाओं में शामिल हैं. हालांकि निवेश से पहले […]

रिटायरमेंट के बाद नियमित आय बनाए रखना हर वरिष्ठ नागरिक की सबसे बड़ी वित्तीय जरूरत होती है. ऐसे में सरकार समर्थित स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सुरक्षित निवेश और तय रिटर्न का विकल्प प्रदान करती हैं. इनमें पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम और सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम सबसे लोकप्रिय योजनाओं में शामिल हैं. हालांकि निवेश से पहले दोनों योजनाओं के रिटर्न, टैक्स लाभ और निकासी नियमों को समझना जरूरी है.

POMIS और SCSS में कितना कर सकते हैं निवेश?

पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम में न्यूनतम 1,000 रुपये से खाता खोला जा सकता है. इसमें एकल खाते में अधिकतम 9 लाख रुपये और संयुक्त खाते में 15 लाख रुपये तक निवेश की अनुमति है.

वहीं सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम में भी न्यूनतम निवेश 1,000 रुपये है, लेकिन एक व्यक्ति कुल मिलाकर 30 लाख रुपये तक निवेश कर सकता है. यह योजना विशेष रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों के लिए बनाई गई है. कुछ शर्तों के साथ 55 से 60 वर्ष के बीच के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी इसमें निवेश कर सकते हैं.

किस योजना में मिलता है ज्यादा ब्याज?

फिलहाल POMIS पर 7.4% सालाना ब्याज दिया जा रहा है, जबकि SCSS में 8.2% सालाना ब्याज मिलता है. दोनों योजनाओं की मैच्योरिटी अवधि 5 वर्ष है, लेकिन ब्याज भुगतान का तरीका अलग है.

POMIS में ब्याज हर महीने निवेशक के खाते में जमा किया जाता है. दूसरी ओर SCSS में ब्याज का भुगतान हर तिमाही किया जाता है. अधिक ब्याज दर के कारण SCSS निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने में सक्षम है.

यदि कोई निवेशक POMIS के संयुक्त खाते में अधिकतम 15 लाख रुपये जमा करता है, तो उसे सालाना करीब 1.11 लाख रुपये यानी लगभग 9,250 रुपये प्रति माह ब्याज मिलेगा. वहीं SCSS में 30 लाख रुपये के निवेश पर सालाना करीब 2.46 लाख रुपये यानी लगभग 20,500 रुपये प्रति माह के बराबर आय प्राप्त हो सकती है.

टैक्स के मोर्चे पर कौन आगे?

POMIS में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स योग्य है और निवेश पर किसी प्रकार की टैक्स छूट नहीं मिलती. इसके विपरीत SCSS में निवेश करने पर आयकर अधिनियम के तहत 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ लिया जा सकता है. हालांकि इस योजना से मिलने वाला ब्याज भी कर योग्य होता है.

समय से पहले निकासी के नियम

दोनों योजनाओं में समय से पहले पैसा निकालने की सुविधा है, लेकिन इसके लिए कुछ जुर्माना देना पड़ता है. POMIS में एक साल से पहले खाता बंद नहीं किया जा सकता, जबकि SCSS में एक साल के भीतर खाता बंद करने पर ब्याज का लाभ नहीं मिलता.

क्या है बेहतर विकल्प?

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक ब्याज दर, बड़ी निवेश सीमा और टैक्स लाभ के कारण SCSS रिटायर लोगों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. वहीं POMIS उन निवेशकों के लिए उपयोगी है, जो हर महीने निश्चित आय प्राप्त करना चाहते हैं. वित्तीय जरूरतों के अनुसार दोनों योजनाओं का संतुलित उपयोग भी किया जा सकता है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY