भारत की बड़ी फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स कंपनियों में अब काम करने का तरीका तेजी से बदल रहा है. कंपनियां उत्पादन बढ़ाने, लागत कम करने और काम को ज्यादा तेज बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस , ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं. इसका असर अब कर्मचारियों की संख्या पर भी साफ दिखाई देने लगा है. वित्त वर्ष 202526 की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, कुछ बड़ी कंपनियों ने अपने स्थायी कर्मचारियों की संख्या कम की है, जबकि कुछ कंपनियों ने नई भर्तियां भी की हैं.

सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदुस्तान यूनिलीवर और डाबर इंडिया ने अपने स्थायी कर्मचारियों की संख्या में कमी की है. वहीं नेस्ले इंडिया, मैरिको और टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स जैसी कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई है. हालांकि एक बात लगभग सभी कंपनियों में समान रही कि उन्होंने कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी भी की है.
HUL और Dabur में घटी कर्मचारियों की संख्या
देश की सबसे बड़ी FMCG कंपनियों में शामिल HUL में 31 मार्च 2026 तक स्थायी कर्मचारियों की संख्या घटकर 5,898 रह गई, जबकि एक साल पहले यह संख्या 6,604 थी. यानी कंपनी के पेरोल से 700 से अधिक कर्मचारी कम हो गए. इसी तरह डाबर इंडिया में भी कर्मचारियों की संख्या कम हुई. कंपनी में स्थायी कर्मचारियों की संख्या 5,343 से घटकर 4,770 रह गई. हालांकि कर्मचारियों की संख्या कम होने के बावजूद कंपनी ने वेतन वृद्धि जारी रखी. HUL ने कर्मचारियों के औसत वेतन में 6.08% की बढ़ोतरी की, जबकि Dabur ने 7.7% की वेतन वृद्धि दी.
इन कंपनियों ने बढ़ाई भर्ती
दूसरी ओर कुछ कंपनियों ने अपने कारोबार के विस्तार के साथ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई. नेस्ले में कुल कर्मचारियों की संख्या 8,629 से बढ़कर 8,680 हो गई. हालांकि स्थायी कर्मचारियों की संख्या में मामूली कमी दर्ज की गई. मैरिको ने भी नई भर्तियां कीं और उसके स्थायी कर्मचारियों की संख्या 1,908 से बढ़कर 1,983 हो गई. वहीं टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने सबसे ज्यादा भर्ती की. कंपनी के स्थायी कर्मचारियों की संख्या 4,079 से बढ़कर 4,558 हो गई.
आखिर क्यों घट रही है कर्मचारियों की जरूरत?
विशेषज्ञों का मानना है कि FMCG कंपनियां अब अपने कारोबार में तेजी से नई तकनीकों को अपना रही हैं. फैक्ट्रियों में ऑटोमैटिक मशीनों का इस्तेमाल बढ़ रहा है. गोदामों, सप्लाई चेन, पैकेजिंग और बैकऑफिस के कई काम अब डिजिटल सिस्टम और AI की मदद से किए जा रहे हैं. इसके अलावा कंपनियां AI बेस्ड डेटा एनालिटिक्स, ऑटोमैटेड पैकेजिंग लाइन, ERP सिस्टम और डिजिटल सप्लाई चेन मैनेजमेंट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं. इससे कम कर्मचारियों के साथ भी पहले की तुलना में ज्यादा उत्पादन और बेहतर संचालन संभव हो रहा है.