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अमेरिका में क्या किसी को भी राजदूत बना सकते हैं? ट्रंप ने अपने फेवरेट सिंगर की पत्नी को चुना​

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गॉड ब्लेस द यूएसए गीत के प्रसिद्ध गायक ली ग्रीनवुड की पत्नी किम्बर्ली ग्रीनवुड को बारबाडोस और पूर्वी कैरेबियाई देशों के लिए अमेरिकी राजदूत नियुक्त करने के लिए नामित किया है. इस सूचना के सार्वजनिक होने के साथ ही अमेरिका में राजनीतिक नियुक्तियों, व्यक्तिगत संबंधों और राजदूत पद की योग्यता […]

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गॉड ब्लेस द यूएसए गीत के प्रसिद्ध गायक ली ग्रीनवुड की पत्नी किम्बर्ली ग्रीनवुड को बारबाडोस और पूर्वी कैरेबियाई देशों के लिए अमेरिकी राजदूत नियुक्त करने के लिए नामित किया है. इस सूचना के सार्वजनिक होने के साथ ही अमेरिका में राजनीतिक नियुक्तियों, व्यक्तिगत संबंधों और राजदूत पद की योग्यता को लेकर बहस तेज कर दी है.इस घटना के बाद एक सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति अपनी पसंद के किसी भी व्यक्ति को राजदूत बना सकता है?

अमेरिकी राष्ट्रपति किसी व्यक्ति को राजदूत पद के लिए नामित कर सकता है, लेकिन उसे अंतिम रूप से नियुक्त करने का अधिकार अकेले राष्ट्रपति के पास नहीं है. अमेरिकी संविधान के अनुसार, राजदूतों की नियुक्ति राष्ट्रपति करता है, पर इसके लिए सीनेट की सलाह और सहमति आवश्यक होती है.

नामित करने का मतलब नियुक्ति नहीं

अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 2, धारा 2, खंड 2 में कहा गया है कि राष्ट्रपति राजदूतों, अन्य सार्वजनिक मंत्रियों और वाणिज्य दूतों को नामित करेगा और सीनेट की सलाह तथा सहमति से उनकी नियुक्ति करेगा. इस व्यवस्था को आम तौर पर सलाह और सहमति की प्रक्रिया कहा जाता है. इसका अर्थ यह है कि राष्ट्रपति किसी व्यक्ति का नाम आगे बढ़ा सकता है, लेकिन वह व्यक्ति तब तक आधिकारिक रूप से राजदूत नहीं बनता, जब तक सीनेट उसकी नियुक्ति को मंजूरी न दे. सीनेट की विदेश संबंध समिति आम तौर पर नामित व्यक्ति की पृष्ठभूमि, अनुभव, वित्तीय हितों, राजनीतिक गतिविधियों और प्रस्तावित देश से संबंधित योग्यता की जांच करती है. इसके बाद समिति अपनी सिफारिश देती है और कई मामलों में पूरी सीनेट मतदान करके निर्णय लेती है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

संवैधानिक प्रक्रिया के अधीन है किम्बर्ली का मामला

किम्बर्ली ग्रीनवुड का मामला भी इसी संवैधानिक प्रक्रिया के अधीन है. उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने उनका नाम सीनेट को भेजा है. इसका मतलब यह है कि वह अभी केवल नामित उम्मीदवार हैं, नियुक्त राजदूत नहीं. उनकी नियुक्ति को सीनेट की पुष्टि मिलना बाकी है. यदि सीनेट पुष्टि कर देती है, तभी वह आधिकारिक रूप से बारबाडोस और पूर्वी कैरेबियाई क्षेत्र में अमेरिका की राजनयिक प्रतिनिधि बनेंगी.

ग्रीनवुड को बारबाडोस के साथसाथ सेंट किट्स एंड नेविस, सेंट लूसिया, एंटीगुआ एंड बारबुडा, डोमिनिका, ग्रेनेडा और सेंट विंसेंट एंड द ग्रेनेडाइंस के लिए भी जिम्मेदारी मिलने का प्रस्ताव है. यह एक क्षेत्रीय राजनयिक भूमिका होगी. हालांकि, एक व्यक्ति को कई देशों के लिए समानांतर रूप से मान्यता मिलना अमेरिकी विदेश नीति में असामान्य नहीं है. छोटे देशों या ऐसे क्षेत्रों में जहां अमेरिका का राजनयिक ढांचा सीमित है, एक राजदूत को कई देशों की जिम्मेदारी दी जा सकती है.

ट्रंप ने ली ग्रीनवुड की पत्नी को अमेरिकी राजदूत के पद के लिए नामित किया

एक और महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान लागू

अमेरिकी विदेश सेवा कानून की धारा 3942 राष्ट्रपति को सीनेट की सलाह और सहमति से राजदूत, राजदूतएटलार्ज, मिशन प्रमुख और अन्य वरिष्ठ राजनयिक अधिकारियों की नियुक्ति करने की अनुमति देती है. इसी कानून में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सामान्य परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को राजदूत के रूप में नामित या उस पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता, जब तक सीनेट की सलाह और सहमति प्राप्त न हो. हालांकि, अमेरिकी कानून राष्ट्रपति को कुछ सीमित परिस्थितियों में अस्थायी विशेष मिशन के लिए किसी व्यक्ति को राजदूत का व्यक्तिगत दर्जा देने की अनुमति देता है.

