: दिल्ली हाई कोर्ट ने अंतरिम भरणपोषण से जुड़े एक मामले में फैमिली कोर्ट के आदेश में बदलाव किया है। कोर्ट ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत जिस अवधि में पत्नी नौकरी कर रही थी और आय अर्जित कर रही थी, उस अवधि के लिए पति को भरणपोषण देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। अंतरिम भरणपोषण की राशि उस अवधि से लागू होगी, जब पत्नी बेरोजगार हुई।

फैमिली कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
मामले में फैमिली कोर्ट ने पति को 8 जनवरी 2021 से तलाक की कार्यवाही पूरी होने तक हर महीने 5 हजार रुपये अंतरिम भरणपोषण देने का आदेश दिया था। पति ने इस आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पत्नी की नौकरी और आय से जुड़े तथ्यों पर विचार किया और पहले दिए गए आदेश में संशोधन कर दिया। इसके बाद अंतरिम भरणपोषण की अवधि में बदलाव किया गया।
बाटा शोरूम में करती थी नौकरी
मामले के अनुसार पत्नी ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया था कि वह बाटा शोरूम में सेल्स हेल्पर के तौर पर काम करती थी। वह शनिवार और रविवार को काम करती थी और उसे करीब 7 हजार रुपये प्रति माह मिलते थे। पत्नी के अनुसार जून 2024 में उसकी नौकरी समाप्त हो गई। शोरूम मालिक को अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत नहीं होने के कारण उसे नौकरी से हटाया गया था। इस तथ्य को कोर्ट ने मामले में ध्यान में रखा।
जनवरी 2021 से जून 2024 तक राशि नहीं
दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि 8 जनवरी 2021 से जून 2024 तक पत्नी नौकरी कर रही थी और आय अर्जित कर रही थी। इसलिए इस अवधि के लिए अंतरिम भरणपोषण देने का आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश में इसी हिस्से में संशोधन किया। मामला हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत अंतरिम भरणपोषण से जुड़ा था।
1 जुलाई 2024 से मिलेगा ₹5 हजार
संशोधित आदेश के अनुसार पत्नी को 1 जुलाई 2024 से हर महीने 5 हजार रुपये अंतरिम भरणपोषण के तौर पर मिलेगा। यानी 8 जनवरी 2021 से जून 2024 तक की नौकरी वाली अवधि के लिए यह राशि लागू नहीं होगी। कोर्ट का फैसला इस मामले में पत्नी की रोजगार स्थिति और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आया है। इस आदेश के बाद फैमिली कोर्ट के पुराने निर्देश में भरणपोषण की अवधि को संशोधित किया गया है।