बुधवार, 16 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
10 साल का प्यार, निजी समारोह और खुशियों की नई शुरुआत! मलयालम एक्ट्रेस Ahaana Krishna ने सिनेमैटोग्राफर Nimish Ravi संग रचाई शादी​ | Team India ने जीता 2nd T20I, कप्तान Shreyas Iyer ने दिए अगले मैच में प्लेइंग 11 में बदलाव के संकेत​ | Houthi Attack Saudi Arabia: मक्का के पास ड्रोन को लेकर सऊदी-हूती आमने-सामने, हूतियों ने किया इनकार, F-15 गिराने का भी दावा​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Business

Indian Exports: अगस्त में भारत का निर्यात 26% बढ़ा, इन देशों में बंपर बिक रहा हमारा सामान​

Indian Exports: भारत के निर्यातकों के लिए अगस्त का महीना बेहद शानदार साबित हुआ है. वैश्विक बाजार की तमाम चुनौतियों के बावजूद विदेशी बाजारों में भारतीय सामानों की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. मंगलवार को वाणिज्य मंत्रालय ने व्यापार के नए आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में भारत […]

Indian Exports: भारत के निर्यातकों के लिए अगस्त का महीना बेहद शानदार साबित हुआ है. वैश्विक बाजार की तमाम चुनौतियों के बावजूद विदेशी बाजारों में भारतीय सामानों की मांग में जबरदस्त इजाफा देखने को मिला है. मंगलवार को वाणिज्य मंत्रालय ने व्यापार के नए आंकड़े जारी किए हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में भारत के वस्तु निर्यात में 26 फीसदी का तगड़ा उछाल आया है. बीते साल अगस्त 2025 में कुल निर्यात 34.74 अरब डॉलर था, जो इस बार बढ़कर 43.81 अरब डॉलर हो गया है. निर्यात में आई इस अचानक तेजी के पीछे अमेरिका में भारतीय सामानों पर ड्यूटी का कम होना सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है. इसके अलावा घरेलू मुद्रा में आई गिरावट ने भी भारतीय निर्यातकों को दुनिया भर में अपना दबदबा बनाने का मौका दिया है.

अमेरिकी बाजार का शानदार सपोर्ट

बीते साल अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव के चलते भारतीय सामानों पर भारी भरकम टैरिफ लगा दिया गया था. अगस्त 2025 की शुरुआत में 25 फीसदी का रेसिप्रोकल टैरिफ लागू हुआ था. इसके बाद 27 अगस्त तक रूसी तेल आयात के मुद्दे पर अमेरिका ने 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ भी लगा दिया. कुल मिलाकर भारतीय निर्यातकों को 50 फीसदी ड्यूटी का सामना करना पड़ रहा था. लेकिन इस साल हालात पूरी तरह बदल चुके हैं. भारत के निर्यात को अब अमेरिका में सिर्फ 10 फीसदी टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है. इसी का सीधा असर अब व्यापारिक आंकड़ों में साफ नजर आ रहा है. अगस्त महीने में अकेले अमेरिका को होने वाला निर्यात 6.8 अरब डॉलर से उछलकर 8.3 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया. ये 21 फीसदी से ज्यादा की छलांग है. इस कैलेंडर वर्ष में वाशिंगटन के लिए ये सबसे बड़ा एक्सपोर्ट जंप है.

रुपये की कमजोरी से मिला फायदा

निर्यात में इतनी बड़ी बढ़ोतरी के पीछे दूसरी सबसे बड़ी वजह रुपये की कीमत में आई गिरावट है. घरेलू मुद्रा में 10 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये के कमजोर होने से निर्यातकों को विदेशी बाजारों में अपने उत्पाद सस्ते में बेचने का मौका मिलता है, जिससे ऑर्डर्स की संख्या बढ़ जाती है. एचएसबीसी की एक हालिया रिपोर्ट भी इस बात की तस्दीक करती है. रिपोर्ट के मुताबिक हाईटेक एक्सपोर्ट को मुद्रा में गिरावट का सबसे ज्यादा फायदा मिला है. कोर एक्सपोर्ट में लगभग आधी हिस्सेदारी रखने वाले मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स व ट्रांसपोर्ट से जुड़े उत्पादों की मांग में दो से तीन तिमाहियों के दौरान सबसे तेज उछाल आया है. समुद्री उत्पादों व खाद्य पदार्थों जैसे लोटेक एक्सपोर्ट ने भी ठीकठाक प्रदर्शन किया है. हालांकि टेक्सटाइल व फुटवियर जैसे मिडटेक एक्सपोर्ट पर इस गिरावट का कोई खास असर नहीं दिखा है.

