शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 ब्रेकिंग
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक का जलवा! SBI का मुनाफा 21000 करोड़ के पार​ | #TheTraitors2 का ट्रेलर रिलीज, Karan Johar के रियलिटी शो में दिखेगा सस्पेंस और धोखा​ | तुर्की, पाकिस्तान, सऊदी अरब… किसके कितने दुश्मन? रक्षा समझौते के लिए इस्लामिक NATO का मंच तैयार​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

Diabetes Tips: इंसुलिन रेजिस्टेंस कैसे बनता है कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम के लिए खतरा? एक्सपर्ट से जानें​

जब लोग इंसुलिन रेजिस्टेंस का नाम सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि इसका मतलब सिर्फ डायबिटीज है. लेकिन सच ये है कि इसका असर डायबिटीज होने से पहले ही दिल और खून की नसों पर पड़ना शुरू हो सकता है. आसान भाषा में समझें तो इंसुलिन एक हार्मोन है, जो खून में मौजूद शुगर […]

जब लोग इंसुलिन रेजिस्टेंस का नाम सुनते हैं, तो उन्हें लगता है कि इसका मतलब सिर्फ डायबिटीज है. लेकिन सच ये है कि इसका असर डायबिटीज होने से पहले ही दिल और खून की नसों पर पड़ना शुरू हो सकता है. आसान भाषा में समझें तो इंसुलिन एक हार्मोन है, जो खून में मौजूद शुगर को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाता है, ताकि उससे शरीर को एनर्जी मिल सके.

लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन की बात ठीक से नहीं मानतीं. ऐसे में पैंक्रियास, ज्यादा इंसुलिन बनाना शुरू कर देता है. जब लंबे समय तक शरीर में इंसुलिन का स्तर ज्यादा बना रहता है, तो इसका असर धीरे धीरे दिल और खून की नसों पर भी पड़ने लगता है.

हाई ब्लड प्रेशर का खतरा

डॉक्टर प्रिया कंसलटेंट, एंड्रोक्रिनोलॉजी का कहना है कि सबसे पहले खून की नसों की अंदरूनी परत ठीक से काम नहीं करती. नसें पहले जितनी लचीली नहीं रहतीं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ सकता है. इसके साथ ही इंसुलिन रेजिस्टेंस में ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने लगते हैं और अच्छा कोलेस्ट्रॉल यानी HDL कम होने लगता है. शरीर में हल्की हल्की सूजन भी बनी रहती है और ऐसे हानिकारक तत्व बनने लगते हैं, जो खून की नसों को नुकसान पहुंचाते हैं.

समय के साथ इन नसों में चर्बी जमने लगती है. इससे नसें संकरी और सख्त हो जाती हैं, जिससे दिल और दिमाग तक खून का बहाव कम हो सकता है. यही वजह है कि आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल से जुड़ी दूसरी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

इसे कैसे किया जा सकता है ठीक?

अच्छी बात ये है कि अगर इंसुलिन रेजिस्टेंस का समय रहते पता चल जाए, तो इसे काफी हद तक ठीक किया जा सकता है. नियमित एक्सरसाइज, वजन को कंट्रोल में रखना और संतुलित खाना खाना, ये तीन चीजें आपके ब्लड शुगर के साथ साथ दिल को भी लंबे समय तक स्वस्थ रखने में मदद करती हैं.

बैलेंस डाइट में हरी सब्जियां, सीजन फल और फाइबर वाली चीजें खानी चाहिए. फाइबर के लिए ओट्स जैसी चीजें खाई जा सकती हैं. इससे आपका वजन कंट्रोल में रहता है और आप ओवरईटिंग से भी बच पाते हैं.

दिल के मरीज हैं तो एक्सपर्ट की सलाह पर अपनी फिजिकल एक्टिविटी को फॉलो करें. वैसे हर किसी को रोजाना कम से कम 30 मिनट की सैर जरूर करनी चाहिए.

सबसे जरूरी है कि बॉडी में बैड कोलेस्ट्रॉल के लेवल को न बढ़ने दें. नसों में कोलेस्ट्रॉल के जमने से ब्लड फ्लो बिगड़ता है और हार्ट अटैक के आसार बन जाते हैं.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY