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UPI चार्ज के फैसले के पीछे कोई विदेशी प्रभाव नहीं… विपक्ष के आरोपों पर बोली सरकार​

UPI से जुड़े विदेशी दबाव के आरोपों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के फैसले के पीछे किसी विदेशी देश का दबाव नहीं है. भारत UPI से जुड़े फैसले खुद लेता है और […]

UPI से जुड़े विदेशी दबाव के आरोपों पर केंद्र सरकार ने सफाई दी है. वित्त मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने के फैसले के पीछे किसी विदेशी देश का दबाव नहीं है. भारत UPI से जुड़े फैसले खुद लेता है और किसी विदेशी देश के दबाव में नहीं है.

वित्त मंत्रालय का यह स्पष्टीकरण कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आया है कि सरकार ने व्यापारी छूट दर लागू करने का निर्णय लेने में अमेरिकी दबाव के आगे घुटने टेक दिए. वहीं, मंत्रालय के अनुसार, इस नए सिस्टम का मकसद यह पक्का करना है कि डिजिटल पेमेंट सिस्टम आर्थिक रूप से टिकाऊ, सबके लिए सुलभ और आम जनता के लिए किफायती बना रहे.

वित्त मंत्रालय ने X पर एक पोस्ट में कहा कि कुछ दावों में कहा गया है कि यह बदलाव विदेशी प्रभाव के कारण है. यह गलत है. भारत की यूपीआई नीति संबंधी निर्णय स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं, जिसका स्पष्ट लक्ष्य एक आत्मनिर्भर, समावेशी और किफायती डिजिटल भुगतान प्रणाली का निर्माण करना है.

UPI से पैसे भेजना फ्री रहेगा

वित्त मंत्रालय ने साफ किया कि आम ग्राहकों के लिए UPI पहले की तरह फ्री रहेगा. रोजमर्रा के पेमेंट, जैसे दोस्तों या परिवार को पैसे भेजना, दुकानों पर पेमेंट करना या QR कोड स्कैन करने पर ग्राहकों से कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा. खास तौर पर, पर्सनटूपर्सन ट्रांजैक्शन इस MDR के दायरे में नहीं आएंगे.

नए सिस्टम के तहत, ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI पेमेंट पर कोई MDR नहीं लगेगा। वित्त मंत्रालय ने बताया कि 95 प्रतिशत से ज़्यादा मर्चेंट ट्रांजैक्शन ₹2,000 से कम के होते हैं. इसके अलावा, UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक कमाने वाले छोटे मर्चेंट को इन चार्ज से छूट दी गई है.

कांग्रेस ने विदेशी दबाव का लगाया था आरोप

कांग्रेस ने नए MDR सिस्टम को लेकर सरकार से सवाल किए थे. लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से कई लेकर विपक्ष के कई नेताओं ने UPI पर चार्ज के फैसले को लेकर विदेशी दबाव बताया था. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया. नई प्राइसिंग व्यवस्था को “टैक्स” बताते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि UPI पर टैक्स लगाने से हर भारतीय पर बोझ पड़ेगा और इससे बड़ी रकम अमेरिका चली जाएगी.

UPI पर सरकार ने क्यों लगाया चार्ज?

विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार ने कहा कि UPI से जुड़े नीतिगत फैसले स्वतंत्र रूप से लिए जाते हैं. वित्त मंत्रालय ने बताया कि नई व्यवस्था का मकसद UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और अन्य खर्चों को संभालने के लिए एक टिकाऊ ढांचा तैयार करना है, जबकि आम ग्राहकों के लिए UPI पेमेंट फ्री बने रहेंगे.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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