Saturday, April 18, 2026
Entertainment

Bhooth Bangla: अक्षय कुमार की फिल्म का टिकट बुक करने से पहले ये पढ़ें, भारी न पड़ जाएं ये 5 कमियां

5 Drawbacks Of Bhooth Bangla: प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की जोड़ी जब भी साथ आती है, उम्मीदों का पहाड़ खड़ा हो जाता है. ‘भूत बंगला’ को लेकर भी कुछ ऐसा ही माहौल था. फिल्म ने सिनेमाघरों में दस्तक दी, कॉमेडी के जरिए लोगों को हंसाया भी, लेकिन जैसे ही दर्शक थिएटर से बाहर निकले, उनके मन में एक टीस रह गई. क्या यह फिल्म वाकई ‘भूल भुलैया’ के औरे को मैच कर पाई?

Bhooth Bangla: अक्षय कुमार की फिल्म का टिकट बुक करने से पहले ये पढ़ें, भारी न पड़ जाएं ये 5 कमियां
Bhooth Bangla: अक्षय कुमार की फिल्म का टिकट बुक करने से पहले ये पढ़ें, भारी न पड़ जाएं ये 5 कमियां

वैसे तो पूरी फिल्म में मनोरंजन का तड़का तो लगा है, लेकिन कुछ ऐसी ‘कच्ची’ चीजें रह गई हैं जिन्होंने फिल्म का जायका बिगाड़ दिया. अगर आप फिल्म देखने का प्लान बना रहे हैं, तो इन 5 बड़ी कमियों के बारे में जान लेना आपके लिए बेहद जरूरी है.

1. जरूरत से ज्यादा लंबी है फिल्म

फिल्म की सबसे पहली और बड़ी कमजोरी इसकी लंबाई है. ‘‘ लगभग 2 घंटे 45 मिनट (164.52 मिनट) लंबी है. आज के दौर में जब दर्शक ज्यादातर समय चुस्त और रफ़्तार वाली कहानियां पसंद करते हैं, वहां इतनी लंबी फिल्म किसी चुनौती से कम नहीं है. फिल्म की एडिटिंग इतनी ढीली है कि कई सीन बेवजह खींचे हुए लगते हैं. अगर फिल्म को 20-25 मिनट छोटा रखा जाता, तो इसका इम्पैक्ट और अच्छा होता.

2. हॉरर के नाम पर सिर्फ ‘कॉमेडी’ का शोर

फिल्म को ‘हॉरर-कॉमेडी’ के तौर पर प्रमोट किया गया था, लेकिन यहां कुछ जगह पर ‘हॉरर’ का हिस्सा काफी कमजोर नजर आता है. हालांकि फिल्म देखते वक्त कई ऐसे पल आते हैं, जब आपकी रूह कांपे या आप सीट से उछल पड़ें. लेकिन ‘जंप-स्केयर्स’ की भारी कमी है और एक-दो डरावने सीन बच्चों के लेवल के लगते हैं. जो फैंस बहुत ज्यादा डर ढूंढ रहे थे, उन्हें शायद निराशा हाथ लगी है क्योंकि ये फिल्म एक हॉरर-कॉमेडी है.

3. एक्ट्रेस के साथ नाइंसाफी?

फिल्म की कास्टिंग लिस्ट देखकर लगा था कि पर्दे पर एक्टिंग का सैलाब आएगा. लेकिन फिल्म देखते समय बड़ा झटका तब लगा जब पता चला कि जैसी नेशनल अवार्ड विनिंग एक्ट्रेस को सिर्फ एक ‘स्पेशल अपीयरेंस’ तक सीमित कर दिया गया है. वहीं, वामिका गब्बी और मिथिला पालकर जैसी टैलेंटेड एक्ट्रेस के पास करने के लिए कुछ खास नहीं है. उनके किरदार इतने अधूरे और उलझे हुए हैं कि दर्शकों को उनसे जुड़ने का मौका ही नहीं मिलता.

4. नयेपन की कमी

कुछ लोगों को इस फिल्म में कोई नयापन नहीं नजर आएगा. कई जगह ऐसा महसूस होगा कि हम प्रियदर्शन की ही पुरानी फिल्मों के सीन दोबारा देख रहे हैं. हालांकि कॉमेडी फिल्मों के फैंस के लिए ये एक नोस्टाल्जिया है, लेकिन कुछ लोग इसे रिपिटेटिव मान सकते हैं.

5. सुस्त सेकंड हाफ

फिल्म का पहला हाफ तो हंसी-मजाक में निकल जाता है, लेकिन असली समस्या शुरू होती है सेकंड हाफ में. यहां कहानी फ्लैशबैक और पौराणिक इतिहास की ओर मुड़ती है. पौराणिक कथाओं को जोड़ना एक अच्छा विचार था, लेकिन इसे जिस तरह से पेश किया गया है, वो थोड़ा उबाऊ लग सकता है. यही वजह है कि फिल्म की गति इतनी धीमी हो जाती है.

‘भूत बंगला’ कोई खराब फिल्म नहीं है, निसंदेह ये एक शानदार फिल्म है, लेकिन अगर इन खामियों पर काम किया जाता तो ये एक मास्टरक्लास फिल्म बन सकती थी. हालांकि इन सब के बावजूद भी अगर आप हॉरर कॉमेडी के फैन हो तो ये आप इसे थिएटर में खूब एन्जॉय करेंगे.

khabarmonkey@gmail.com

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