Cyclone Names:समुद्र में जब तेज तूफान उठता है, तो मौसम विभाग उसे एक खास नाम देता है। आपने मुरासु और अर्नब जैसे नाम जरूर सुने होंगे। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन नामों को कौन तय करता है? क्या भारत अपनी मर्जी से किसी भी तूफान का नाम रख सकता है? दरअसल, तूफानों के नाम रखने के लिए पहले से नियम बने हुए हैं। भारत समेत 13 देश मिलकर नामों की सूची तैयार करते हैं।

तूफानों के नाम कौन रखता है?
भारत के आसपास बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में आने वाले चक्रवातों के नाम रखने के लिए एक तय व्यवस्था है। भारत मौसम विज्ञान विभाग इस क्षेत्र में चक्रवातों की निगरानी करता है और उन्हें नाम देता है। इसके लिए 13 देशों ने पहले से नामों की सूची तैयार की है। जब कोई तूफान नाम देने के तय मानकों पर पहुंचता है, तो सूची में अगला नाम इस्तेमाल किया जाता है।
मुरासु नाम किस देश ने दिया?
मुरासु नाम भारत ने दिया है। यह तमिल भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ एक तरह का ढोल या नगाड़ा होता है। भारत ने यह नाम पहले से तैयार सूची में दिया था। इसका मतलब यह है कि तूफान आने के बाद नाम नहीं सोचा जाता, बल्कि पहले से तय सूची के अनुसार नाम रखा जाता है।
अर्नब नाम किसने रखा था?
अर्नब नाम बांग्लादेश ने दिया था। मुरासु और अर्नब दोनों नाम चक्रवातों के लिए बनाई गई सूची का हिस्सा हैं। अलगअलग देशों की ओर से दिए गए नाम एक तय क्रम में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए हर नए तूफान के लिए मौसम विभाग को अलग से नाम सोचने की जरूरत नहीं पड़ती।
किन 13 देशों के नाम होते हैं शामिल?
चक्रवातों के नाम तय करने वाली सूची में भारत के अलावा बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात और यमन शामिल हैं। इन सभी देशों ने नामों की सूची दी है। इस तरह कुल 13 देश मिलकर नाम तय करने की प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं।
तूफानों के नाम रखने के क्या नियम हैं?
तूफानों के नाम छोटे और आसानी से बोले जाने वाले होने चाहिए। नाम ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे किसी देश या समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचे। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाले चक्रवात को नाम तब दिया जाता है, जब उसकी हवा की रफ्तार तय सीमा तक पहुंच जाती है। एक बार इस्तेमाल किया गया नाम दोबारा इस्तेमाल नहीं दिया जाता। इससे मौसम विभाग की चेतावनी समझने और लोगों तक जानकारी पहुंचाने में आसानी होती है। तूफानों के नाम रखने का काम किसी एक देश की मर्जी से नहीं होता। भारत समेत 13 देश मिलकर नामों की सूची बनाते हैं। भारत ने मुरासु और बांग्लादेश ने अर्नब नाम दिया था। इन नामों का इस्तेमाल तय नियमों और क्रम के अनुसार किया जाता है।