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Car Insurance Claim: आपकी इन छोटी गलतियों से खारिज हो जाता है दावा, नहीं मिलता क्लेम का एक भी पैसा​

Insurance Claim: गाड़ी का एक्सीडेंट होना किसी भी कार मालिक के लिए एक बड़ा झटका होता है. गाड़ी के नुकसान का दुख तो होता ही है, लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब बीमा कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर देती है. ज्यादातर लोग ये मान लेते हैं कि कंपनियां पैसा बचाने के लिए जानबूझकर […]

Insurance Claim: गाड़ी का एक्सीडेंट होना किसी भी कार मालिक के लिए एक बड़ा झटका होता है. गाड़ी के नुकसान का दुख तो होता ही है, लेकिन असली परेशानी तब शुरू होती है जब बीमा कंपनी आपका क्लेम रिजेक्ट कर देती है. ज्यादातर लोग ये मान लेते हैं कि कंपनियां पैसा बचाने के लिए जानबूझकर ऐसा करती हैं. हकीकत में ऐसा नहीं है. कई बार पॉलिसीधारक की अपनी लापरवाही ही क्लेम खारिज होने का कारण बनती है. आज हम उन्हीं गलतियों के बारे में बात करेंगे, जिनसे आपका बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.

नशे में ड्राइविंग है सबसे बड़ा कारण

भारत में शराब पीकर गाड़ी चलाना कानूनन अपराध है. अगर एक्सीडेंट के वक्त ड्राइवर नशे में पाया जाता है, तो मोटर बीमा कंपनियां कोई राहत नहीं देतीं. ऐसे मामलों में कंपनी बिना किसी दूसरी वजह के सीधे आपका क्लेम खारिज कर देती है. भले ही गाड़ी का कितना भी बड़ा नुकसान क्यों न हुआ हो, आपको अपनी जेब से ही पूरा खर्च उठाना पड़ेगा.

लाइसेंस से जुड़ी छोटी लापरवाही

भारत में क्लेम खारिज होने की एक बहुत आम वजह सही ड्राइविंग लाइसेंस का न होना है. कई बार लोग टूव्हीलर के लाइसेंस पर कार चलाते हुए हादसे का शिकार हो जाते हैं. ऐसे में क्लेम पास नहीं होता. इसी तरह अगर आपका लाइसेंस एक्सपायर हो चुका है, तो भी बीमा कंपनी दावा खारिज कर सकती है. गाड़ी चलाते समय हमेशा वैध लाइसेंस साथ रखना जरूरी है.

समय पर जानकारी देना बेहद जरूरी

हर बीमा पॉलिसी में कंपनी को नुकसान की सूचना देने के लिए एक समय सीमा तय होती है. अगर आप उस तय समय के बाद क्लेम की सूचना देते हैं, तो कंपनी इसे लेट इंटिमेशन मानकर खारिज कर सकती है. एक्सपर्ट्स हमेशा यही सलाह देते हैं कि हादसे के तुरंत बाद बीमा कंपनी को इसकी जानकारी दे देनी चाहिए. देरी करने पर आपकी ही परेशानी बढ़ती है.

निजी कार का कमर्शियल इस्तेमाल

लोग अक्सर पर्सनल इस्तेमाल के लिए बीमा कराते हैं, लेकिन गाड़ी का इस्तेमाल कैब या डिलीवरी जैसे कमर्शियल कामों में करने लगते हैं. कमर्शियल काम के लिए अलग तरह की पॉलिसी बनती है. ऐसे में अगर आपकी पर्सनल गाड़ी का एक्सीडेंट कमर्शियल काम के दौरान होता है, तो क्लेम रिजेक्ट हो जाएगा. इसके अलावा अगर पॉलिसी खत्म हो चुकी है, या आपने कंपनी को बताए बिना गाड़ी के इंजन या बॉडी में कोई बड़ा बदलाव किया है, तो भी क्लेम नहीं मिलेगा. ऐसा करने से गाड़ी का मूल स्वरूप बदल जाता है.

रिजेक्ट होने पर क्या है विकल्प

अगर आपको लगता है कि कंपनी ने गलत तरीके से आपका दावा खारिज किया है, तो आपके पास रास्ते मौजूद हैं. आप सबसे पहले बीमा कंपनी के इंटरनल ग्रीवांस सेल में अपनी अपील कर सकते हैं. अगर वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो आप सीधे इरडा यानी इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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