अगर आपने लोन पर मोबाइल फोन खरीदा है और उसकी ईएमआई नहीं चुकाई है तो कंपनियां आपके मोबाइल फोन को लॉक कर सकती हैं. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने लोन देने वालों को यह इजाजत दी है कि अगर उधार लेने वाले लोन नहीं चुकाते , तो वे EMI से खरीदे गए मोबाइल फोन, टैबलेट और लैपटॉप के फंक्शन को धीरेधीरे सीमित कर सकते हैं. RBI ने बदले हुए नियमों को लागू करने की तारीख भी 1 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 कर दी है.

आरबीआई के नए नियम
नए नियमों के तहत, लोन देने वाले तब तक डिवाइस पर कोई पाबंदी नहीं लगा सकते जब तक कि लोन की पेमेंट में कम से कम 30 दिन की देरी न हो जाए और उधार लेने वाले को औपचारिक नोटिस न भेजा गया हो. पेमेंट में 30 से 60 दिन की देरी होने पर, लोन देने वाले धीरेधीरे पाबंदियां लगा सकते हैं, लेकिन इस दौरान आउटगोइंग कॉल ब्लॉक नहीं की जा सकतीं. लोन एग्रीमेंट के तहत पूरी पाबंदियां तभी लगाई जा सकती हैं जब लोन की पेमेंट में 60 दिन से ज़्यादा की देरी हो जाए.
पहले नियमों से अलग
ये फाइनल नियम पहले के प्रस्ताव की तुलना में काफी राहत देने वाले हैं. पहले के प्रस्ताव में 90 दिनों तक पेमेंट ना होने डिवाइस को डिसेबल करने का अधिकार था. हालांकि, RBI ने उधार लेने वालों की सुरक्षा के लिए नियम बनाए हैं. उधार देने वाले इनकमिंग कॉल, SMS या इमरजेंसी SOS फ़ंक्शन को ब्लॉक नहीं कर सकते हैं, और इन पाबंदियों की वजह से उधार लेने वाले अपने डिवाइस का इस्तेमाल काम या रोजगार से जुड़े कामों के लिए करने से नहीं रुकने चाहिए.
देना होगा मुआवजा
ऐसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने वाले उधार देने वालों और थर्डपार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स को डिवाइस बनाने वाली मूल कंपनी या ऑपरेटिंग सिस्टम प्लेटफॉर्म से सर्टिफ़िकेशन लेना होगा, जहां यह सुविधा उपलब्ध हो. उन्हें डिवाइस में सेव पर्सनल जानकारी, जैसे कॉन्टैक्ट्स, SMS, कॉल लॉग, फ़ोटो और लोकेशन हिस्ट्री को एक्सेस करने की भी मनाही है. आरबीआई के नए नियमों के अनुसार बकाया रकम चुकाने के बाद, एक घंटे के अंदर पाबंदियां हटा दी जाएंगी. अगर किसी उधार लेने वाले पर गलत तरीके से पाबंदियां लगाई जाती हैं या लेंडर की वजह से डिवाइस को फिर से चालू करने में देरी होती है, तो लेंडर को हर घंटे 250 रुपए का मुआवजा देना होगा. यह मुआवजा दिए गए लोन की रकम से ज्यादा नहीं हो सकता.