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₹20 की UPI पेमेंट फीस से होगी 22 हजार करोड़ की कमाई! ये रहा पूरा गणित​

2000 रुपए से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर ट्रांजेक्शन चार्ज लगाने की चर्चा खूब जोर शोर से चल रही है. ऐसे में दुनिया की दिग्गज कंपनियों में से एक बर्नस्टीन का अनुमान आया है. कंपनी ने अनुमान लगाया है कि अगर कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू के आधे हिस्से पर 40बेसिसपॉइंट का MDR लगाया जाता है, तो UPI […]

2000 रुपए से ज्यादा यूपीआई पेमेंट पर ट्रांजेक्शन चार्ज लगाने की चर्चा खूब जोर शोर से चल रही है. ऐसे में दुनिया की दिग्गज कंपनियों में से एक बर्नस्टीन का अनुमान आया है. कंपनी ने अनुमान लगाया है कि अगर कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू के आधे हिस्से पर 40बेसिसपॉइंट का MDR लगाया जाता है, तो UPI से वित्त वर्ष 2028 तक सालाना 22,000 करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिल सकता है. यह उस पेमेंट इकोसिस्टम के लिए कमाई का एक बड़ा मौका होगा जो अब तक बिना मर्चेंट फीस के काम कर रहा है. बर्नस्टीन का अनुमान है कि इस रकम में से बैंकों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए और पेमेंट ऐप्स को करीब 7,000 करोड़ रुपए मिल सकते हैं. हालांकि, असल कमाई रेगुलेटरी बंटवारे और ऐप्स व उनके पार्टनर बैंकों के बीच कमर्शियल समझौतों पर निर्भर करेगी.

ये अनुमान तब अहम हो जाते हैं जब 14 सितंबर को वित्त मंत्रालय ने 2,000 रुपए तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay के जरिए होने वाले डेबिटकार्ड ट्रांजैक्शन को ऐसे पेमेंट मोड के तौर पर नोटिफाई किया, जिन पर बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकते. इस नोटिफिकेशन से छोटे UPI ट्रांजैक्शन चार्ज से सुरक्षित हो गए हैं, जबकि 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन जीरोचार्ज कैटेगरी से बाहर रहेंगे. यह अपने आप में ज्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर MDR नहीं लगाएगा. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर 20 रुपए की यूपीआई पेमेंट फीस 22 हजार करोड़ रुपए की कमाई कैसे कर सकती है?

अगस्त में सरकार ने क्या कहा था?

अगस्त में सरकार ने कहा था कि ग्राहक UPI पेमेंट फ्री में करते रहेंगे और सभी पर्सनटूपर्सन ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे. सरकार ने कहा था कि अगर MDR लागू किया जाता है, तो यह एक तय सीमा से ज्यादा वाले कुछ खास मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर ही और मामूली दर पर लागू होगा, जबकि ज़्यादातर मर्चेंट ट्रांजैक्शन फ्री बने रहेंगे. इससे ज्यादा वैल्यू वाले मर्चेंट ट्रांजैक्शन से कमाई का एक संभावित रास्ता बनता है. यह ऐसा सेगमेंट है जिसकी UPI वैल्यू में बहुत बड़ी हिस्सेदारी है. बर्नस्टीन का अनुमान है कि 2,000 रुपए से ज्यादा के ट्रांजैक्शन UPI ​​ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का सिर्फ 4 फीसदी हैं, लेकिन ट्रांजैक्शन वैल्यू का लगभग 70 फीसदी हैं. इसलिए, रोजमर्रा के पेमेंट में ज्यादा रुकावट डाले बिना कमाई के लिए ये सबसे व्यावहारिक जरिया हैं.

कुछ ऐसा होगा कमाई का गणित

बर्नस्टीन में इंडिया हेड प्रणव गुंडलापल्ले ने रिपोर्ट में कहा कि डेबिट कार्ड MDR बेंचमार्क, RBI के कॉस्ट अनुमान और इसी तरह के पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स के आधार पर, हमारा मानना ​​है कि 3040 bps का MDR सबसे संभावित होगा. बर्नस्टीन का 22,000 करोड़ रुपए का अनुमान वित्त वर्ष 2028 तक UPI ट्रांजैक्शन वैल्यू के 50 फीसदी हिस्से पर 40bps लेवी लगाने पर आधारित है.

इसके अनुमानित बंटवारे के तहत, जारी करने वाले बैंकों को कुल कमाई का लगभग 30 फीसदी और एक्वायरिंग बैंकों को 25 फीसदी मिल सकता है, जबकि PSP बैंकों को भी इसमें हिस्सा मिलेगा. मर्चेंटसाइड के थर्डपार्टी एप्लिकेशन प्रोवाइडर्स को लगभग 23 फीसदी, कंज्यूमरसाइड TPAPs को लगभग 8 फीसदी और पेमेंट नेटवर्क को लगभग 5 फीसदी मिल सकता है. इसका मतलब होगा कि बैंकों को लगभग 14,000 करोड़ रुपए और पेमेंट ऐप्स को लगभग 7,000 करोड़ रुपए मिलेंगे.

इसे जरा उदाहरण के तौर पर समझते हैं. अगर कुल वैल्यू के 70 में 50 फीसदी वैल्यू का औसत ट्रांजेक्शन 5000 रुपए होता है तो 40 बेसिस प्वाइंट्स के हिसाब से चार्ज की वैल्यू 20 रुपए बनती है. इसका मतलब है कि 20 रुपए का चार्च 22 हजार करोड़ रुपए का खजाना तैयार कर सकती है.

हालांकि, असल बंटवारा इससे काफी अलग हो सकता है. रेगुलेटरी फ्रेमवर्क यह तय करेगा कि MDR रेट क्या होगा और यह किन ट्रांजैक्शन पर लागू होगा, जबकि पेमेंट ऐप्स और उनके पार्टनर PSP बैंकों के बीच कमर्शियल एग्रीमेंट यह तय करेंगे कि फीस पूल का हिस्सा आखिर में कैसे बांटा जाएगा.

यूपीआई पेमेंट ने बनाया ​था रिकॉर्ड

गुंडलापल्ले ने कहा कि मौजूदा फ्रेमवर्क को बनाए रखने के लिए ठोस तर्क हैं. उन्होंने UPI के ब्रॉडर बेनिफिट्स की ओर इशारा किया, जिसमें कैशहैंडलिंग और ATM की कम कॉस्ट शामिल है. इसके साथ ही, पेमेंट प्लेटफॉर्म्स को अपने इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट से कमाई करने की जरूरत और हाल की पॉलिसी चर्चाओं ने MDR पर बहस को फिर से चर्चा में ला दिया है. UPI तेजी से भारत का प्रमुख मर्चेंटपेमेंट माध्यम बन गया है. बर्नस्टीन के डाटा के अनुसार, कार्ड की तुलना में अभी यह पर्सनटूमर्चेंट पेमेंट वैल्यू का लगभग 78 फीसदी हिस्सा है, जबकि जून तिमाही में UPI मर्चेंट ट्रांज़ैक्शन वैल्यू में सालदरसाल 27% की बढ़ोतरी हुई.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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