ऐसी विशेष भूमिका आम तौर पर छह महीने से अधिक नहीं हो सकती. राष्ट्रपति को सीनेट की विदेश संबंध समिति को लिखित रिपोर्ट देनी पड़ती है. इस रिपोर्ट में मिशन की आवश्यकता, उसकी अवधि, सीनेट की पुष्टि के बिना नियुक्ति का कारण और संभावित हितों के टकराव की जानकारी शामिल होनी चाहिए. यह व्यवस्था स्थायी राजदूत की नियुक्ति से अलग है. इसलिए इसे सामान्य राजदूत पद के लिए रास्ता नहीं माना जा सकता.

पति ली के साथ किम्बर्ली.

किम्बर्ली के नॉमिनेशन पर विवाद क्यों?

इस नॉमिनेशन को लेकर विवाद का मुख्य कारण यह नहीं है कि वह गायक की पत्नी हैं. अमेरिकी कानून किसी राजदूत उम्मीदवार के लिए राजनयिक सेवा में पहले से अधिकारी होना अनिवार्य नहीं करता. अमेरिका में कई राष्ट्रपतियों ने राजनीतिक समर्थकों, कारोबारियों, दानदाताओं, पूर्व सांसदों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों को राजदूत बनाया है. इसे राजनीतिक नियुक्ति कहा जाता है. फिर भी, कानून योग्यताओं को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करता.

विदेश सेवा कानून की धारा 3944 कहती है कि किसी मिशन प्रमुख में उस पद के कर्तव्यों को पूरा करने की स्पष्ट क्षमता होनी चाहिए. इसमें संबंधित देश की भाषा या बोली का उपयोगी ज्ञान, उस देश के इतिहास, संस्कृति, आर्थिक और राजनीतिक संस्थानों तथा उसके लोगों के हितों की समझ शामिल है. कानून यह भी कहता है कि सामान्य रूप से मिशन प्रमुख के पदों के लिए करियर विदेश सेवा अधिकारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. हालांकि, परिस्थितियों के अनुसार योग्य व्यक्तियों की नियुक्ति भी की जा सकती है.

तर्क यह भी दिए जा रहे

ग्रीनवुड के समर्थकों का तर्क है कि उनका अनुभव केवल उनके पति की लोकप्रियता तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने पहले ट्रंप के स्वामित्व वाली मिस यूनिवर्स संस्था के साथ काम किया था और राज्य स्तरीय सौंदर्य प्रतियोगिताओं के संचालन से जुड़ी रही थीं. उनके पति ली ग्रीनवुड लंबे समय से ट्रंप के समर्थक रहे हैं और उनका देशभक्ति गीत ट्रंप के राजनीतिक कार्यक्रमों में कई बार बजाया गया है. इन संबंधों के कारण आलोचक इसे व्यक्तिगत निष्ठा या राजनीतिक निकटता का पुरस्कार मान सकते हैं. केवल राजनीतिक निकटता अपने आप में नियुक्ति को गैरकानूनी नहीं बनाती.

कानूनी प्रश्न यह है कि क्या राष्ट्रपति ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया? क्या उम्मीदवार की पृष्ठभूमि की उचित जांच हुई, क्या हितों के टकराव का खुलासा किया गया और क्या सीनेट ने स्वतंत्र रूप से पुष्टि पर विचार किया. यदि इन चरणों का पालन होता है, तो किसी गैरकैरियर व्यक्ति को राजदूत के लिए नामित करना अमेरिकी व्यवस्था के भीतर संभव है.

राष्ट्रपति के पास अधिकार फिर भी सीनेट महत्वपूर्ण

यह भी समझना जरूरी है कि राष्ट्रपति के पास विदेश नीति और राजदूतों के चयन में व्यापक राजनीतिक अधिकार होता है. राजदूत राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं और विदेश नीति लागू करने में कार्यकारी शाखा के साथ काम करते हैं. इसलिए राष्ट्रपति ऐसे लोगों को चुनना चाहता है जिन पर उसे भरोसा हो. दूसरी ओर, सीनेट की पुष्टि का उद्देश्य इसी शक्ति पर संवैधानिक नियंत्रण रखना है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि अमेरिका का राष्ट्रपति किसी को भी सीधे राजदूत बना सकता है. अधिक सटीक बात यह है कि राष्ट्रपति लगभग किसी भी योग्य व्यक्ति को नामित कर सकता है, चाहे वह करियर राजनयिक हो या राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन से आया हुआ व्यक्ति. लेकिन अंतिम नियुक्ति के लिए सीनेट की सलाह और सहमति जरूरी है. उम्मीदवार की योग्यता, चरित्र, वित्तीय हितों और संभावित हितों के टकराव की जांच हो सकती है.

निष्कर्ष यह है कि किम्बर्ली ग्रीनवुड के मामले में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. ट्रंप ने उन्हें नामित किया है, पर सीनेट की पुष्टि के बाद ही वह आधिकारिक रूप से अमेरिकी राजदूत बनेंगी. इस मामले को समझने का सही तरीका यही है कि यह राष्ट्रपति की नामांकन शक्ति और सीनेट की पुष्टि शक्ति, दोनों के बीच संवैधानिक संतुलन का उदाहरण है. सवाल केवल यह नहीं है कि राष्ट्रपति ने किसे चुना. असली सवाल यह है कि चुने गए व्यक्ति की योग्यता पर सीनेट क्या निर्णय लेती है और क्या अमेरिकी विदेश नीति के हित में वह नियुक्ति उचित साबित होती है?

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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