Former Chief Election Commissioner OP Rawat Statement: भोपाल में चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और प्रक्रिया को लेकर पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत ने बंसल न्यूज से खास बातचीत की।

उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयुक्तों के पास निर्णय लेने की पूरी क्षमता होती है, लेकिन किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता और स्पष्टता बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बंगाल और बिहार में एसआईआर में नाम कटने पर लाखों आपत्तियां आईं। मैं भी कई स्थानों पर गया था, जहां मतदाताओं ने आपत्ति दर्ज कराईं। कुछ जगह बीएलओ कैम्प लगाकर फ्राम भरवा रहे हैं।
कुछ स्थानों पर 2 प्रतिशत तो कुछ स्थानों पर 27 फीसदी मतदाताओं के नाम कटे हैं। ऐसे में जिस पारदर्शिता से SIR में काम होना चाहिए हुआ नहीं है।
फार्म 6 पर सहमति नहीं थी तो आपत्ति लेना चाहिए थी
दोनों निर्वाचन आयुक्त निर्णय लेने में सक्षम हैं। यदि फार्म 6 को लेकर सहमति नहीं थी तो उसी समय आपको आपत्ति लेते हुए बदलाव होल्ड करना था।
नए मतदाता का नाम जोड़ने और पुराने के लिए एक ही फॉर्म कैसे हो सकता है। यही बदलाव विवाद का कारण बना है।
सरकार और कैबिनेट सचिव को पत्र लिखना उचित नहीं
आप संवैधानिक पद पर हैं, ऐसे में आपका सरकार को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज करना उचित नहीं है। कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर आपति दर्ज कराना भी सवाल उठाता है।