लेबर इंटेंसिव सेक्टर की बड़ी चुनौती

भले ही कुल निर्यात के आंकड़ों में एक शानदार ग्रोथ दिखी हो, लेकिन कुछ खास सेक्टर्स के लिए ये समय थोड़ा मुश्किल भरा रहा है. अप्रैल से जून तिमाही के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इंजीनियरिंग गुड्स, इलेक्ट्रॉनिक्स व फार्मास्यूटिकल्स जैसे हाईएंड उत्पादों में क्रमश: 18.1 फीसदी, 22.6 फीसदी व 6.8 फीसदी की अच्छी ग्रोथ दिखी. लेकिन लेबर इंटेंसिव यानी ज्यादा श्रम वाले सेक्टर्स में गिरावट दर्ज की गई है. इन सेक्टर्स से जुड़े लोग दबाव में हैं. टेक्सटाइल निर्यात 12.4 फीसदी नीचे गिरा है. इसी तरह चमड़े के उत्पादों में भी 4.7 फीसदी की कमी आई है. फल, सब्जियां, सिरेमिक्स, ग्लासवेयर व जूट जैसे कम मार्जिन वाले उत्पादों का निर्यात भी लगातार दबाव में रहा है. चाय के निर्यात की हालत सबसे ज्यादा खराब रही, जिसमें 17.5 फीसदी की भारी गिरावट देखने को मिली है. कुल 31 एक्सपोर्ट सेक्टर्स में से 11 ने इस तिमाही में गिरावट दर्ज की है.

सोने के आयात में आई भारी कमी

निर्यात के साथसाथ आयात के मोर्चे पर भी भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. चालू वित्त वर्ष में ये पहला मौका है जब सोने के आयात में इतनी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. बीते साल अगस्त में 5.44 अरब डॉलर का भारी भरकम सोना आयात किया गया था. इस साल ये आंकड़ा आधे से भी कम होकर महज 2.30 अरब डॉलर रह गया है. सोने का आयात घटने से कुल वस्तु आयात की ग्रोथ भी धीमी पड़ी है, जो सिर्फ 14.05 फीसदी की दर से बढ़कर 70.67 अरब डॉलर तक पहुंची है. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि आयात की वृद्धि दर निर्यात से कम रही है. इसका सीधा फायदा देश के वस्तु व्यापार घाटे को कम करने में मिला है. व्यापार घाटा अब 27.20 अरब डॉलर से घटकर 26.86 अरब डॉलर रह गया है.

निर्यात बास्केट में आ रही मजबूती

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के अध्यक्ष एस सी राल्हन का कहना है कि 26.12 फीसदी की ये ग्रोथ बेहद उत्साहजनक है. ये भारतीय निर्यातकों की ताकत, प्रतिस्पर्धा व बाजार के हिसाब से ढलने की क्षमता को दिखाती है. चीन, सिंगापुर, जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, मलेशिया, तंजानिया, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन व श्रीलंका जैसे बाजारों में भारतीय सामान की बढ़ती पहुंच देश के निर्यात बास्केट के विस्तार का संकेत है. ऑटोमोबाइल निर्यात में 22.2 फीसदी की मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई है, जिसमें दोपहिया व तिपहिया वाहनों का दबदबा रहा. इसके अलावा जेम्स एंड ज्वेलरी का निर्यात भी 3.14 फीसदी बढ़कर 2.30 अरब डॉलर हो गया है. राल्हन ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक व इंजीनियरिंग उत्पादों का लगातार विस्तार भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है. वहीं आयात के मोर्चे पर पेट्रोलियम, ऊर्जा उत्पादों व औद्योगिक इनपुट्स की मांग घरेलू उत्पादन की जरूरतों को पूरा कर रही है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY