हफ्ते के पहले कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट की नजरें देश के सबसे बड़े निजी बैंक, एचडीएफसी बैंक पर टिकी रहेंगी. हाल ही में बैंक ने वित्त वर्ष 202627 की पहली तिमाही के कारोबारी आंकड़े जारी किए. बीते कुछ महीनों में बैंक के अंदर मचे घमासान और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं के कारण निवेशकों के मन में कई सवाल थे. लेकिन, इन आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि बैंक का बुनियादी ढांचा अब भी बेहद मजबूत है. डिपॉजिट से लेकर कर्ज बांटने तक में बैंक ने बंपर उछाल दर्ज किया है. ऐसे में सोमवार को जब बाजार खुलेगा, तो इस शेयर में भारी हलचल देखने को मिल सकती है.

आंकड़ों में दिखा दम, कर्ज बांटने की रफ्तार तेज
कारोबारी दुनिया में किसी भी बैंक की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह कितनी तेजी से और कितना सुरक्षित कर्ज बांट रहा है. एचडीएफसी बैंक के नए आंकड़े इसी मोर्चे पर बड़ी राहत लेकर आए हैं. बैंक के ग्रॉस एडवांस में पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15.4 फीसदी का शानदार इजाफा हुआ है. यह आंकड़ा 26.53 लाख करोड़ रुपये से छलांग लगाकर 30.61 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. वहीं, 30 जून 2026 तक बैंक के मैनेजमेंट के तहत कुल एडवांस लगभग 31.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया है. पिछले साल के 27.82 लाख करोड़ रुपये की तुलना में यह करीब 12.4 फीसदी ज्यादा है. एक आम निवेशक के नजरिए से देखें तो इसका सीधा मतलब है कि बैंक का मुख्य कारोबार तेजी से आगे बढ़ रहा है और बाजार में उसकी पकड़ जस की तस बनी हुई है.
शेयर बाजार में लौट रहा निवेशकों का खोया हुआ भरोसा
बीते कुछ महीने एचडीएफसी बैंक के शेयरधारकों के लिए काफी तनावपूर्ण रहे हैं. साल 2026 की शुरुआत से ही इस दिग्गज शेयर ने निवेशकों को निराश किया और इसमें 19 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखने को मिली. हालांकि, अब हालात धीरेधीरे बदलते हुए नजर आ रहे हैं. पिछले एक महीने के प्रदर्शन पर गौर करें तो इस शेयर में 6 फीसदी से ज्यादा की रिकवरी आ चुकी है. यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि निचले स्तरों पर खरीदार वापस लौट रहे हैं और निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल हो रहा है. शुक्रवार को भी यह शेयर 0.6 फीसदी की मामूली बढ़त के साथ 801.05 रुपये के स्तर पर बंद हुआ था. 12.34 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के मार्केट कैप के साथ, यह आज भी शेयर बाजार का एक बेहद अहम खिलाड़ी बना हुआ है.
विवादों का साया छंटा, नए मैनेजमेंट से जगी उम्मीद
इस साल बैंक की चर्चा सिर्फ उसके वित्तीय आंकड़ों की वजह से नहीं, बल्कि अंदरूनी उथलपुथल के कारण ज्यादा हुई. मार्च महीने में तब हड़कंप मच गया था जब पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया. उन्होंने अपने इस्तीफे में स्पष्ट रूप से कहा था कि बैंक की कुछ कार्यप्रणालियां उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिकता से मेल नहीं खाती हैं. इस एक बयान ने बाजार में खलबली मचा दी थी और बैंक के शेयरों में जमकर बिकवाली हुई.
लेकिन, अब बैंक ने अपनी साख को बचाने और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं. पूर्व आईएएस अधिकारी और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को बैंक का नया पार्टटाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है, जिससे गवर्नेंस को लेकर सकारात्मक संदेश गया है. इसके साथ ही, कंप्लायंस और कानूनी मामलों को दुरुस्त करने के लिए केकेआर जैसी नामी फर्म में काम कर चुके जिगर शाह को जनरल काउंसल की जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, पुनीत शर्मा को अगला सीएफओ चुना गया है. वह सितंबर से अपना काम शुरू करेंगे और दिसंबर तक पूर्ण रूप से यह अहम जिम्मेदारी संभाल लेंगे.
Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.




