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Daadi Ki Shaadi Review: नीतू कपूर और कपिल शर्मा का कमाल का काम, जानें कैसी है फिल्म

इन दिनों सिनेमाघरों में एक्शन-थ्रिलर फिल्मों का जलवा है। कुछ लोग उन्हें पसंद कर रहे हैं, तो कुछ ऐसी फिल्में चाहते हैं, जिन्हें परिवार के साथ देखा जा सके। जिसमें हल्की-फुल्की कॉमेडी हो, प्यार हो और अच्छा मैसेज देती हो। ऐसे में अगर आप भी इस तरह की किसी फिल्म का इंतजार कर रहे थे, तो ‘दादी की शादी’ एक बेहतरीन ऑप्शन है।

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Daadi Ki Shaadi Review: नीतू कपूर और कपिल शर्मा का कमाल का काम, जानें कैसी है फिल्म
Daadi Ki Shaadi Review: नीतू कपूर और कपिल शर्मा का कमाल का काम, जानें कैसी है फिल्म

नीतू कपूर, कपिल शर्मा, सादिया खतीब और आर सरथ कुमार स्टारर यह फिल्म इन सभी चीजों पर खरी उतरती है। खास बात ये है कि इस मूवी से नीतू कपूर की बेटी और रणबीर की बहन रिद्धिमा ने भी अपना डेब्यू किया है। चलिए आपको बताते हैं कैसी है ये मूवी।

क्या है ‘दादी की शादी’ की कहानी

फिल्म की कहानी शुरू होती है टोनी कालरा (कपिल शर्मा) की शादी के लिए लड़की ढूंढने को लेकर… जहां शादी के रिश्ते करवाने वाली एक महिला उनके लिए कई रिश्ते लेकर आती है, लेकिन कुछ लड़कियां जॉइंट फैमिली में नहीं रहना चाहती, तो कुछ को टोनी मना कर देता है और कुछ टोनी को मना कर देती हैं। इसके बाद वह टोनी के दादा (योगराज सिंह) को एक लड़की तनु (सादिया खतीब) के बारे में बताती है जिसकी शर्त है कि वह जॉइंट फैमिली में रह लेगी, लेकिन शादी दो साल बाद करेगी।

सब मान जाते हैं और रोका तय कर देते हैं। हालांकि, रोका होने से पहले ही टूट जाता है, क्योंकि तनु की दादी (नीतू कपूर) शादी करने वाली है ये खबर सामने आ जाती है। इसके बाद तनु के माता-पिता, चाचा-चाची और टोनी के साथ अपनी मां से इस बारे में बात करने के लिए शिमला पहुंचते हैं। फिर शुरू होता है फैमिली ड्रामा।

निर्देशक आशीष आर मोहन ने कहानी को बहुत सिंपल रखा है, एक ऐसी दादी जिसकी शादी की खबर पूरे परिवार के लिए इमोशनल रोलर-कोस्टर बन जाता है। सुनने में यह प्लॉट थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन फिल्म इसे बड़े दिल से पेश करती है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबी है। वैसे बहुत ज्यादा बिना बताए आपको इतना बता सकते हैं कि दादी शादी नहीं कर रही होती हैं, लेकिन फिर क्यों वो अपने परिवार से झूठ कहती हैं। इसके लिए आपको फिल्म देखना चाहिए।

कैसा है स्टार्स का अभिनय

नीतू कपूर स्क्रीन पर आते ही फिल्म में एक अलग चमक ले आती हैं। उनका किरदार मजाकिया भी है, भावुक भी और बेहद प्यारा भी। कई जगहों पर बिना ज्यादा डायलॉग बोले सिर्फ उनकी आंखें बहुत कुछ कह जाती हैं। वहीं कपिल शर्मा यहां अपने टीवी वाले अंदाज से थोड़ा अलग नजर आते हैं। उनकी कॉमेडी इस बार पंचलाइन से ज्यादा सिचुएशन से निकलती है, जो फिल्म को नेचुरल फील देती है। आर सरथ कुमार का स्वैग कमाल है और खूब जमता है। वहीं सादिया खतीब का चार्म भी देखते ही बनता है। रिद्धिमा कपूर का काम बेहतर हो सकता था, जबकि योगराज सिंह का स्क्रीन प्रेजेंस तगड़ा है।

कहां रह गई फिल्म में कमी

फिल्म का सबसे अच्छा हिस्सा यह है कि यह फैमिली ड्रामा को ओवरड्रामैटिक नहीं बनाती। यहां रिश्ते असली लगते हैं, घर असली लगता है और लोगों की परेशानियां भी हमारी-आपकी जिंदगी जैसी महसूस होती हैं। हालांकि, कुछ सीन्स जरूरत से ज्यादा लंबे लगते हैं और कहानी बीच में थोड़ी भटकती भी है, लेकिन फिल्म अपनी सच्चाई और हल्केपन से फिर वापस ट्रैक पर आ जाती है।

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